/रोहित वेमुला प्रतिक्रियावादी ताकतों और सरकार की सरपरस्ती में जारी फासीवादी मुहिम के शिकार..

रोहित वेमुला प्रतिक्रियावादी ताकतों और सरकार की सरपरस्ती में जारी फासीवादी मुहिम के शिकार..

आगरा, “रोहित वेमुला प्रतिक्रियावादी ताकतों और सरकार की सरपरस्ती में जारी फासीवादी मुहिम के शिकार हुए’’ यह कहना था हिंदी के प्रमुख साहित्यकार मलखान सिंह का. वह हैदराबाद वि.वि. का दलित शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के विरोध में आज शाम यहाँ शहीद स्मारक में शहर के संस्कृतिकर्मियों और बुद्धिजीवियों द्वारा आयोजित प्रतिरोध सभा में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे. इस प्रतिरोध सभा का आयोजन दलित साहित्य मंच, रंगली ला, इप्टा, जनसंस्कृति मंच, ,ए.आई.एस.एफ , शहीद भगत सिंह स्मारक समिति, रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर दलित,आदिवासी एंड माइनॉरिटी (रिदम), आर .बी .एस. कॉलेज ड्रामा क्लब, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, आल इंडिया बहुजन फेडरेशन संगठनों ने किया था.12493648_1029714180420493_2595643176708824290_o

कार्यक्रम का प्रारम्भ रंगली ला के निर्देशक और वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल शुक्ल के वक्तव्य से हुआ. उनका कहना था कि रोहित के भीतर असीम संभावनाए मौजूद थी, वह रंगकर्मी, रचनाकार आदि हो सकता था. इसके पश्चात जन संस्कृति मंच से डॉ प्रेमशंकर सिंह ने रोहित वेमुला द्वारा लिखित पत्र को पढ़कर सुनाया. कार्येक्रम का सञ्चालन करते हुए दलित साहित्य मंच के सचिव डॉ सूरज बडतिया के कहा कि रोहित की हत्या फासीवादी साजिश का परिणाम है और इन साजिशो के खिलाफ मुहिम चलाई जानी चाहिए. इप्टा की तरफ से बोलते हुए रंगकर्मी विजय शर्मा ने रोहित की आत्महत्या पर गहरा दुःख व्यक्त किया. रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर दलित,आदिवासी एंड माइनॉरिटी के सचिव अर्जुन सवेदिया ने रोहित की आत्महत्या के लिए सीधे तौर पर ब्राह्मणवादी मानसिकता को दोषी ठहराया.

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की जिला सचिव किरण सिंह ने कहा कि रोहित समेत अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के पांच छात्रों का निष्कासन और इस प्रताड़ना से क्षुब्ध होकर रोहित की आत्महत्या यह बताती है कि देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रतिक्रियावादी ताकतों की घुसपैठ बढ़ी है और इसका विरोध किया जाना चाहिए. इसके अतिरिक्त उपेन्द्र सिंह, डॉ अरशद खान , योगेंदर दुबे ,डॉ एच के सिंह, डॉ ए के सिंह, डॉ कमलेश कुमारी रवि ,ब्रिजराज सिंह, डॉ. आर. के. भारती इत्यादि ने भी अपनी बात रखी. कार्यक्रम में विश्वविधालयो के बहुत से शोधार्थी, कालेज की छात्र –छात्राएं , और आगरा के गणमान्य लोगों ने हिस्सेदारी की. कार्येक्रम के अंत में 2 मिनट का मौन रखा गया और अंत में केंडिल जलाकर रोहित वेमुले की शाहदत को नमन और उनके सामाजिक परिवर्तन के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की शपथ ली.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.