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BJP के खिलाफ आज हो सकता है जनता दल परिवार..

नई दिल्ली। बिहार चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को रोकने के लिए एक होने की राह पर चल रहा समाजवादी कुनबा बुधवार को एक हो सकता है। समाजवादी पार्टी (सपा) मुखिया मुलायम सिंह के आवास पर होने वाली बैठक में इस पर फैसला होने की उम्मीद है। हालांकि विलय से पहले पार्टी के नाम व चुनाव चिन्ह को लेकर सपा के सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

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सपा के अलावा विलय में शामिल अन्य पांच दलों में नाम व निशान को लेकर लगभग एक राय बन गई है, जबकि दो साल बाद उत्तर प्रदेश में चुनाव का सामना करने को तैयार हो रही सपा में विलय को लेकर एक राय नही है। बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हो रहे इस विलय को बिहार में मोदी रथ को रोकने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश में भी यह गठजोड़ अहम माना जा रहा है। सपा की कोशिश प्रदेश के चुनाव के मद्देनजर पार्टी का नाम समाजवादी जनता पार्टी व चुनाव चिन्ह साइकिल बनाए रखने की है।

माना जा रहा है कि बुधवार को होने वाली बैठक में इस पर निर्णय आ सकता है। बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जदयू अध्यक्ष शरद यादव, पार्टी महासचिव केसी त्यागी, जेडीएस अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, सजपा प्रमुख कमल मोरारका, इनेलो नेता दुष्यंत चौटाला व सपा महासचिव रामगोपाल यादव शामिल होंगे। गौरतलब है कि गत पांच अप्रैल को राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने एक झंडा, एक निशान का नारा देते हुए एक तरह से विलय का एलान किया था और भाजपा को बिहार आने की चुनौती दी थी।

लालू ने कहा था कि जहां तक जनता परिवार व छह दलों का सवाल है, इनका विलय हो गया है और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह इसकी औपचारिक घोषणा करेंगे, क्योंकि इसके लिए उन्हें अधिकृृत किया गया है। इसके अगले दिन ही जनता परिवार से जुड़े ये दल पूर्व उपप्रधानमंत्री देवी लाल को श्रद्घांजलि देने के लिए उनकी पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय राजधानी आए थे। नीतीश कुमार ने इस संबंध में पिछले महीने जनता परिवार के नेताओं के साथ बैठकें की थी और तिहाड़ जेल जाकर इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला से मुलाकात की थी। जनता परिवार के विलय की सुगबुगाहट पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव के बाद से ही शुरू हो गई थी, जब नरेंद्र मोदी के नेतृृत्व में भाजपा को चुनाव में जबर्दस्त जीत मिली थी और बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) व राष्ट्रीय जनता दल (राजद) तथा उत्तर प्रदेश में सपा और हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को करारी पराजय का सामना करना पड़ा था।

 

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