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PrimeTime – मेरा नाम निसार है, मैं एक जिंदा लाश हूँ..

By   /  June 1, 2016  /  1 Comment

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हैदराबाद पुलिस के द्वारा की गयी थी। पुलिस ने उन्‍हें गुलबर्गा, कर्नाटक स्थित उनके घर से उन्‍हें उठाया था। वह तब फार्मेसी सेकेंड ईयर में पढ़ते थे। निसार को 17 दिन पहले जयपुर जेल से रिहा कर दिया हैं।nisar

NDTV  पर रवीश कुमार ने आज अपने शो प्राइम टाइम में इस मामले पर चर्चा की जिसमे आँखे बंद करके रोते हुए निसार ने कहा की ‘मेरा नाम निसार है और मैं एक जिंदा लाश हूँ’

देखिये उस शख्स की कहानी जो बिना गुनाह किये 23 वर्ष जेल में रहा,

विडियो में पहले जीडीपी पर चर्चा की गयी है बाद में निसार के मुद्दे पर, डायरेक्ट 20 मिनट विडियो आगे बढाकर आप देख सकते है

सौजन्य से – प्राइम टाइम रवीश कुमार NDTV 

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  • Published: 1 year ago on June 1, 2016
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  • Last Modified: June 1, 2016 @ 10:01 am
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Kiran Yadav says:

    ravish kumar kabhi tumane pragya singh par koi karykram nahi kiya kyon tumako to sharm se mar jana chahiye

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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