/नहीं कहा भाजपा सरकार से सरकारी बंगले का किराया कम करने को : प्रियंका गांधी वाड्रा

नहीं कहा भाजपा सरकार से सरकारी बंगले का किराया कम करने को : प्रियंका गांधी वाड्रा

प्रियंका गांधी वाड्रा ने इन दावों को खारिज कर दिया कि लुटियंस दिल्ली में उनके सरकारी बंगले का मासिक किराया उनके अनुरोध पर कम कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि इस राशि का निर्धारण साल 2002 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने किया था और इस श्रेणी में अन्य लोगों के लिए भी वही किराया था।priyanka gandhi

प्रियंका के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि दिसंबर 1996 में अपने निवास के लिए उन्होंने किराए पर एक निजी आवास लिया था, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें सरकारी आवास लेने को कहा गया। प्रियंका कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पुत्री हैं और उन्हें एसपीजी सुरक्षा हासिल है।

बयान में कहा गया है, ‘तत्कालीन भाजपा सरकार के सभी नियमों और नियमनों के अनुसार बाजार दर, डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स के विशेष लाइसेंस शुल्क का तत्परता से और नियमित तौर पर उस समूची अवधि के लिए भुगतान किया है जब वह सरकारी आवास में रहीं। इसमें वो अवधि भी शामिल है, जिसको लेकर सवाल उठाया गया है।’

वक्तव्य में आगे कहा गया है, ‘जिस किराए की बात की जा रही है उसे सरकार ने निर्धारित किया था और उस श्रेणी में अन्य लोगों के लिए भी वही किराया था।’ एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वह वाजपेयी सरकार को लुटियंस दिल्ली में 2765.18 वर्ग मीटर के आवास का किराया 53 हजार 421 रुपये से घटाकर 8 हजार 888 रुपये करने के लिए समझाने में सफल रहीं, क्योंकि यह उनकी भुगतान करने की क्षमता के बाहर था।

भाजपा ने इस मुद्दे पर प्रियंका पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि यह हास्यास्पद है कि वह हिमाचल प्रदेश में एक बंगला बनाना और विदेश यात्रा करना वहन कर सकती हैं, लेकिन किराये को काफी अधिक पाती हैं।

किराए का निर्धारण तत्कालीन सरकार द्वारा करने और उस श्रेणी में अन्य लोगों का किराया भी समान होने के प्रियंका के बयान के बारे में पूछे जाने पर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि यह शायद अवैध नहीं है, लेकिन उन्होंने किराये का भुगतान करने में सक्षम होने के बावजूद छूट की मांग की थी। कितने किराए का भुगतान किया इस बारे में बात नहीं करते हुए प्रियंका ने बयान में सिर्फ इतना कहा कि सुरक्षा आधार पर सरकारी आवास में रह रहे कई लोग तत्कालीन भाजपा सरकार के संज्ञान में यह तथ्य लाए कि एक महीने से दूसरे महीने में बाजार दर, विशेष लाइसेंस शुल्क से 2002 में क्षतिपूर्ति दर में लाकर 90 फीसदी वृद्धि करना नियमों और नियमनों के विपरीत है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनमें से कोई भी व्यक्ति परिसर में अवैध तौर पर नहीं रह रहा था और दरअसल वे वैध तरीके से रहे थे। एसपीजी सुरक्षा प्राप्त प्रियंका ने कहा कि क्षतिपूर्ति की दर उन पर लागू नहीं होती।

वक्तव्य में कहा गया है, ‘इस त्रुटि को बाद में तत्कालीन भाजपा सरकार की आवास मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने एक पत्र और मौजूदा भाजपा सांसद अश्विनी कुमार (मिन्ना) और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच मुलाकात के बाद दूर किया।’ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सात मई 2002 को प्रियंका ने सरकार को पत्र लिखा और कहा कि 53 हजार 421 रुपये की राशि काफी अधिक है और यह उनकी भुगतान क्षमता के बाहर है।

फिलहाल वह 35, लोदी एस्टेट स्थित टाइप छह सरकारी आवास के लिए 31 हजार 300 रुपये किराए का भुगतान करती हैं।
(एजेंसी)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.