Share this on WhatsApp
Subscribe to RSS
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

फेसबुक पर इंतज़ार है डिसलाइक बटन का..

फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग आज फेसबुक पर लोगों से रूबरू हुए और उनके सवालों का जवाब दिया. उन्होंने एक प्रयोग के तौर पर सवाल-जवाब की प्रक्रिया फेसबुक पर शुरू की. फेसबुक पर उनसे कई लोग सवाल पूछ रहे हैं और उनके जवाबों को लाइक करने वालों की संख्या हजारों में है. उनसे पूछे गये कुछ सवाल काफी रोचक भी हैं, वहीं कई लोगों ने उनसे अपने कैरियर को लेकर भी सलाह मांगी है. उनसे सवाल पूछने वालों में मशहूर गायिका शकीरा और वर्जिन ग्रुप के संस्थापक रिचर्ड ब्रैनसन भी शामिल हैं. मार्क जुकरबर्ग ने पूछे गये कई सवालों के जवाब भी काफी रोचक तरीके से दिये हैं, तो कइयों को अभी अपने सवाल के जवाब का इंतजार है. मार्क से कई भारतीयों ने भी सवाल पूछे हैं.

2015_4$largeimg215_Apr_2015_163125960

मशहूर गायिका शकीरा ने मार्क से सवाल किया है, आप हमें यह बतायें कि वंचित समुदाय के लोगों को शिक्षा देने के लिए टेक्नोलॉजी को किस तरह उपयोगी उपकरण की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है?

इस सवाल का जवाब देते हुए मार्क ने फेसबुक पर लिखा है, यह सवाल पूछने के लिए आपका धन्यवाद. मैं व्यक्तिगत सीखने को लेकर बहुत उत्साहित हूं. तकनीक का इस्तेमाल अगर व्यक्तिगत शिक्षा के लिए हो, तो बहुत अच्छा रहता है. आजकल कई ऐसे महान स्कूल हैं, जहां टेक्नोलॉजी के जरिये अलग तरह की शिक्षा देने की कोशिश हो रही है. मैं खुद भी इसके लिए प्रयासरत हूं. फेसबुक के जरिये भी सॉफ्टवेयर ऐसे टूल के निर्माण में मदद कर रहा है.

रिचर्ड ब्रैनसन ने मार्क से यह सवाल किया है, दुनिया के वैसे दो तिहाई लोग जिनके पास इंटरनेट की पहुंच नहीं है, उनके साथ संबंध बनाना कितना कठिन है? इस संबंध में मैं आपकी राय जानना चाहता हूं?

मार्क ने इस सवाल के जवाब में लिखा है, आज जब हम बात करते हैं पूरी दुनिया को जोड़ने की, तो लोग उनके फायदे शिक्षा, स्वास्थ्य और कैरियर से जोड़कर देखते हैं. लेकिन एक चीज को हम भूल जाते हैं और चर्चा में उसपर ध्यान नहीं देते हैं कि जो पहले से कनेक्टेड है वह दूसरों के साथ जुड़ने का फायदा उठा रहा है. जरा उनके बारे में सोचें, जिनके पास पूरी दुनिया को बदलने के लिए महान विचार और आइडिया हैं. अगर हम जनसंख्या को पैमाना मानें, तो ऐसे लोगों की दो तिहाई आबादी के पास इंटरनेट कनेक्शन नहीं है, लेकिन जैसे ही वे कनेक्टेड होंगे, पूरी दुनिया को इसका फायदा मिलेगा.

कई लोगों ने मार्क से फेसबुक पर डिसलाइक बटन के बारे में भी पूछा है, हालांकि मार्क ने इस संबंध में कोई खुलासा नहीं किया है. कई लोगों ने मार्क से यह पूछा है कि फेसबुक का भविष्य कैसा होगा, तो किसी ने यह भी पूछा है कि क्या आपने अपनी पत्नी के फेसबुक एकाउंट पर जासूस लगा रखा है. किसी ने मार्क से यह पूछा है कि वे अक्सर ग्रे कलर की शर्ट पहनते हैं, क्या दूसरे रंग उन्हें नहीं भाते? तो किसी ने उनसे यह पूछा है कि आपको बिना किसी यूनिवर्सिडी डिग्री के सफलता मिली है, तो आखिर क्यों वे दूसरों को यूनिवर्सिटी डिग्री के लिए प्रोत्साहित करते हैं? वहीं कइयों ने उनसे उनके कुत्ते की जानकारी मांगी है.

हालांकि अभी तक मार्क ने इन सवालों के जवाब नहीं दिये हैं. लेकिन मार्क ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि आपके साथ सवालों का जवाब देने में बहुत मजा आ रहा है. यह विचार मुझे कुछ महीने पहले आया था, जब हमने टाउनहॉल में सवाल-जवाब किया था, फिर उसे फेसबुक पर आजमाया. अगर आप भी मार्क जुकरबर्ग से सवाल पूछना चाहते हैं, तो मार्क के फेसबुक एकाउंट पर जाकर कमेंट बॉक्स में सवाल छोड़ें, शायद आपके सवालों का जवाब मार्क दे दें.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

0 comments

Add your comment

Nickname:
E-mail:
Website:
Comment:

Other articlesgo to homepage

सवालों से किसे नफ़रत हो सकती है.?

सवालों से किसे नफ़रत हो सकती है.?(1)

Share this on WhatsApp-रवीश कुमार॥ सवाल करने की संस्कृति से किसे नफरत हो सकती है? क्या जवाब देने वालों के पास कोई जवाब नहीं है ? जिसके पास जवाब नहीं होता, वही सवाल से चिढ़ता है। वहीं हिंसा और मारपीट पर उतर आता है। अब तो यह भी कहा जाने लगा है कि अथारिटी से

क्या अघोषित इमरजेंसी की पदचाप और मुखर नहीं हो रही.?

क्या अघोषित इमरजेंसी की पदचाप और मुखर नहीं हो रही.?(3)

Share this on WhatsApp-ओम थानवी॥ एक रोज़ पहले ही रामनाथ गोयनका एवार्ड देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हम इमरजेंसी की मीमांसा करते रहें, ताकि देश में कोई ऐसा नेता सामने न आए जो इमरजेंसी जैसा पाप करने की इच्छा भी मन में ला सके। और भोपाल की संदिग्ध मुठभेड़, दिल्ली में मुख्यमंत्री-

तकदीर के तिराहे पर नवजोत सिंह सिद्धू …क्योंकि राजनीति कोई चुटकला नहीं..

तकदीर के तिराहे पर नवजोत सिंह सिद्धू …क्योंकि राजनीति कोई चुटकला नहीं..(0)

Share this on WhatsAppआप जब ये पंक्तियां पढ़ रहे होंगे, तब तक संभव है नवजोत सिंह सिद्धू को नया राजनीतिक ठिकाना मिल गया होगा। लेकिन सियासत के चक्रव्यूह में सिद्धू की सांसे फूली हुई दिख रही हैं। पहली बार वे बहुत परेशान हैं। जिस पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया, और जिसे वे मां कहते

मजीठिया: हिंदुस्‍तान, अमर उजाला, पंजाब केसरी के साथियों इतिहास आपको कभी माफ नहीं करेगा..

मजीठिया: हिंदुस्‍तान, अमर उजाला, पंजाब केसरी के साथियों इतिहास आपको कभी माफ नहीं करेगा..(0)

Share this on WhatsAppहक के लिए आवाज न उठाने के लिए पत्रकारिता के इतिहास में हिंदुस्‍तान, अमर उजाला, पंजाब केसरी जैसे अखबारों में कार्यरत साथियों का नाम काले अक्षरों में लिखा जाएगा। यह बहुत ही शर्म की बात है कि अंदर कार्यरत साथियों को तो छोड़ों, जो रिटायर या नौकरी बदल चुके हैं उन्‍होंने भी

क्या बिना लाइसेंस चल रहा न्यूज़ चैनल ??

क्या बिना लाइसेंस चल रहा न्यूज़ चैनल ??(0)

Share this on WhatsAppराजस्थान में धूमधाम से खड़ा हुआ एक न्यूज़ चैनल इन दिनों फ़र्ज़ी तरीके से चल रहा है. खबर है कि इस चैनल को सुचना व प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से जारी हुए लाइसेंस की अवधि काफी समय पहले खत्म हो चुकी है और चैनल अब तक इसको रिन्यू नहीं करवा पाया है

read more

मीडिया दरबार एंड्राइड एप्प

मीडिया दरबार की एंड्राइड एप्प अपने एंड्राइड फ़ोन पर इंस्टाल करें.. Click Here To Install On Your Phone

Contacts and information

मीडिया दरबार - जहाँ लगता है दरबार. आप ही राजा हैं इस दरबार के और कटघरे में है मीडिया. हम तो मात्र एक मंच हैं और मीडिया पर अपनी निगाह जमायें हैं, जहाँ भी मीडिया में कुछ गलत होता दिखाई देता है उसे हम आपके सामने रख देते हैं और चलाते हैं मुकद्दमा. जिसपर सुनवाई करते हैं आप, जहाँ न्याय करते हैं आप. जी हाँ, यह एक अलग किस्म का दरबार है. मीडिया दरबार...

Social networks

Most popular categories

© 2014 All rights reserved.
%d bloggers like this: