Share this on WhatsApp
Subscribe to RSS
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

जब चाटुकारिता और प्रशासनिक आरोपी हों सिरमौर तो ऐसे में कैसे भला होगा हिन्दी का..

पं.एस.के.भारद्वाज॥

भोपाल। मध्य प्रदेश  की राजधानी भोपाल में विश्व हिन्दी सम्मेलन का शुभारंभ देश विदेश के हजारों हिन्दी प्रेमी शिरकत कर रहे हैं। हिन्दी भाषी देश के लिये विश्व हिन्दी सम्मेलन की मेजबानी और उसके प्रचारू आभामण्डल से मध्यप्रदेश का गौरव बढऩा स्वाभाविक है। इस कार्यक्रम की सफलता के लिये प्रदेश सरकार तथा इसके अधीनस्थ कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों ने रात-दिन जी तोड़ मेहनत कर कार्यक्रम की सफलता को सुनिश्चित किया। इस आयोजन को भव्यता प्रदान करने के लिये भारी मात्रा में धन राशि व्यय की गई। स्वाभाविक है कि आपाधापी में व्यय की जाने वाली राशियों में गड़बड़ी भी होती है। ऐसा एक नहीं कई आयोजनों में हो चुका है और सीएजी की रिपोर्ट में भी इसका खुलासा किया है।

aamir

मातृभाषा हिन्दी के लिये तो देश की जनता इतनी कुर्बानी तो दे ही सकती है, हाँ सफेद पोश आयोजकों, ओहदेदार अधिकारियों एवं भ्रष्ट ठेकेदारों की अवश्य ऐसे सुअवसरों पर चांदी हो जाती है, तीन दिन तक चलने वाले विश्व हिन्दी सम्मेलन का ढोल भी जमकर पीटा जायेगा। प्रदेश में इस कार्यक्रम के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी मप्र.संस्कृति विभाग ने संभाल रखी है। यह विभाग भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास है इसके प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव है। अजात् शत्रु श्रीवास्तव आयुक्त की कुर्सी पर विराजमान है। प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव स्वयं को महान साहित्यकार की श्रेणी में मानते है, गाहे बगाहे स्थानीय छुट-पुट कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराते रहते हैं। कुछ वरिष्ठ पत्रकारों से उनकी काफी निकटता है इसी निकटता का लाभ उठाते हुए समय-समय पर पत्रकारों से अपने नाम से आलेख लिखवाते हैं तथा अपनी महानता का बखान स्वयं तथा उनके कुछ चाटुकार करते फिरते हैं।

हिन्दी के इतने बड़े ज्ञाता है कि इनके विभाग को यह भी पता नहीं है कि अमीर खुसरो सही नाम है या आमिर खुसरो! मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सिर्फ एक ही मकसद रहता है राष्ट्रीय नेताओं को साधों और अपनी कुर्सी सलामत रखो। एक तरह से उन्होंने विश्व हिन्दी सम्मेलन के बहाने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विश्वास हासिल करने का हर संभव प्रयास किया है, बहरहाल वे अपने मकसद में कितने सफल या असफल हुये यह तो वे या श्री मोदी ही जाने।

वहीं संस्कृति संचालनालय के आयुक्त अजातशत्रु श्रीवास्तव की कार्यशैली जग जाहिर है। ये पद पर रहते हुए हिन्दी साहित्य प्रकाशन और लेखन रॉयल्टी के नाम से बड़ा खेल खेल रहे है। इनके पास संग्रहालय के अधीन प्रदेश के लेखकों द्वारा लिखित पुरातत्विक साहित्य संकलन छपवाने का जिम्मा है जिसमें इन्होंने भारी घाल-मेल कर रखा है। इसमें लेखकोंं को रायल्टी दिये जाने का भी प्रावधान है पर अजात् शत्रुजी ने ऐसा परम्परागत व्यवस्था को कायम रखते हुए कारनामा कर दिखलाया कि देखने वाले दंग रह जाये। लेखक कोई, छपे किसी के नाम से और आजीवन रॉयल्टी ले कोई। ये लेखक अधिकांशत: सरकारी अधिकारी होते है और रायल्टी भी इन्हीं के खाते में जाती रही।

छपाई का काम मध्यप्रदेश माध्यम जो कि म.प्र. जनसंपर्क विभाग के अधीन चिटफंड कंपनी तर्ज पर संचालित होने वाला रखैल रूपी संस्थान है। जिसके चेयरमेन स्वयं मुख्यमंत्री है। पूरा साहित्य अजात शत्रु श्रीवास्तव के आदेश पर छापता है। कुछ सौ किताब छपती है और हजारों पुस्तकों के प्रिटिंग बिल बनाये जाते है। इस तरह साहित्यकारों और लेखकों के नाम पर जमकर कालाधन-सफेद धन का खेल वर्षो से चल रहा है।

इनके विभाग द्वारा इस संबंध में यह जानकारी मांगने पर कि प्रकाशन छपे और कहां कितने बटे,उपलब्ध प्रकाशनों की सूची आदि आदि …यह इनके विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। इसके पुख्ता प्रमाण स्वराज्य न्यूज के पास मौजूद है। तीसरी पारी की शुरूआत में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहली कैविनेट बैठक में भष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के लिए जीरोटारलेस की घोषणा की थी और प्रदेश की जनता को उनसे कुछ ऐसी उम्मीद भी थी। समय बीतने के साथ ही मुख्यमंत्री स्वयं अपने वायदे को भूल गये है और उनके इर्द-गिर्द पूरी भ्रष्टाचारियों की जमात जुट गई है कुछ के खिलाफ तो उच्च न्यायालय तक ने भी सख्त टिप्पणियां की है और उनके खिलाफ आपराधिक कृत्य को दृष्टिगत रखते हुए प्राथमिकी दर्ज करके कार्यवाही की अनुशंसा भी की है, परन्तु ये सबके सब मुख्यमंत्री जी के नाक के बाल बने हुए है और प्रदेश की जनता की छाती पर मूंग  दलते नजर आ रहे हैं।

हर जगह मुख्यमंत्री को गुमराह कर स्वयं के स्वार्थ सिद्धि में जुटे रहते हैं। संस्कृति महकमे के मठाधीशों को यह भी याद नहीं रहा कि हिन्दी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिलाने के अहम किरदार रहे गोविंद वल्लभ पंत जो कि उत्तर प्रदेश के निवासी थे तथा आजादी प्राप्त होने के बाद उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री भी बने थे, हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित कराने के लिये लंबा संघर्ष किया था, राष्ट्रीय राजनीति में आने के बाद उन्हें पं. जवाहर लाल नेहरू के मंत्रिमंडल में गृहमंत्री बनाया गया था, उनके संघर्ष के कारण हिन्दी को राष्ट्र भाषा का दर्जा हासिल हुआ। ऐसे महान पुरूष का 10 सितम्बर जन्मदिन है, प्रदेश के सस्कृति विभाग के पुरोधाओं ने यह भी उचित नहीं समझा कि कार्यक्रम के दौरान कहीं एक जगह भी उनके नाम का उल्लेख तक कर दें। पूरे शहर में मोदी ही मोदी की तस्वीर छाई रहीं वह भी हिन्दी के नाम पर हिन्दी की सेवा में प्रण-प्राण से जुटे पुरोधा को इतने बड़े शहर में एक फोटो या बैनर तक मुहैया नहीं हो सका। दूसरी ओर म.प्र. के कई ऐसे साहित्यकार भी है जो पद्श्री अलंकरण से संम्मानित हो चुके है परन्तु उन्हें इस भव्य आयोजन से उन्हें दूर रखा गया है ।

क्या यह हिन्दी प्रेमी और साहित्यकारों का सुनियोजित अपमानित करने की चेष्टा तो नही है। इन सरकारी चाटुकारों की वजह से हिन्दी भाषा, भारतीय चिकित्सा पद्धति तथा रामराज्य की कल्पना करना बेमानी है। ये चाटुकार खाते तो हिन्दी की है पर इनकी औलादें विदेशों में अंग्रेजियत की गुलाम बनी हुई है। जितने भी आज हिन्दी के नाम पर हिन्दी-हिन्दी खेल रहे हैं इनमें से कितनों की औलादें हिन्दी माध्यम या सरकारी स्कूलों में पढ़ी है। क्या इसका जबाव है किसी के पास। ये तो येन-केन प्रकारेण से जनता के खून-पसीनों की कमाई को ठिकाने लगाने में पारंगत हैं और राजनेताओं को गुमराह करने में महारत हासिल किये हुए हैं। जिसकी वजह से ये ऊँचे ओहदों की कुर्सियों को हथियाये हुए हैं, राजनेताओं को उंगलियों पर नचा अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। ऐसा में भला ऐसे अधिकारियों के नेतृत्व में हिन्दी का कितना विकास होगा, यह सोच का विषय है।

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

0 comments

Add your comment

Nickname:
E-mail:
Website:
Comment:

Other articlesgo to homepage

राजस्थान हाईकोर्ट में लगी मनु की मूर्ति के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आन्दोलन का ऐलान..

राजस्थान हाईकोर्ट में लगी मनु की मूर्ति के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आन्दोलन का ऐलान..(1)

Share this on WhatsApp25 दिसम्बर 2016 को गांव गांव जलाई जायेगी मनुस्मृति और 3 जनवरी 2017 को जयपुर में होगा मनु मूर्ति हटाने का आन्दोलन.. -भँवर मेघवंशी|| जिसने असमानता की क्रूर व्यवस्था को संहिताबद्ध किया. जिसने शूद्रों और महिलाओं को सारे मानवीय अधिकारों से वंचित करने का दुष्कर्म करते हुये एक स्मृति रची,जिसके प्रभाव से

दो लाख करोड़ के घोटाले पर चुप्पी का कोई तो कारण होगा ही..

दो लाख करोड़ के घोटाले पर चुप्पी का कोई तो कारण होगा ही..(0)

Share this on WhatsApp-तमन्ना पंकज|| कुछ साल पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने कहा था कि ‘‘भ्रष्टाचार इस कदर फ़ैल चुका है कि इससे देश की एकता पर खतरा पैदा हो गया है। क्या न्यायपालिका को चुप रहना चाहिए ? हे भगवान, सहायता करो और शक्ति दो। यदि न्यायपालिका चुप रही या असहाय

अब रतन टाटा भी बोले कि असहिष्णुता एक अभिशाप है..

अब रतन टाटा भी बोले कि असहिष्णुता एक अभिशाप है..(0)

Share this on WhatsAppग्वालियर: प्रख्यात उद्योगपति रतन टाटा ने देश में कथित रूप से बढ़ रही असहिष्णुता पर चिंता व्यक्त की और कहा, , जिसे हम पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं.’ शुक्रवार देर रात ग्वालियर में टाटा ने कहा, ‘मैं सोचता हूं कि हर व्यक्ति जानता है कि असहिष्णुता कहां से आ रही

सभी धर्म पितृसत्ता का नियमन करते हैं..

सभी धर्म पितृसत्ता का नियमन करते हैं..(0)

Share this on WhatsApp-आफताब आलम|| स्त्री की ग़ुलामी का सबसे बड़ा कारक है धर्म, सभी धर्म पितृसत्ता का नियमन करते हैं, चाहे वह ट्रिपल तलाक़ का मामला हो या फिर महिला आरक्षण का या खाप पंचायती हत्याओं का, धर्म हमेशा औरतों के ख़िलाफ़ नज़र आता है. यह विचार आग़ाज़ सांस्कृतिक मंच द्वारा “बेहतर समाज का

नास्तकिता का अर्थात..

नास्तकिता का अर्थात..(0)

Share this on WhatsAppयुवा समाज वैज्ञानिक संजय जोठे ने भारत में नास्तिकता के अर्थ, उसकी परम्परा और वर्तमान में उस पर हो रहे हिंसक हमलों पर यह सारगर्भित लेख लिखा है. यह लेख यह भी दिखाता है कि वर्तमान में धर्मों की यह जो भयानक असुरक्षा है उसके मूल में क्या है. उनसे सहमत हुआ

read more

मीडिया दरबार एंड्राइड एप्प

मीडिया दरबार की एंड्राइड एप्प अपने एंड्राइड फ़ोन पर इंस्टाल करें.. Click Here To Install On Your Phone

Contacts and information

मीडिया दरबार - जहाँ लगता है दरबार. आप ही राजा हैं इस दरबार के और कटघरे में है मीडिया. हम तो मात्र एक मंच हैं और मीडिया पर अपनी निगाह जमायें हैं, जहाँ भी मीडिया में कुछ गलत होता दिखाई देता है उसे हम आपके सामने रख देते हैं और चलाते हैं मुकद्दमा. जिसपर सुनवाई करते हैं आप, जहाँ न्याय करते हैं आप. जी हाँ, यह एक अलग किस्म का दरबार है. मीडिया दरबार...

Social networks

Most popular categories

© 2014 All rights reserved.
%d bloggers like this: