/विभूति नारायण राय और अभिरंजन कुमार सम्मानित..

विभूति नारायण राय और अभिरंजन कुमार सम्मानित..

सामाजिक संस्था “भोर” और सुगौली प्रेस क्लब, मोतिहारी द्वारा 4 और 5 मार्च को संयुक्त रूप से आयोजित “भोर लिटरेचर फेस्टिवल – 2016” में वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय को प्रथम रमेश चंद्र झा स्मृति सम्मान और चर्चित कवि-पत्रकार अभिरंजन कुमार को प्रथम पंकज सिंह स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।अभिरंजन कुमार

बिहार के महत्वपूर्ण गीतकार-उपन्यासकार और स्वाधीनता सेनानी रहे स्वर्गीय रमेश चंद्र झा की स्मृति में शुरू किया गया सम्मान साहित्य और समाज के क्षेत्र में, जबकि कवि-पत्रकार स्वर्गीय पंकज सिंह की स्मृति में शुरू किया गया सम्मान साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है। इन दोनों सम्मानों के तहत प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र और 21-21 हज़ार रुपये दिये जाते हैं। निर्णायक मंडल में वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन, अनुरंजन झा और अतुल सिन्हा शामिल थे।

पूर्व पुलिस अधिकारी विभूति नारायण राय घर, तबादला और शहर में कर्फ्यू जैसे अपने उपन्यासों के कारण काफी ख्याति बटोर चुके हैं और वे महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के उप-कुलपति भी रह चुके हैं। कवि-पत्रकार अभिरंजन कुमार अपने कविता संग्रहों उखड़े हुए पौधे का बयान, बचपन की पचपन कविताएं और मीठी-सी मुस्कान दो के लिए जाने जाते हैं। नियमित साहित्य-सृजन के अलावा वे कई टीवी चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.