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बीजेपी के दिल्ली स्थित केन्द्रीय कार्यालय में चारों ओर पसरा सन्नाटा..

By   /  November 8, 2015  /  No Comments

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-एम् अख्तर उद्दीन मुन्ने भारती॥

नई दिल्ली: बिहार चुनाव मतगणना के दिन भाजपा कार्यालय में सुबह से ही पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के चेहरे पर ख़ुशी देखी जा सकती थी। टीवी पर जैसे जैसे रिज़ल्ट सामने आता जा रहा था, पार्टी प्रवक्ता कार्यालय में लगे पार्टी नेताओं के चेहरे पर चमक बढ़ती जा रही थी और टीवी चैनलों पर फ़तह हासिल करने के दावे मज़बूत होते जा रहे थे।bjp-office_650x400_51446967488

बीच बीच में कार्यकर्ताओं द्वारा लगाये जा रहे नारों से जोश बढ़ रहा था। लेकिन फिर टीवी चैनलों पर जैसे जैसे नतीजे महागठबंधन की ओर बढ़ रहे थे, नेताओं के चेहरों पर मायूसी साफ़ नज़र आती जा रही थी। कई प्रवक्ताओं ने तो टीवी चैनलों के रिपोर्टरों को अपना ऐतराज़ जताते हुए यहां तक कह डाला कि आपका टीवी चैनल ग़लत आंकड़े दे रहा है, पार्टी जीत की तरफ़ बढ़ रही है।

महागठबंधन को भारी जीत दिखाती टीवी चैनलों की बहस को बीच में छोड़ प्रवक्ता एक जगह इकट्ठा हुए और बहस को किस दिशा में ले जाया जाए, इस पर चर्चा की। उसके बाद वे वापस बहस में शामिल हुए। लेकिन टीवी बहस में आने वाले दो केन्द्रीय मंत्री कार्यालय नहीं पहुचे और उनको ढूंढ़ने के लिए टीवी चैनलों के कोऑर्डिनेटरों को काफ़ी मशक़्क़त करनी पड़ी।

खबर लिखे जाते वक्त तक फ़िलहाल भाजपा केन्द्रीय कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ था और नेता हार के कारण की समीक्षा करने बंद कमरे की मीटिंग में जा चुके थे।

NDTV

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  • Published: 2 years ago on November 8, 2015
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  • Last Modified: November 8, 2015 @ 3:30 pm
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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