Share this on WhatsApp
Subscribe to RSS
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

भारतीय खातों पर से रोक हटाई जाय, ग्रीनपीस ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखा..

ग्रीनपीस इंडिया ने गृह मंत्रालय से तत्काल भारतीय दान के लिये खोले गए घरेलू खातों पर से रोक हटाने के संबंध में पत्र लिखा है, क्योंकि ये खाते एफसीआरए के प्रावधानों के तहत नहीं आते हैं। ग्रीनपीस इंडिया को मिलने वाली राशि में से 70 प्रतिशत राशि 70 हजार भारतीय दानदाताओं के द्वारा प्राप्त होती है। 9 अप्रैल को एक आदेश में गृह मंत्रालय ने इन घरेलू चंदे के लिये खोले गए खातों को भी विदेशी चंदे वाले खाते के साथ बंद कर दिया है।

16 अप्रैल 2015 को गृह मंत्रालय को लि

फोटो: मार्कोस

फोटो: मार्कोस

खी चिट्ठी में ग्रीनपीस के कार्यकारी निदेशक समित आईच ने कहा, “ग्रीनपीस इंडिया सोसाइटी के सभी बैंक खातों को बंद करने से ग्रीनपीस के समर्पित कर्मचारियों को अनावश्यक पीड़ा की सामना करनी पड़ रही है और उन भारतीय समर्थकों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है जो ग्रीनपीस के काम का समर्थन करते हैं, जिनका उद्देश्य जनहित की रक्षा करना है और जो आने वाली पीढ़ियों के लिये स्वच्छ हवा, पानी, जंगल और साफ व टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहते हैं”।

20 जनवरी को, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को ग्रीनपीस इंडिया को ग्रीनपीस इंटरनेशनल से पैसे लेने देने का आदेश दिया था क्योंकि सरकार कोर्ट में यह साबित करने में असफल रही थी कि इस तरह के फंड को अवरुद्ध किया जाना क्यों न्यायोचित है। इस आदेश के बावजूद 23 मार्च को गृह मंत्रालय ने एक बार फिर ग्रीनपीस इंटरेनशल से आये पैसे को अवरुद्ध कर दिया था, जबकि इस कार्रवायी के  दो हफ्ते बाद ग्रीनपीस को एफसीआरए के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। अपने पत्र में ग्रीनपीस ने गृह मंत्रालय से स्पष्ट करने को कहा है कि किस कानून के आधार पर 23 मार्च को भेजे फंड पर रोक लगायी गयी है।

समित ने आगे कहा, “हमने गृह मंत्रालय से स्पष्ट करने को कहा है कि हमें 8 अप्रैल से पहले क्यों नहीं कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जब हमने 23 मार्च को ग्रीनपीस इंटरनेशनल से आये फंड को रोके जाने पर गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर कारण बताने का आग्रह किया था”।

इस पत्र में ग्रीनपीस इंडिया ने गृह मंत्रालय को सुनिश्चित किया है कि कि वो निश्चित समय अवधि में कराण बताओ नोटिस का विस्तार से उत्तर देगी।

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

0 comments

Add your comment

Nickname:
E-mail:
Website:
Comment:

Other articlesgo to homepage

राजस्थान हाईकोर्ट में लगी मनु की मूर्ति के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आन्दोलन का ऐलान..

राजस्थान हाईकोर्ट में लगी मनु की मूर्ति के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आन्दोलन का ऐलान..(1)

Share this on WhatsApp25 दिसम्बर 2016 को गांव गांव जलाई जायेगी मनुस्मृति और 3 जनवरी 2017 को जयपुर में होगा मनु मूर्ति हटाने का आन्दोलन.. -भँवर मेघवंशी|| जिसने असमानता की क्रूर व्यवस्था को संहिताबद्ध किया. जिसने शूद्रों और महिलाओं को सारे मानवीय अधिकारों से वंचित करने का दुष्कर्म करते हुये एक स्मृति रची,जिसके प्रभाव से

दो लाख करोड़ के घोटाले पर चुप्पी का कोई तो कारण होगा ही..

दो लाख करोड़ के घोटाले पर चुप्पी का कोई तो कारण होगा ही..(0)

Share this on WhatsApp-तमन्ना पंकज|| कुछ साल पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने कहा था कि ‘‘भ्रष्टाचार इस कदर फ़ैल चुका है कि इससे देश की एकता पर खतरा पैदा हो गया है। क्या न्यायपालिका को चुप रहना चाहिए ? हे भगवान, सहायता करो और शक्ति दो। यदि न्यायपालिका चुप रही या असहाय

अब रतन टाटा भी बोले कि असहिष्णुता एक अभिशाप है..

अब रतन टाटा भी बोले कि असहिष्णुता एक अभिशाप है..(0)

Share this on WhatsAppग्वालियर: प्रख्यात उद्योगपति रतन टाटा ने देश में कथित रूप से बढ़ रही असहिष्णुता पर चिंता व्यक्त की और कहा, , जिसे हम पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं.’ शुक्रवार देर रात ग्वालियर में टाटा ने कहा, ‘मैं सोचता हूं कि हर व्यक्ति जानता है कि असहिष्णुता कहां से आ रही

सभी धर्म पितृसत्ता का नियमन करते हैं..

सभी धर्म पितृसत्ता का नियमन करते हैं..(0)

Share this on WhatsApp-आफताब आलम|| स्त्री की ग़ुलामी का सबसे बड़ा कारक है धर्म, सभी धर्म पितृसत्ता का नियमन करते हैं, चाहे वह ट्रिपल तलाक़ का मामला हो या फिर महिला आरक्षण का या खाप पंचायती हत्याओं का, धर्म हमेशा औरतों के ख़िलाफ़ नज़र आता है. यह विचार आग़ाज़ सांस्कृतिक मंच द्वारा “बेहतर समाज का

नास्तकिता का अर्थात..

नास्तकिता का अर्थात..(0)

Share this on WhatsAppयुवा समाज वैज्ञानिक संजय जोठे ने भारत में नास्तिकता के अर्थ, उसकी परम्परा और वर्तमान में उस पर हो रहे हिंसक हमलों पर यह सारगर्भित लेख लिखा है. यह लेख यह भी दिखाता है कि वर्तमान में धर्मों की यह जो भयानक असुरक्षा है उसके मूल में क्या है. उनसे सहमत हुआ

read more

मीडिया दरबार एंड्राइड एप्प

मीडिया दरबार की एंड्राइड एप्प अपने एंड्राइड फ़ोन पर इंस्टाल करें.. Click Here To Install On Your Phone

Contacts and information

मीडिया दरबार - जहाँ लगता है दरबार. आप ही राजा हैं इस दरबार के और कटघरे में है मीडिया. हम तो मात्र एक मंच हैं और मीडिया पर अपनी निगाह जमायें हैं, जहाँ भी मीडिया में कुछ गलत होता दिखाई देता है उसे हम आपके सामने रख देते हैं और चलाते हैं मुकद्दमा. जिसपर सुनवाई करते हैं आप, जहाँ न्याय करते हैं आप. जी हाँ, यह एक अलग किस्म का दरबार है. मीडिया दरबार...

Social networks

Most popular categories

© 2014 All rights reserved.
%d bloggers like this: