कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

ब्रिटेन के पास न्यूक्लियर में ज़्यादा कुछ है नहीं भारत को देने को..

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

-कुमार सुन्दरम॥

 

ब्रिटेन के पास न्यूक्लियर में ज़्यादा कुछ है नहीं भारत को देने को। बढ़ती कीमतों, सस्ते और सुगम होते नवीकरणीय विकल्पों और सुरक्षा कारणों से वहाँ परमाणु उद्योग पहले से ही ढलान पर है। लेकिन मोदीजी की घोषणा में यूके से परमाणु डील का ज़िक्र टोटके की तरह शामिल है।unnamed (3)

इसमें खतरनाक बात ये है कि दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा के साफ़ और कार्बन-मुक्त होने का झूठ दोहराया है और कंपनियों के हित में ऐसा सामूहिक दुष्प्रचार होगा तो क्लाइमेट चेंज पर अगले महीने होने वाली ग्लोबल बैठक में परमाणु लॉबी इसका इस्तेमाल अणु ऊर्जा की गिनती नवीकरणीय और हरित ऊर्जा-स्रोतों के साथ करवाने में करेगी।

परमाणु ऊर्जा हरित नहीं है। यूरेनियम ईंधन के खनन से लेकर संयंत्रों के लिए उच्च-क्षमता के कंक्रीट बनाने और आखिर में परमाणु कचरे के भंडारण – हर स्तर पर कार्बन-उत्सर्जी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल होता है और इस तरह अणु ऊर्जा में कोयले के बिजलीघरों में निकलने वाले कार्बन का आधा तो कम से कम निकलता ही है।

साथ ही, अणु ऊर्जा जलवायु-परिवर्तन का इलाज बिलकुल नहीं हो सकती क्योंकि एक-एक प्लांट को बनाने में कम से कम 12 से 15 साल लगते हैं और जलवायु परिवर्तन के उपचार के लिए लगभग सभी विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने एक दशक की सीमारेखा रखी है। ऊर्जा ज़रूरतों के हिसाब से हर साल एक परमाणु प्लांट बनाना पडेगा अगर अणु ऊर्जा के सहारे कार्बन-उत्सर्जन से बचना है। और यह असंभव है। यहां सोलर और दूसरे साधन बेहतर विकल्प साबित होते हैं।

मोदीजी की परमाणु डील इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि उन्होंने परमाणु दुर्घटना की स्थिति में विदेशी सप्लायरों को जो न्यूनतम मुआवजा चुकाने का प्रावधान था, जो मनमोहन सरकार की कोशिशों के बाद भी वामदल और जनांदोलन मनवाने में सफल हुए थे, उसको मोदीजी ने पूरी तरह हटाने का ठान लिया है ताकि निवेश आ सके।

फुकुशिमा दुर्घटना के बाद एक के बाद एक कई बड़े देशों ने परमाणु ऊर्जा से तौबा कर के नवीकरणीय ऊर्जा नीति अपनाई है। साथ ही, ऊर्जा की बचत और उपभोग कम करने की चर्चा भी मजबूत हुई है। विकास की नई परिभाषा की बात चली है। लेकिन भारत ने इन परमाणु डीलों से खुद को बाँध लिया है और ऊर्जा नीति पर एक सम्प्रभु देश की तरह नफ़ा-नुकसान सोच के स्वतंत्र निर्णय लेने का विकल्प खो दिया है। जो सरकारी भोंपू इन डीलों के समर्थन में और परमाणु ऊर्जा की वाहवाही में उतरे हैं उनसे पूछा जाए कि भारत के पास इन खरीदों को कैंसिल करने का राजनीतिक विकल्प है भी क्या? कम से कम मौजूदा निजाम में तो नहीं। तो फिर सबकुछ एक तरफा है और ये सरकारी विशेषज्ञ क्या बेहतर हो सकता है कि बजाय जो हो रहा है वो क्यों अच्छा है यही समझाने में लगे हैं।

Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
Share.

About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: