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भिंडरावाला के पोस्टर हटाने पर पुलिस से भिड़ गए लोग..

By   /  June 4, 2015  /  No Comments

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जम्मू में पुलिस के लिए भिंडरावाले का पोस्टर हटाना भारी पड़ गया । खालिस्तान के समर्थक भिंडरावाले का पोस्टर हटाने में पुलिस को बहुत मशक्कत करनी पड़ी। जम्मू में हुए इस विरोध प्रदर्शन को रोकने गई पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर मारपीट और पथराव हुआ।IMG-20150604-WA0061

जम्मू में हिंसक हुए हालात

प्रदर्शन के समय पुलिस की मौजूदगी से नाराज सिख युवकों ने पुलिस वालों पर खूब पत्थर फेंके, जिससे कई पुलिस वाले घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया। यह झड़प इतनी हिंसक हो गई कि इसमें एक युवक की मौत भी हो गई। भिंडरावाल का पोस्टर हटाने को लेकर यह प्रदर्शन पिछले दो दिनों से जारी था। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि पुलिस को कर्फ्यू लगाना पड़ा।

जम्मू में विरोध प्रदर्शन कर रहे सिख युवकों ने खालिस्तान के समर्थन में जनरैल सिंह भिंडरावाला के पोस्टर्स भी लगाए थे। धीरे-धीरे जब सिख युवकों का प्रदर्शन उग्र होने लगा तो पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष शुरू हो गया।

सिख युवकों द्वारा पुलिस पर पथराव शुरू करने के बाद पुलिस ने भी प्रदर्शन कर रहे युवकों पर आंसू गैस के गोले छोड़े। इस मारपीट और प्रदर्शन के बीच कई पुलिस वाले घायल हो गए। पथराव से आसपास के घरों और कारों के शीशे भी टूट गए। प्रदर्शन के दौरान भारी तादाद में सिख मौजूद थे, इसलिए पुलिस को हालात काबू में करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

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  • Published: 2 years ago on June 4, 2015
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  • Last Modified: June 4, 2015 @ 7:13 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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