/उपराज्यपाल के अधिकारों पर केंद्र सरकार की अधिसूचना असंवैधानिक..

उपराज्यपाल के अधिकारों पर केंद्र सरकार की अधिसूचना असंवैधानिक..

नई दिल्ली: दिल्ली में उप राज्यपाल को सर्वेसर्वा बताने वाली केंद्र की अधिसूचना से नाराज़ दिल्ली सरकार क़ानून के जानकारों की सलाह ले रही है. इसी क्रम में पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम की भी सलाह मांगी गई थी. सुब्रमण्यम ने गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन को असंवैधानिक और गैरकानूनी बताया है. उन्होंने सरकार को भेजी चिट्ठी में लिखा है, मुझे उम्मीद है कि ये नोटिफिकेशन राष्ट्रपति की अनुमति के बिना ही जारी हुआ है. ऐसे में ये असंवैधानिक है.Gopal-Subramanium-360

इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली के उप राज्यपाल की भूमिका और शक्तियों को स्पष्ट करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के कुछ ही घंटे के बाद मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि यह उनकी सरकार के भ्रष्टाचार रोधी प्रयासों को लेकर बीजेपी और केन्द्र सरकार की घबराहट को जाहिर करता है.

गौरतलब है कि अधिसूचना में कहा गया है कि नौकरशाहों की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर उप राज्यपाल मुख्यमंत्री से सलाह मशविरा कर सकते हैं, लेकिन वे इसके लिए बाध्य नहीं हैं.

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जंग तो महज एक चेहरा हैं और उन्हें आदेश पीएमओ से मिल रहे हैं. ‘आजादी के पहले इंग्‍लैंड की महारानी यहां वायसराय को अधिसूचना भेजा करती थीं. अब जंग साहब वायसराय हैं और पीएमओ लंदन है.’ उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार अधिसूचना पर संविधान विशेषज्ञों से राय ले रही है और उसी के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा.

gopal-subramanium_650x876_71432351729दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम जाहिर करता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह भ्रष्टाचार और फलते-फूलते ट्रांसफर-पोस्टिंग उद्योग के समक्ष ‘घुटने टेक रहे’ हैं, जिसे आप सरकार ने पिछले तीन महीने में बंद कर दिया था.

सिसोदिया ने कहा, पहले तबादलों के लिए भारी लेनदेन होता था, लेकिन अब आप सरकार के तीन महीने के कार्यकाल में यह समाप्त हो गया है. जब हमने यह कर दिया तो कांग्रेस और बीजेपी के लोग दिल्ली में ठेका पाने में विफल हो गए. तब वे पीएमओ गए.

मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘अब वे यह अधिसूचना लाए हैं, क्योंकि कांग्रेस और बीजेपी दिल्ली में अपने अधिकारियों को चाहती हैं और अपने लोगों के लिए सरकारी ठेके चाहती है और यही कारण है कि वह उपराज्यपाल के जरिए तबादला-पोस्टिंग उद्योग पर नियंत्रण चाहती है. यह अधिसूचना लाकर केन्द्र ने दिल्ली की जनता के पीठ में छुरा भोंका है.

शुक्रवार को जारी गजट अधिसूचना में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि उप राज्यपाल के पास सेवा, लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि से जुड़ा अधिकार क्षेत्र होगा और जब उन्हें जरूरी लगेगा तो वह अपने ‘विवेकानुसार’ सेवा से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री से मशविरा कर सकते हैं.

केजरीवाल ने इस बात का भी उल्लेख किया कि इस अधिसूचना के अनुसार भ्रष्टाचार निरोधक शाखा पुलिस स्टेशन अधिकारियों, कर्मचारियों और केन्द्र सरकार सेवाओं के पदाधिकारियों के खिलाफ अपराध का संज्ञान नहीं लेगी. उन्होंने हैरानी जताई कि वे कौन लोग हैं जिन्हें मोदी सरकार बचाने की कोशिश कर रही है.

गृह मंत्रालय की विवादास्पद अधिसूचना
गृह मंत्रालय की विवादास्पद अधिसूचना

उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा है. केजरीवाल ने दावा किया कि उनकी सरकार दिल्ली के इतिहास की सबसे ईमानदार सरकार है. उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल ने कभी भी दिल्ली की जनता के लिए बिजली पानी की आपूर्ति के बारे में नहीं पूछा. उनकी सिर्फ ट्रांसफर पोस्टिंग में रुचि है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मोदी सरकार तीन बीजेपी विधायकों के साथ पिछले दरवाजे से दिल्ली को चलाने का प्रयास कर रही है.’ केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि अधिसूचना का मूल बिन्दू इसके सबसे अंतिम पैराग्राफ में निहित है, जो कहता है कि दिल्ली सरकार की अपराध निरोधक शाखा केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकती.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमारी सरकार ने पिछले तीन महीने में भ्रष्टाचार को कम किया है. 36 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है और 52 अधिकरियों को निलंबित किया गया है. भ्रष्ट अधिकारियों के बीच आतंक है और हमारी सरकार दिल्ली के इतिहास में सबसे ईमानदार सरकार है.’

उन्होंने कहा, ‘अब, केन्द्र सरकार चाहती है कि अगर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) केन्द्र सरकार के कर्मचारियों में किसी तरह का भ्रष्टाचार देखती है तो इसे नजरअंदाज कर देना चाहिए.’ इससे पहले केजरीवाल ने अपने ट्वीट में कहा, ‘बीजेपी पहले दिल्ली चुनाव हार गई. आज की अधिसूचना हमारे भ्रष्टाचार रोधी प्रयासों के बारे में बीजेपी की घबराहट को दिखाती है. बीजेपी आज फिर हार गई.’

गृह मंत्रालय की अधिसूचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस अधिसूचना से यह स्पष्ट हो चुका है कि ‘दिल्ली का तबादला-पोस्टिंग उद्योग’ आप सरकार से भयभीत है.

सिसोदिया ने अपने ट्वीटों में कहा, ‘इस अधिसूचना से, यह स्पष्ट है कि दिल्ली का तबादला उद्योग हमसे कितना भयभीत है.’ उन्होंने कहा कि इस अधिसूचना के जरिए ‘तबादला-पोस्टिंग उद्योग को बचाने का प्रयास किया जा रहा है.’

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.