Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

मानता हूं कि अधिकांश छोटे पत्रकार दलाल हैं पर तुम क्या हो जी-टीवी.?

By   /  May 31, 2016  /  5 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

उमा खुराना को सरेआम नंगा कर पिटायी करायी थी सुधीर चौधरी ने.. नवीन जिन्दल से एक करोड़ रूपयों का घूस मांगने में जेल गये सुधीर को देश का महान पत्रकार बनाया जी-टीवी ने.. पत्रकारों की औकात बताने से पहले तुम अपनी जांघिया को टटोल लो.. सच बात है कि हर जिले में सैकड़ों अखबार चौपतिया हैं..

-कुमार सौवीर||

दिल्ली के तुर्कमान गेट के एक गर्ल्स कालेज के बाहर जबर्दस्त भीड़ मौजूद थी। गुस्साई हुई। वजह यह कि इस कालेज की एक टीचर पर कालेज की लड़कियों को देह-व्यपार के लिए चकलाघर चलाने का आरोप था। अचानक इस कालेज से वह टीचर सिर झुकाये हुए निकली, तो भीड़ उस टीचर पर टूट पड़ी। चंद सेकेंड्स में उस शिक्षिका को भीड़ ने सड़क पर पूरी तरह नंगा कर दिया। उसकी लातों-जूतों से पिटाई की और बाद में उसे पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर उसे जेल भेज दिया। उसी दिन उस कालेज के मैनेजरों ने उस टीचर को बर्खास्त कर दिया।uma-khurana-2-300x187

इस शिक्षिका का नाम था उमा खुराना। अपने मोहल्ले से लेकर पूरे कालेज और छात्राओं के परिजनों के बीच बेहद संवेदनशील, लोकप्रिय और अनुशासन-प्रिय शिक्षिका मानी जाती थी उमा खुराना। लेकिन उस दिन उमा पर भीड़ ही नहीं, पूरी दिल्ली भड़की हुई थी। हवालात में पिटाई से चलते खून से सनी इस उमा ने उफ तक नहीं किया। करती भी तो किससे? सब के सब तो उसकी जान के ग्राहक बने हुए थे। इसलिए उसने खामोशी ही अख्तियार कर लिया।

लेकिन चंद दिनों बाद ही पता चल गया कि यह शिक्षिका पूरी तरह निर्दोष है, और उस कालेज की एक भी लड़की पर ऐसा कोई धंधे में संलिप्तता नहीं है। पुलिस जांच से साफ पता चल गया कि उमा की यह हालत एक न्यूज चैनल के फर्जी स्टिंग ऑपरेशन की देन थी। इस चैनल का नाम था लाइव टीवी, और उसका एक घटिया-सा मुखिया था सुधीर चौधरी। उसने उमा से भारी रकम मांगी थी, ले‍किन एक अदनी सी टीचर इतनी रकम कहां से ला पाती। पैसा न मिलने पर सुधीर चौधरी ने एक फर्जी स्टिंग बनाया और उसे अपने चैनल पर चला दिया। नतीजा, सरेआम पीट दी गयी उमा खुराना। आधुनिक पत्रकारिता की शर्मनाक कालिख का पर्यायवाची बन चुके सुधीर ने यह अपना यह घिनौना कार्यक्रम 28 अगस्त 2007 को दिखाया था। आज वही सुधीर चौधरी जी-टीवी में लोकप्रिय डीएनए कार्यक्रम के एंकर हैं, और दावा करते हैं कि पूरे समाज में बुराइयों की धज्जियां उधेड़ने का बीड़ा उठाये हैं सुधीर चौधरी।

sudhir-chaudhryइतना ही नहीं, सुधीर चौधरी कलियुग के पराड़कर हैं। एक बड़े उद्योगपति और सांसद नवीन जिन्दल से एक सौ करोड़ रूपयों की घूस मांग ली थी जी-टीवी वालों ने। जी-टीवी के मालिकों ने इस वसूली का जिम्मा दिया गया था इसी सुधीर चौधरी को। लेकिन जिन्दल ज्यादा घुटा निकला। उसने सुधीर और उसके एक अन्य साथी के साथ हुई अपनी बातचीत का ही स्टिंग कर लिया। नतीजा, जिन्दल ने रिपोर्ट दर्ज करा दी और सुधीर चौधरी को कई दिनों तक जेल में चक्की पीसनी पड़ी। लेकिन जी-टीवी वाले पक्के बेशर्म निकले और सुधीर को अपने चैनल में एक महान और सक्रिय पत्रकार की टक्क़र के तौर पर पेश कर दिया। नया कार्यक्रम शुरू किया गया सुधीर के नाम से:- डीएनए।sudhir chaudhari

केवल जी-टीवी ही नहीं, रामनाथ गोयनका के नाम को भी सुधीर चौधरी ने खरीद लिया। सन-13 में दिल्ली के एक मासूम बच्ची से सामूहिक बलात्कार के मामले में बच्ची के मित्र का इंटरव्यू करने के साहसिक अभियान के लिए सुधीर चौधरी को यह सम्मान दिया गया है। और अब वही सुधीर चौधरी अब पत्रकारिता की कमियां खंगालने की नौटंकी कर रहे हैं। हिन्दी पत्रकारिता दिवस के मौके पर जी-टीवी पर सुधीर चौधरी ने अपने डीएनए कार्यक्रम में यह साबित करने की कोशिश की है कि हर जिलों में जो सैकड़ों अखबार फर्जी छप रहे हैं, वह पत्रकारिता पर कलंक हैं। उन्हें केवल कमीशन और घूसखोरी के चलते लाखों रूपये के विज्ञापन मिल रहे हैं। सुधीर चौधरी का कहना है कि अकेले मध्य प्रदेश में ही ढाई सौ से ज्यादा वेब पोर्टल भी लाखों रूपया सालाना पीट रहे हैं।

सवाल यह है कि अगर यह अखबार और पोर्टल ही यह बदमाश हैं तो फिर सुधीर चौधरी क्या हैं? मैं मानता हूं कि यह परम्परा बेहद शर्मनाक और कलंककारी है कि फर्जी अखबार निकाला जाए, खबरों के लिए धमकी दी जाए। यह सब पत्रकारिता के लिए घिनौना है। लेकिन यह भी तो हकीकत है कि वह अखबार-पत्रकार तो अपना पेट भरने के लिए यह सब कर रहा है, जबकि सुधीर चौधरी जैसे बदबूदार कीड़े पूरी पत्रकारिता को अपने मालिकों के इशारे पर कुत्ते की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 2 years ago on May 31, 2016
  • By:
  • Last Modified: May 31, 2016 @ 5:01 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

5 Comments

  1. कुमार मुकेश says:

    पत्रकरिता बिक रही है रंडवो की बाजार में और हम पत्रकारो को खोज रहे है कोठे की बाजार में। कुछ ऐसा ही है आज की पत्रकारिता। कड़े कानून बनाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे दलालो के बाजार को बन्द किया जा सके

  2. Khan says:

    Bilku sahi kaha hi mahoday ne

  3. India ki Media hi sabse bda atankwad h,,,Hindu muslimo k dilo me nfrt bharny wala zee news h. ..

  4. अज़ीमुद्द्दीन खान says:

    जो खुद बेईमान हे वोह दुसरो को ज्ञान बाट रहा है।

  5. संदीप तोमर says:

    नपातुला और सटीक विश्लेषण

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: