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कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

गृह मंत्रालय द्वारा ग्रीनपीस पर भारतीयों से चंदा लेने पर रोक, ग्रीनपीस ने इसे संगठन को बंद करने की साजिश करार दिया..

ग्रीन पीस इंडिया ने गृह मंत्रालय द्वारा एनजीओ पर किये जा रहे हमले को लोकतंत्र और विकास के वैकल्पिक दृष्टि रखने वालों को दबाने का प्रयास बताया। पिछले हफ्ते गृह मंत्रालय ने अस्थायी रुप से ग्रीनपीस इंडिया को विदेशी पैसे प्राप्त करने के अधिकार पर रोक लगाते हुए एफसीआरए उल्लंघन के लिये कारण बताओ नोटिस जारी किया था। गृह मंत्रालय द्वारा कथित एफसीआरए उल्लंघन के लिये किये कार्रवाई को गैर सरकारी संगठन को बंद करने का संकेत समझा जा रहा है। ग्रीनपीस इंडिया को 70 प्रतिशत पैसे भारतीयों से प्राप्त होता है लेकिन गृह मंत्रालय ने इस पैसे को भी अवरुद्ध कर दिया है। इस तरीके से मंत्रालय एनजीओ को नये समर्थकों द्वारा मिलने वाले पैसे पर भी रोक लगाने की कोशिश कर रही है।

GreenPeace Protest

ग्रीनपीस इंडिया के कार्यकारी निदेशक समित आईच ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम प्रक्रिया का पालन करेंगे और गृह मंत्रालय द्वारा एफसीआरए उल्लंघन के आरोपों का जवाब देंगे। हम इस मामले को अदालत में ले जायेंगे, लेकिन सरकार ने हमारे घरेलू खातों को भी बंद कर दिया है और अब साधारण भारतीयों को भी हमें समर्थन देने से रोक रही है, जो हमें स्वच्छ हवा, स्वच्छ जंगल, कीटनाशक मुक्त खाद्य और अच्छे पर्यावरण के लिये समर्थन दे रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि गृह मंत्रालय का उद्देश्य ग्रीनपीस के विदेशी फंड को रोकना नहीं है बल्कि पूरी तरह इसे बंद करना है। इस तरह सरकार लाखों भारतीयों की उन चिंताओं को भी दरकिनार कर रही है जो हमें समर्थन और आर्थिक मदद देते हैं।”
इन पांच दिनों में जब से एफसीआर निलंबन की खबर मीडिया को गृह मंत्रालय द्वारा लीक की गई है, भारी संख्या में देश के नागरिक आगे बढ़कर संगठन को समर्थन और मदद देने लगे हैं। हालांकि, उनमें ज्यादातर लोगों द्वारा एनजीओ को दान देने के प्रयास को कथित रुप से गृह मंत्रालय के निर्देश पर अवरुद्ध कर दिया गया है।

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