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पाकिस्तान के अत्याचार से तंग 88 लोग नहीं जाना चाहते पाकिस्तान..

By   /  October 19, 2015  /  No Comments

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-सिकंदर शैख़॥IMG-20151018-WA0048

पाकिस्तान के अत्याचारों से तंग होकर भारत आये 88 पाक नागरिकों को वापस पाकिस्तान भेजने की खबर आने के बाद आज विधायक छोटू सिंह भाटी आज उनकी बस्ती में गए और उन लोगों को आश्वासन दिया की आप लोगों को वापस पाकिस्तान नहीं भेजेंगे , हालाँकि पाकिस्तान से आये लोग पहले ही कह चुकें हैं की ये मर जायेंगे लेकिन वापिस पाक नहीं जायेंगे.

पाकिस्तान से आये इन 88 लोगों की बस्ती देखें तो आपको खेलते बच्चे काम करती महिलाएं बच्चों को खिलाती बहने नज़र आएँगी , खेलते बच्चे हँसते हुए लगते हैं , इनके चेहरे की मुस्कराहट बता रही है की ये लोग भारत में आकर कितने खुश है , जब भी इन लोगों से पकिस्तान की बात की जाति है तो इनकी रूह कांप जाति है , गौरतलब है की ये 88 पाकिस्तानी भील जाति के लोग अप्रैल के महीने में धार्मिक वीजा पर भारत आये थे, इन लोगों को जोधपुर और हरिद्वार की वीजा ही मिली थी , वहां से ये लोग सीधा जैसलमेर अपने रिश्तेदारों के पास आकर बैठ गए और अपनी दर्द भरी दास्ताँ सबको सुनाई , उनका कहना था कि उनके ऊपर वहां खूब अत्याचार होते थे , चूँकि वे लोग हिन्दू हैं तो उस मुस्लिम राष्ट्र में उनके साथ गुलामों की तरह व्यवहार किया जाता था , उनसे खेतों में बिना पैसे काम करवाया जाता था , साथ ही सफाई करवाना, झाड़ू लगवाना जैसे काम भी करवाए जाते थे. जब वो लोग इनकार करते थे तो उनके साथ मारपीट भी की जाती थी , इसलिए ये सब लोग अपने बीवी बच्चों के साथ भारत में धार्मिक वीजा पर आगये हैं और अब वापिस किसी भी कीमत पर नहीं जाना चाहते हैं , जबकि इनकी वीजा की अवधि भी खत्म हो चुकी है , इन लोगों का कहना है की मोदी की सरकार में इनको उम्मीद है कि ये भारत ही रहेंगे वापिस उस नारकीय जीवन को भोगने नहीं जायेंगे चाहे उसके लिए उन्हें मरना ही क्यों न पड़े.

जैसलमेर में पाकिस्तान से आ बसे 88 हिन्दू भील परिवार पर संकट के बादल आ गये हैं , सरकार ने उनको वापस पकिस्तान भेजने की बात कही है , लेकिन वहां के अत्याचारों से तंग आकर अपने ही देश में बसने की आस लिए भारत आये इन परिवारों की आँखों से आंसूं पोछने जैसलमेर के विधायक छोटू सिंह भाटी स्वयं उनके बीच पहुंचे और उन लोगों को आश्वसत किया क़ि मैं सरकार से बात करूंगा और उनको वापिस पकिस्तान नहीं भेजा जाए इस तरह की बात मुख्यमंत्री के सामने भी रखूँगा , ये लोग हमारे ही लोग हैं जो यहीं से गए हैं और अब ये भारत अपने देश में अपनों के बीच आये हैं इन पर जो अत्याचार हुए हैं वो वापिस न हो इसके लिए मैं सरकार से बात करके इनको भारत में ही रखने की बात करूंगा.

हालांकि पुलिस ने इन लोगों को जल्द से जल्द जैसलमेर छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया है , मगर इन लोगों का साफ़ कहना है कि वे लोग किसी भी कीमत पर अब पाकिस्तान वापसी नहीं जायेंगे , अब देखना ये होगा क़ि सरकार क्या निर्णय करती है

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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