/हमें क्यों चाहिए मजीठिया भाग-3A: इकरारनामा वर्किंग जर्नलिस्ट (फिक्शेशन आफ रेट्स आफ वेजेज) एक्ट 1958 का उल्लंघन..

हमें क्यों चाहिए मजीठिया भाग-3A: इकरारनामा वर्किंग जर्नलिस्ट (फिक्शेशन आफ रेट्स आफ वेजेज) एक्ट 1958 का उल्लंघन..

मजीठिया वेज बोर्ड देने में आनकानी करने वाले जो अखबार अपने कर्मचारियों से जबरन इकरारनामा लिखवा रहे हैं कि उन्हें वेज बोर्ड नहीं चाहिए, वे वर्किंग जर्नलिस्ट (फिक्शेशन आफ रेट्स आफ वेजेज) एक्ट 1958 की धारा 7 का उल्लंधन कर रहे हैं।justice-majithia-left-chairman-of-the-wage-boards-for-working-journalists-and-non-journalists-and-other-newspaper-employees-submitting-the-recommendations-to-labour-secretary-p-k-ch1

मजीठिया वेज बोर्ड की नोटिफिकेशन में सेक्शन 20जे के तहत कर्मचारियों द्वारा नया वेतनमान देने से इनकार करने की जो आप्शन मौजूद है, वह मौजूदा वेज बोर्ड के तहत बनने वाले वेतन से अधिक वेतन व भत्तों के संबंध में हो सकती है, न कि कम वेतन को लेकर। लिहाजा अगर जो भी कोई कर्मचारी आपने अखबार प्रबंधन के दबाव के चलते ऐसा इकरारनामा लिखने को मजबूर हुए हैं, उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस प्रावधान की कानूनी वैधता ही नहीं है। कोई भी वेज बोर्ड वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट,1955 के प्रावधानों के खिलाफ अनुशंसा नहीं कर सकता है। अगर ऐसा हुआ भी है, तो इसकी वैधता को चैलेंज किया जा सकता है और यह वर्किंग जर्नलिस्ट (फिक्शेशन आफ रेट आफ वेजेज) एक्ट 1958 की धारा सात का उल्लंघन है।

वर्किंग जर्नलिस्ट (फिक्शेशन आफ रेट आफ वेजेज) एक्ट की धारा सात में स्पष्ट लिखा गया है कि कोई भी अखबार प्रबंधन वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा 9 व 13सी के तहत गठित वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लागू किए गए वेतनमान से कम वेतन नहीं दे सकता। ऐसे में धारा सात के खिलाफ किया गया किसी भी पत्रकार या गैर-पत्रकार कर्मचारी का इकरारनामा या हलफनामा स्वत: ही वैधता खो देता है।

इस एक्ट की धारा 11 में भी स्पष्ट किया गया है कि श्रमजीवी पत्रकार व गैर पत्रकार कर्मचारी अपने न्यौक्ता के साथ वहीं समझौता करने को स्वतंत्र होगा, जो उसे वेज बोर्ड के प्रावधानों से ज्यादा लाभ देता हो।

Kindly See these Sections of the Original Act.

Section 7. Working journalists entitled to wages at rates not less than
those specified in the order.- Subject to the provisions contained in
section 11, on the coming into operation of an order of the Central
Government, every working journalist shall be entitled to be paid by
his employer wages at a rate which shall in no case be less than the
rate of wages specified in the order.

Section 11. Effect of Act on Working Journalists Act, etc.- (1) Sections
8, 10, 11, 12 and 13 of the Working Journalists Act shall have no
effect in relation to the Committee.

(2) The provisions of this Act shall have effect notwithstanding
anything inconsistent therewith in the terms of any award, agreement
or contract of service, whether made before or after the commencement
of this Act:

Provided that where under any such award, agreement, contract of
service or otherwise, a working journalist is entitled to benefits in
respect of any matter which are more favorable to him than those to
which he would be entitled under this Act, the working journalist
shall continue to be entitled to the more favorable benefits in
respect of that matter, notwithstanding that he receives benefits in
respect of other matters under this Act.

(3) Nothing contained in this Act shall be construed to
preclude any working journalist from entering into any agreement with
an employer for granting him rights or privileges in respect of any
matter which are more favorable to him than those to which he would
be entitled under this Act.
वर्किंग जर्नलिस्ट (फिक्शेशन आफ रेट्स आफ वेजेज) एक्ट 1958 को अपलोड करने के लिए यहां क्लिक करें या Path का प्रयोग करें

http://india.gov.in/working-journalist-fixation-rates-wages-act-1958
or
http://indiacode.nic.in/rsPaging.asp?tfnm=195829&Page=1

(यह जानकारी हमें उपलब्‍ध करवाई है श्री रविंद्र अग्रवाल जी ने आप इनसे इस मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सकते हैं 9816103265, इनका मेल आईडी है [email protected])

यदि हमसे कहीं तथ्यों में गलती रह गई हो तो सूचित अवश्य करें।([email protected])

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