/पूर्व विधायक घूरा राम को कल बलिया की जनता ने जमकर लतियाया..

पूर्व विधायक घूरा राम को कल बलिया की जनता ने जमकर लतियाया..

 

 

 

-कुमार सौवीर।।

बसपा के पूर्व मंत्री और रसड़ा-बलिया से पूर्व विधायक घूरा राम को कल बलिया की जनता ने जमकर हूर दिया। जनता ने घूरा राम को पचासों चपत-झांपड़ और सैकड़ों लात-घूसे रसीद किये। गुण्‍डई पर आमादा घूरा राम और उनके गुण्‍डों ने इसके पहले ट्रक चालकों को बेवजह पीटा थ्‍ाा, नतीजा घूरा की इस हरकत पर नाराज ट्रक चालकों को भी गुस्‍सा आ गया और उन लोगों ने घूरा और उनके गुण्‍डे-साथियों को दबोचा और सरेआम उन्‍हे जमकर हूर दिया। बताते हैं कि घूरा की तेज रफ्तार स्‍कार्पियों गाड़ी किसी ट्रक से भिड गयी थी, जिसके चलते उनकी गाड़ी पर कुछ डेंट आ गया था। इस पर घूरा राम और उनके साथियों ने ट्रक चालक और उसके साथियों को दौड़ा-दौड़ा कर सडक पर पीटा था। लेकिन इसी बीच ट्रक चालक के कुछ साथी और आसपास के नागरिक भी ट्रक चालक के समर्थन में आ गये और उन्‍होंने घूरा राम व उनके साथियों को जमकर हूर दिया।

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काफी देर तक आक्रोशित चालकों और नागरिकों की भीड़ को बाद में पुलिस ने बल प्रयोग कर तितर-बितर किया। बाद में कुछ चालकों को पुलिस ने हंगामा करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
जन-चर्चाओं के अनुसार घूरा राम जब भी सत्‍ता में आते हैं तो इसी नशे में हमेशा सरेआम लोगों को पीटते-पिटवाते रहते हैं। इतना ही नहीं, उनका परिवार भी इसी नशे में रहता है। और उनके पट्टीदार भी कटहे कुत्‍ते की तरह जनता को काटते-पीटते रहते हैं। पिछली सरकार में उन्‍होंने एक सरकारी चिकित्‍सक को भी बुरी तरह धुन दिया था, जिसको लेकर पूरे जनपद में आक्रोश था, लेकिन चूंकि तब बसपा की सरकार थी, इसलिए कोई चूं तक नहीं कर पाया था। सूत्र बताते हैं कि घूरा राम हमेशा जातिवादी आधार पर बाकी जातियों के प्रति हिंसा के प्रति आमादा रहते हैं। लेकिन इसके बावजूद इस बार घूरा राम को पहले जनता ने हूर कर विधायकी से हटाया, फिर कल भरे सड़क जनता ने हाथ-लात से हूर दिया।
अब आखिरी बात। नेता जी, अब होशियार। आपकी गुण्‍डई का जवाब देने के लिए अब जनता ने भी कमर कस ली है। सम्‍भल जाइये। कहीं ऐसा न हो कि अगला खाता आपका ही खुल जाए
( चित्र परिचय:- तीन फोटो में जनता घूरा राम को सम्‍मानित कर रही है और बाकी फोटो में ट्रक चालक और उनके समर्थन में जुटी जनता घूरा राम को हूर रही है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.