/खैंच-फोटूबाजी के बाद डीएम और दैनिक जागरण आमने-सामने, कूड़ा फेंका..

खैंच-फोटूबाजी के बाद डीएम और दैनिक जागरण आमने-सामने, कूड़ा फेंका..

अब खुली गुण्‍डागर्दी पर आमादा हो गयी हैं चंद्रकला: दैनिक जागरण
20 साल पहले भी लखनऊ के जागरण पर हुआ था बसपा का हमला
यह हादसा प्रशासनिक गुण्‍डागर्दी की पराकाष्‍ठा, निन्‍दनीय व भत्‍र्स्‍नाजनक

-कुमार सौवीर॥
लखनऊ: बुलंदशहर में खैंच-फोटूबाजी के बाद डीएम और दैनिक जागरण आमने-सामने आ गये हैं। आज जागरण के दफ्तर के सामने कई ट्रक कूड़ा-कचरा फेंका गया। यह हादसा शहर के बीच-भरे इलाके में हुआ। इसके बाद से इस पूरे इलाके में असह्य बदबू हो फैल गयी। अब जागरण वाले डीएम से बात करने के बजाय सीधे लखनऊ मुख्‍यालय से सम्‍पर्क जोड़ रहे हैं। शायद उन्‍होंने भय है कि यह डीएम उनकी और भी ज्‍यादा भद्द करा सकती हैं। जबकि नगर पालिका वाले अफसरों से जब जागरण वालों ने इस बारे में शिकायत की तो हर अफसर ने यही जवाब दिया कि वे इस वक्‍त शहर से बाहर हैं, वापस आने पर ही तत्‍काल कार्रवाई की जाएगी। कुछ भी हो, डीएम की यह हरकत अभद्रता और प्रशासनिक गुण्‍डागर्दी की पराकाष्‍ठा है।06_02_2016-b-chandra-kala
आज सुबह करीब साढे आठ बजे के आसपास शहर के बीचोंबीच स्थित दैनिक जागरण के कार्यालय के सामने करीब दस ट्रक हरहराते हुए पहुंचे और उस पर लदे बदबूदार कचरे और कूड़े का अम्‍बार जागरण के कार्यालय के सामने लगा दिया। देखते ही देखते इसकी असह्य बदबू से पूरा मोहल्‍ला घिन्‍नाय गया। दैनिक जागरण इस बारे में कोई भी जानकारी नही दे पा रहे हैं, लेकिन पता यही चला है कि नगर पालिका के ट्रकों से ही यह शहर का कचरा एकत्र कर उसे जागरण के सामने डम्‍प कर दिया गया था। हालांकि इस दौरान नगर पालिका का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं मौजूद था।
आपको बता दें कि इंटर के एक छात्र द्वारा डीएम बी चंद्रकला के साथ सेल्‍फी खींचने के बाद से शुरू हुए इस झगड़े में तब तेल-पेट्रोल पड गया था जब जागरण के ब्‍यूरो चीफ सुमन ने च्ंद्रकला से बातचीत कर उनका पक्षा जानने की कोशिश की कि उस युवक को जेल भेजने पर उनकी राय क्‍या है। इस पर चंद्रकला भड़क गयीं और उन्‍होंने गुस्‍से में यह तक कह दिया कि वे तुम्‍हारी बहन-मां की सरेआम सेल्‍फी खिंचवाऊंगी और यह भी कहा कि उनके पास ऐसे बहुत से शोहदे-गुण्‍ड मौजूद हैं जो तुम्‍हारी बहन और मां की सेल्‍फी सरेआम खींच सकते हैं। कहो तो भिजवा दूं उन गुण्‍डों को तुम्‍हारी बहन और माता के पास।
बस, इसी के बाद से जागरण के स्‍थानीय चीफ सुमन ने वह बातचीत का टेप सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद से हंगामा एकदम भड़क गया। हालांकि जानकारों का कहना है कि अचानक दैनिक जागरण का यह ब्‍यूरो चीफ पिछले लम्‍बे से बी चंद्रकला को कई धंधों में चंद्रकला से भारी लाभ उठाने की फिराक में था, लेकिन जब वह अपनी कोशिश में कामयाब नहीं हुआ तो उसने चंद्रकला से बातचीत कर साजिशन यह हरकत कर दी। भड़ास4मीडिया के यशवंत सिंह का कहना है कि यह एक सहज बातचीत नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी, जिसका भरपूर अनुभव दैनिक जागरण में तैनात ब्‍यूरो चीफ जैसे हर बड़े पदाधिकारी को होता है। एक मित्र ने यह भी बताया कि जिस शैली में चंद्रकला और सुमन के बीच बातचीत हुई, उसमें भी सुमन का रवैया बहुत संदिग्‍ध दीखता है।
लेकिन इसके बावजूद इस पूरे काण्‍ड में चंद्रकला को दूध का धुला नहीं साबित किया जा सकता है। जिस तरह की शैली वाली बातचीत चंद्रकला ने की और उसके पहले जिस तरह उस छात्र को जेल भेज दिया गया, वह बेहद आपत्तिजनक रहा है। और खासकर तब जब आज सुबह जागरण के दफ्त्‍र पर ट्रकों कूडा फेंकवा दिया जाना। उधर आपको बता दें कि दैनिक जागरण इसके पहले भी इस तरह की हरकतें कर चुका है। जागरण ने बीस साल पहले बसपा के एक निजी मसले पर मायावती पर एक बार हमला बोला था, जिसका जवाब बसपा ने बेगम हजरत महल पार्क पर एक विशाल जनसभा कर दिया था। वह तो बच गये जागरण वाले, वरना उग्र बसपाई हजरतगंज का पूरा दफ्तर ही फूंक देते।
लेकिन इसके बावजूद बुलंदशहर की डीएम का यह कृत्‍य जस्‍टीफाई नहीं किया जा सकता है कि हरकत की जानकारी डीएम या नगर पालिका के किसी अफसर को नहीं थी। जाहिर है कि इसके लिए डीएम तक के लोगों की मंजूरी और सहमति रही होगी।
मेरी निगाह में तो यह प्रशासनिक अधिकारियों का सरेआम अभद्र और अश्‍लील प्रदर्शन है। और मैं इसकी कड़ी निन्‍दा करता हूं। जाहिर है कि दैनिक जागरण की भी भत्‍र्स्‍ना।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.