Loading...
You are here:  Home  >  अपराध  >  Current Article

1090 निदान नहीं, बिलकुल ढपोरशंख है, डेंटल मेडिकल छात्रा ने छेड़खानी से त्रस्त होकर फांसी लगा ली..

By   /  January 30, 2016  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-कुमार सौवीर||

बधाई हो सरकार में बैठे समाजवादियों और तुम्हारे कारकूनों ! तुम्हारे अटूट प्रयास आज फलीभूत हुए और नतीजा यह हुआ कि बीती रात एक मेडिकल छात्रा ने अपने कमरे में पंखे से लटक कर खुद को मौत हवाले कर दिया। बधाई हो।Woman-student-c3788
ताज़ा खबर है कि लखनऊ के एक डेंटल मेडिकल छात्रा ने छेड़खानी से त्रस्त होकर फांसी लगा ली। पिछले कई महीने से मोहल्ले से लेकर कॉलेज आसपास शोहदों ने उसका जीना हराम कर रखा था। मानसिक तनाव इतना बढ़ने लगा कि उसे खुद की जिंदगी ही अभिशाप लगाने लगी। उसे लगा कि उसका स्त्री-देह ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन है। बस फिर क्या था। इस बच्ची ने उस कलंक-अभिशाप को ही हमेशा-हमेशा के लिए धो डाला।
यह बच्ची अवध क्षेत्र के बलरामपुर जिले की थी। उसके पिता वहां दवा की दूकान चलाते हैं। यह बच्ची होनहार थी, सो आगे की पढाई के लिए लखनऊ अपने चाचा के परिवार के साथ रहने लगी। जल्दी ही उसकी मेहनत रंग लायी और उसे डेंटल कालेज में प्रवेश मिल गया।
लेकिन आज…..
मेरी समझ में नहीं आता है कि महिला-शक्ति को सशक्तिकृत करने के दावे तो यूपी सरकार ने तो खूब किये। शुरुआत हुई महिला अपराधों पर कडा अंकुश लगाने के संकल्प से। योजना की संकल्पना तैयार की थी 2 साल पहले सुल्तानपुर की एक महिला युवा आईपीएस अधिकारी अलंकृता ने, जो उस वक्त वहां पुलिस कप्तान थी।
लेकिन शासन और पुलिस के बड़े हाकिमों ने उस संकल्पना को उस महिला से छीन लिया और लखनऊ के एसएसपी पद से हटाये गए नवनीत सिकेरा को उसका मुखिया बना डाला। जबकि होना तो यह था कि जिस अफसर ने उस योजना की रूप-रेखा बुनी थी, उसे ही उसका जिम्‍मा दिया जाता। इसलिए खास ताैर पर भी, कि महिला होने के चलते वह महिलाओं की इस हेल्‍पलाइन को बेहतर ढंग से समझ और क्रियान्वित कर सकती थी। लेकिन उस योजना को नयी रंगरोगन से लीपपोत कर उसे 1090 का नाम गया। सिकेरा को मुखिया इस लिए बनाया गया क्योंकि अखिलेश यादव परिवार से सिकेरा की बेहद करीबी है। कुछ भी हो, 1090 ने और कोई काम भले किया हो या नहीं, लेकिन इसको लेकर फर्जी डंके खूब बजवा दिया।
लेकिन अपने दो साल के प्रयोग के अंतराल यह 1090 का प्रयोग पूरी तरह असफल हो गया। महिलाओं में विश्वास उपजाने के बजाय अब किशोरियां-महिलाओं के सपनों में 1090 के दारुण-डरावने सपने दिखने लगे हैं। हाल ही 1090 के एक प्रभारी अधिकारी तो एक वादी युवती से ही वही करतूत करने लगे, जिसके खिलाफ ही 1090 डंका बजाने का दावा था। पीडि़त महिला जब महिला अधिकार प्रकोष्‍ठ की महानिदेशक सुतापा सान्‍याल के पास पहुंची तो उन्‍होंने तत्‍काल इस मामले की खुद जांच करने का ऐलान किया। लेकिन अचानक ही आला अफसरों ने सुतापा सान्‍याल से यह मामला खींच कर सीधे नवनीत सिकेरा को थमा दिया। बाकी आप-सब को यह बताने की जरूरत तो है नहीं कि करीब एक महीना होने के बावजूद यह मामला ठण्‍डे बस्‍ते में ही पड़ा हुआ है। इसके पहले एक 84 वर्षीय महिला को एक शख्‍स ने कई-कई बार फोन करके भद्दी गालियां दीं और जान से मार डालने की धमकियां दीं। इसकी शिकायत जब 1090 और नवनीत सिकेरा तक की गयी, लेकिन कई कोशिशों के बावजूद कुछ भी नहीं हुआ। बाद में पता चला कि इस शिकायत पर गाजीपुर के थानाध्‍यक्ष ने उक्‍त अभियुक्‍त से 15000 हजार रूपया वसूल कर मामला रफा-दफा कर दिया।
यह तब हुआ जब सूचना विभाग के एक बड़े बडबोले और महीन अफसर अशोक कुमार शर्मा पुलिस के प्रवक्‍ता बने घूम रहे थे और इस मामले पर उन्‍होंने खुद हस्‍तक्षेप करने का दावा किया था।
तो बोलो:- नवनीत सिकेरा जिन्‍दाबाद।
ऐसे में 1090 के प्रति आम महिला का विश्‍वास कैसे पनपता ?
एक ओर मुलायम सिंह यादव जब यह ऐलान करते घूम रहे थे कि लड़कों से गलतियां हो जाती हैं, ऐसे में यह मेडिकल छात्रा किससे अपनी फरियाद करती।
उस बच्‍ची ने फैसला किया। तय किया कि अब न बांस रहेगा और न बजेगी बांसुरी।
बीती रात उसने अपने दोपट्टे से पंखे से फांसी का फंदा बनाया और
झूल गयी फांसी पर वह होनहार बच्‍ची।
आओ, अब 1090 का डंका बजाया जाए कि 1090 निदान नहीं, बिलकुल ढपोरशंख है।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 2 years ago on January 30, 2016
  • By:
  • Last Modified: January 30, 2016 @ 6:07 pm
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पनामा के बाद पैराडाइज पेपर्स लीक..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: