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और पल भर में बुझ गया भोजपुरी समाचार जगत का एक चमकता सितारा…

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भयानक सड़क हादसे में महुआ न्यूज़ के मीडियाकर्मी मुकुंद झा का निधन ।

रविवार का दिन महुआ परिवार के लिए बहुत बुरी खबर लेकर आया। महुआ न्यूज के होनहार पीसीआर प्रोड्यूसर मुकुंद का निधन हो गया। मुकुंद सुबह 11 बजे बाइक से दफ्तर आ रहे थे। फिल्म सिटी के पास पीछे से आ रहे एक डम्पर ने उन्हें कुचल दिया।

यही नहीं डम्पर उन्हें घसीटते हुए करीब दस मीटर तक ले गया। लिहाजा मुकुंद का तन दो हिस्सों में बंट गया। मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। डम्पर चालक मौके से फरार हो गया। आसपास के लोगों ने उनकी बाइक पर महुआ न्यूज का स्टिकर देखकर फोन किया। पल भर में ये खबर सबके पास थी। जो जहां था दौड़ा चला आया।

उनका क्षत विक्षत शव नोएडा सेक्टर 94 स्थित पोस्टमार्टम हाउस ले जाया गया। वहां पूरे दफ्तर के लोग मौजूद थे। हर आंख नम, हर आंख में आंसू थे। दफ्तर के कई साथी दहाड़ें मारकर रो रहे थे। इसी दौरान मुकुंद की बहन वहां अपने पति के साथ पहुंचीं। मुकुंद अपनी बहन के घर पर ही रहते थे। भाई का यूं जाना बहन के लिए सबसे बड़ा सदमा था। उनकी हालत देखकर और उनका रोना सुनकर भला कौन पत्थर होगा, जिसकी आंखों से आंसू नहीं निकले होंगे। वहां पर मौजूद हर शख्स के पास मुकुंद से जुड़ीं अपनी यादें थीं।

सुबह ही आउटपुट हेड रंजीत कुमार की उनसे बात हुई थी। नए दफ्तर के स्टूडियो से एक घंटे का लाइव जाना था चार बजे। मुकुंद ने उनसे कहा-सर आप दफ्तर पहुंचिए, आपसे पहले मैं पहुंच जाऊंगा… यही याद करके बार बार रो पड़ रहे थे रंजीत… पीसीआर में उनके साथी संतोष और शैलेंद्र का बुरा हाल है। कल शाम ही मुकुंद ने इनके साथ चाय पी थी, सुबह इनसे मुलाकात भी हुई थी।

मुकुंद महुआ न्यूज में तीन साल से थे। लम्बा कद… 31 साल उम्र थी और अभी शादी नहीं हुई थी। वे बिहार के भागलपुर के रहने वाले थे। यहां अपनी बहन और बहनोई के साथ रहते थे। बच्चे की तरह मानती थीं उनकी दीदी। स्वभाव से बेहद सरल और हंसमुख मुकुंद झा हर किसी के प्रिय थे। किसी विवाद से उनका कभी कोई नाता नहीं रहा। कोई भी समस्या फंसने पर मुकुंद का जवाब होता था-टेंशन मत लीजिए सर, ये हम कर लेंगे। जो काम सौंपा जाता, मुकुंद सौ प्रतिशत पूरा करते थे। पीसीआर में वो पैनल प्रोड्यूसर थे, लेकिन न्यूज के शो में पीटीसी भी पूरी लगन से करते थे साथ ही बबली की चुगली जैसे इंटरटेनमेंट के प्रोग्राम में कई बार उन्होंने ऐक्टिंग भी की थी।

दोपहर में कोई रिकार्डेड प्रोग्राम होता था तो मुकुंद मेरे कमरे में आ जाते थे। हाथ में चाय का प्याला होता था, बगल में बैठते थे। कुछ मैथिल साथियों से मैथिली में बात करते थे, चांदनी झा से मैथिली में खूब चख-चख होती थी। पांच-दस मिनट में माहौल बनाकर चले जाते थे। मैं खुद उनसे बहुत जुड़ाव महसूस करता था। अभी कल ही एक नया शो लांच किया था। सुबह रिकॉर्डिंग थी। मुकुंद ने फोन किया, सर सेट ठीक नहीं लग रहा है, कहिए तो मैं ठीक कराऊं। वो उनका काम नहीं था, फिर भी पेन लेकर मुकुंद ने ग्राफिक्स में सब ठीक करवाया और प्रोग्राम की रिकॉर्डिंग की। यही बात उनकी उन्हें सबसे अलग करती थी। मुकुंद की बातें, उनका अंदाज… उनकी सरलता और उनका यूं जाना… ऐसा लग रहा है जैसे ऊपर वाले ने अपना एक फरिश्ता भेज रखा हो, जिसके पास धरती पर गुजारने के लिए सिर्फ 31 साल थे।
मुकुंद झा के निधन के बाद महुआ परिवार ने एक कर्मठ, ईमानदार और शानदार साथी खो दिया है। हम सभी ने एक दोस्त, एक प्यारा साथी खो दिया है। सबका अंतर्मन आहत है, सबके मन में पीड़ा टीस मार रही है। लेकिन जरा उस बहन की सोचिए, जिन्होंने बेटे की तरह मुकुंद को अपने साथ रखा। उस छोटे भाई की पीड़ा सोचिए, जिसे बड़ा अफसर बनाने का सपना देखा था मुकुंद ने। उस बड़े भाई का दर्द समझने की कोशिश कीजिए, जिन्होंने छोटे भाई को गोद में उठाकर बरसों प्यार किया और अब वो भाई हमेशा-हमेशा के लिए उनसे दूर चला गया। मुकुंद के परिवार का दुख बहुत बड़ा है। ईश्वर मुकुंद की आत्मा को शांति दे, उनके परिवार को ये दुख उठाने की ताकत दे।

(लेखक विकास मिश्र महुआ न्यूज चैनल में प्रोग्रामिंग हेड के पद पर कार्यरत हैं। उनसे संपर्क vickkey7@gmail.com के जरिए किया जा सकता है।)

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5 comments

#1Dhananjay kumarSeptember 20, 2011, 9:51 AM

जीवन पर हम जीवो का वश नहीं है. जीवन दाता भी ईश्वर है और जीवन समाप्त करने वाला भी वही है.मुकुन्द झा जी का असामयिक निधन दुर्भाग्यपूर्ण है..भगवान उनकी आत्मा को शांति दे…और परिवार के लोगों को दुख सहने की शक्ति..! जीवन यादो और सपनो का बसेरा है..सपनो पर हमारा अधिकार नहीं, वह भविष्य है और भविष्य की डोर भगवान के हाथ होती है.हमारी प्राप्ति सिर्फ यादे हैं. शांति! शांति!! शांति!!!

#2NARESH KUMAR SHARMASeptember 19, 2011, 3:58 PM

हमारी हार्दिक संवेदनाएं !
युवा मुकंद झा का निधन पत्रकारिता जगत के लिए स्तब्ध करने वाला है !
उनकी दुर्घटना का समाचार पड़कर और दुःख हुआ. भगवन दिवंगत आत्मा को सद्गति प्रदान करें और परिवार जन को इस अत्यंत दुःख को सहन करने का बल दें.
ॐ शांति ! शांति !! शांति!

पूजे न शहीद गए तो फिर, यह पंथ कौन अपनाएगा ?
तोपों के मुँह से कौन अकड़ अपनी छातियाँ अड़ाएगा ??
चूमेगा फन्दे कौन, गोलियाँ कौन वक्ष पर खाएगा ???
अपने हाथों अपने मस्तक फिर आगे कौन बढ़ाएगा ????
पूजे न शहीद गए तो फिर आजादी कौन बचाएगा ?????
फिर कौन मौत की छाया में जीवन के रास रचाएगा ??????
पूजे न शहीद गए तो फिर यह बीज कहाँ से आएगा ???????
धरती को माँ कह कर, मिट्टी माथे से कौन लगाएगा ???????

#3Sandeep K. UpadhyaySeptember 19, 2011, 3:26 PM

अच्छे लोगो की जरुरत उपरवाले को भी होती है, भगवान उनकी आत्मा को शांति दे, और परिवार वालो को हिम्मत दे ताकी इस भयावह सदमे को सह सके.

#4ashok lavSeptember 19, 2011, 10:15 AM

हमारी हार्दिक संवेदनाएं ! युवा मुकंद झा का निधन पत्रकारिता जगत के लिए स्तब्ध करने वाला है ! उनकी दुर्घटना का समाचार पड़कर और दुःख हुआ. भगवन दिवंगत आत्मा को सद्गति प्रदान करें और परिवार जन को इस अत्यंत दुःख को सहन करने का बल दें. ॐ शांति ! शांति !! शांति!!!
–अशोक लव

#5Shivnath JhaSeptember 19, 2011, 9:30 AM

दुखद समाचार

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