Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

क्या ड्रैगन देगा हाथी का साथ..

By   /  May 14, 2015  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-प्रवीण दत्ता।।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा ने हमारे इस विशालकाय पडोसी से हमारे द्विपक्षीय संबंधों को सुर्ख़ियों में ला दिया है, खासकर तब जबकि चीनी राष्ट्रपति की भारत यात्रा को अभी एक वर्ष भी नहीं हुआ है। यूँ तो भारत -चीन के सम्बन्ध 2000 साल पुराने हैं लेकिन इनकी औपचारिक शुरुआत 1950 में तब से मानी जाती है जबकि भारत ने चीनी गणराज्य से अपने सम्बन्ध ख़त्म कर पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की सरकार को चीन की वैधानिक सरकार मान लिया था।Indo-Sino

आधुनिक काल में दोनों देशों के संबधों की बात होते ही दोनों के बीच चल रहे सीमा विवाद और पूर्व में हुए तीन सामरिक मुकाबलों का जिक्र आता है। 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध के बारे में तो ज्यादातर लोग जानते हैं पर कूटनीति विशेषज्ञ 1967 में हुए चोल प्रकरण और 1987 की भारत-चीन मुठभेड़ को भी महत्व देतें हैं। गौरतलब ये है कि 80 के दशक के उत्तरार्ध से दोनों ही देशों ने राजनयिक और व्यापारिक सम्बन्धो को इतना महत्व दिया की आज चीन, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और यही बात प्रधानमंत्री मोदी के चीनी दौरे को विशेष बनाती है। इसमें कोई दो राय नहीं है की भारत-चीन संबंधों में मोदी को बहुत सावधानी बरतनी पड़ेगी।

अगर दोनों के व्यापारिक सम्बन्धों पर नज़र डालें तो भले ही दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार नई ऊचाँइयाँ छू रहा हो पर आंकड़े बताते हैं कि ये व्यापारिक साझेदारी भारत के हितों को नहीं साध पा रही है। साल 2014 -15 में भारत को चीन के साथ व्यापार में 2,74,218 करोड़ रुपये से पिछड़ गया। इसी काल में भारत ने चीन से 340.7 करोड़ रुपये का आयात भी किया। आयातित सामान में प्रमुख रूप से टेलीकॉम उपकरण,कम्प्यूटर व उसके उपकरण,दवाईयां,इलेक्ट्रॉनिक सामान,आर्गेनिक रसायन और बिजली की मशीने और उपकरण रहे। जबकि भारत केवल 66.48 हज़ार करोड़ रुपये का ही निर्यात कर पाया। असल समस्या ये है चीन भारत को तैयार सामान निर्यात करता है जबकि भारत उसे न केवल ज्यादातर कच्चा माल निर्यात करता है बल्कि उसी कच्चे माल से बने तैयार उत्पात भी आयात करता है। भारत चीन को अवयस्क लौह,प्लास्टिक के दाने,कपास और धागों जैसा कच्चा माल सस्ते में निर्यात करता है और फिर इन्ही से बने मोबाइल,कम्प्यूटर,कपडे,खिलौने,सीडी आदि तुलनात्मक रूप से ज्यादा रकम देकर आयात करता है। और यही है मोदी के “मेक इन इंडिया” को सबसे बड़ी चुनौती। क्या सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार को भारत में बना सामान निर्यात (जिससे चिंता का विषय बना द्विपक्षीय व्यापारिक घाटा भी काम होगा ) किये बगैर मोदी का “मेक इन इंडिया” सफल हो पायेगा ?

ये समस्या ड्रैगन की दो धारी तलवार नीति से और बढ़ जाती है। एक तरफ चीन द्विपक्षीय व्यापार का संतुलन अपने पक्ष में रखता है और दूसरी ओर किसी न किसी बहाने से भारतीय उत्पादों पर रोक भी लगाता रहता है। 2012 में चीन ने भारत की सरसों पर मिलावट का आरोप लगाते हुए सरसों का आयात बैन कर दिया था। भारतीय मांस आयात पर भी बहुप्रचारित ‘फुट एंड माउथ’ बीमारी के कारण प्रतिबन्ध लगा दिया था।
भारतीय उद्योग जगत भी इस स्थिति से बहुत चिंतित है और इसीलिये कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (CII ) के महानिदेशल चंद्रजीत बैनर्जी ने भारत सरकार को दिए अपने ज्ञापन में IT,फार्मा,मीडिया और मनोरंजन जैसे उद्योगों के सामने चुनौतियों का उल्लेख किया है। CII ने सुझाव दिया है कि इन उद्योगों को चीनी चुनौती का सामना करने के लिए तत्काल नॉन टैरिफ बैरियर सम्बन्धी कदम उठाने होंगें।india-china-bi-lat volume 2015
विदेश व्यापार नीति 2015-2020 में भी भारत-चीन व्यापार असंतुलन पर चेताते हुए कहा गया है कि यदि वर्तमान स्थिति कायम रही तो 2016-17 में ही चीन भारत को लगभग 80 मिलीयन डॉलर का निर्यात कर रहा होगा वहीँ भारत 60 मिलीयन डॉलर से पिछड़ते हुए सिर्फ 20 मिलियन डॉलर के निर्यात तक पहुँच पायेगा। CII ने ड्रैगन से पिटने से बचने के लिए 4 सूत्रीय फार्मूला भी सुझाया है।
1. चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए महत्त्वपूर्ण स्थान बनाया जाये।
2. खास चिन्हित चीनी बाज़ारों में पहुँच बनाई जाये और भारत में चीनी निवेश खास चिन्हित 18 क्षेत्रों में हो।
3. चीन के साथ एक सम्प्रभुता की रक्षा करती डील के बाद ही आधारभूत सरंचना में चीनी निवेश हो।
4. एक सांस्थानिक कमेटी का गठन जो उपरोक्त सभी में लक्ष्य हासिल करने की मॉनिटरिंग करे।

CII द्वारा सरकार को दिए प्रतिवेदन में भारतीय उद्योगपतियों को चीन में आ रही दिक्कतों का भी जिक्र है और इस मुद्दे पर सरकार से मदद की गुहार की गई है। CII के अनुसार चीन ने अपने यहां ऐसे नियन बना रखे हैं कि भारतीय कम्पनियाँ या तो वहां मिलने वाले ठेकों के लिए योग्य ही नहीं मानी जाती या फिर मांगे गए सर्टिफिकेट नहीं दे पाती। चीन के कुछ राज्यों में स्थानीय कंपनियों को सब्सिडी दी जाती है जिससे भारतीय कम्पनियां लागत ज्यादा होने से प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाती हैं।

यानि अब ये साफ है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी चीन यात्रा के दौरान हाथ मिलाते फोटो खिचाने और टीवी कैमरों के सामने बौद्ध मंदिरों में जाने से कहीं ज्यादा करना होगा। असल परीक्षा ड्रैगन के जबड़ों से भारतीय उद्योगपतियों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक और टिक पाने लायक डील रुपी मांस लाने की होगी। जैसे ड्रैगन भारतीय बाज़ारों में छुट्टा घूम रहा है वैसे ही भारतीय हाथी भी चीन में खुला भ्रमण कर पाये वरना “मेक इन इंडिया’ भी ‘जुमला’ बन के रह जायेगा।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 3 years ago on May 14, 2015
  • By:
  • Last Modified: May 14, 2015 @ 8:13 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

न्याय सिर्फ होना नहीं चाहिए बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए, भूल गई न्यायपालिका.?

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: