Share this on WhatsApp
Subscribe to RSS
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

सरला मिश्रा की जली लाश को आज भी इंतजार है न्याय का..

-आनन्द मिश्र||

भोपाल : नाम सरला मिश्रा। आयु ४१ वर्ष। शिक्षा डबल एम.ए.,एम.एड.,एल.एल.बी. स्नातक पत्रकारिता। परिचय म.प्र. कांग्रेस की दबंग नेता एवं स्वतन्त्रता सेनानी की पुत्री, पौत्री। पद, राजनीति, म.प्र. युवक कांग्रेस की संयुक्त सचिव। हालपता सौ फीसदी जलने के बाद तड़प-तड़प कर हुई मौत। वजह, राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के संयुक्‍त कुकर्म।

Sarla-Mishra

जी हां, यह कहानी है मध्य प्रदेश की बेहद जुझारू और सक्रिय नेता सरला मिश्रा की। सरला की ख्वाहिशें थीं राजनीति में महिलाओं के लिए एक मजबूत डगर बनाना, लीक बनाना, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। हालांकि उसमें गजब का जोश था। कुछ कर डालने का माद्दा था। मप्र युवक कांग्रेस के विभिन्न पदों में रही सरला तब चर्चा में आयी जब मप्र के कुछ युवक कांग्रेसियों ने जबलपुर में कांग्रेसी पार्षद कैलाशशर्मा के ढाई वर्ष के पुत्र लक्की शर्मा पर तेजाब फेंक दिया। तब सरला मिश्रा ने ऐसे नेताओं के खिलाफ आवाज उठाई। इसकी सक्रियता ने पूरे मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि खुद कांग्रेस की राजनीति में एक जबर्दस्त तूफान खड़ा कर दिया।

सरला अपना सीना तान कर उस मासूम बच्चे को न्‍याय दिलाने के लिए खड़ी थी, मगर पूरी राजनीति उसके खिलाफ हो गयी। मगर सरला ने हौसला नहीं खोया। नतीजा यह हुआ कि सरला ने लक्की को लेकर तात्कालिक प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समक्ष पहुंच गयी। तो हंगामा हो गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उस बच्चे का उपचार अमेरिका में कराने का निर्णय लिया। इतना ही नहीं, सरला ने इस मामले में अपनी ही पार्टी के ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति वाले नेताओं के खिलाफ भी मोर्चा खोला। हालांकि उस पर इसके खिलाफ हमलों की साजिशें भी बुनी गयीं। लेकिन इसके बावजूद सरला अडिग ही नहीं। नतीजा यह हुआ कि तब आपराधिक प्रवृत्ति के चालीस से अधिक मध्य प्रदेश के युवक कांग्रेस के नेताओं को पार्टी से बाहर निकला था। उस समय श्री मोतीलाल बोरा म.प्र. के मुख्यमन्त्री थे।

राजीव गांधी की मप्र यात्रा में सदैव सरला मिश्रा उनकी टीम की सदस्य रही। उनका 10 जनपथ नई दिल्ली में प्रवेश बगैर रोकटोक था। श्री राजीव गांधी की हत्या के बाद भी यह क्रम बना रहा। लगातार 20 वर्षो तक कांग्रेस पार्टी के लिये सेवा में देने के बाद भी उन्हें उचित स्थान नहीं मिला।

सन् 1993 में दिग्विजय सिंह को मुख्यमन्त्री बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे उनकी राइटहैंड भी कहलाती थी किन्तु दिग्गी ने कभी भी उन्हें विधायक राज्यसभा का टिकिट नहीं दिलाया जबकि वे अपने भाई लक्ष्मण सिंह को तो विधायक,सांसद बनवाते रहे। सन् 1997 में सरला मिश्रा की सब्र का बांध टूट गया। वे इन्हीं बातों को लेकर एक दिन मुख्यमन्त्री निवास दिग्विजय सिंह से मिलने पहुंची और तैश में आकर बोली:- महाराजा मैं तेरे को अंतिम मौका दे रही हूं। अभी भी वक्त है, सम्भल जा, वरना मैं तो तुझे छोडूंगी नही।

इसी के कुछ दिनों के बाद 14 फरवरी 1997 को स्थानीय कुछ नेता सायं 5.30 बजे सरला को उनके आवास से एक कार्यक्रम के बहाने लेकर गये तथा बाद में वह १०० प्रतिशत जली अवस्था मे लौटी। संभवत उसे सी.एम. हाउस या उसके आस-पास ही जलाया गया। दूसरे दिन से लेकर २७ फरवरी तक भाजपा ने विधानसभा नहीं चलने दी। अंत में गृहमंत्री चरणदास महंत विधानसभा के अंदर सरला मिश्रा हत्याकाण्ड की सी. बी. आई. जांच की घोषणा की किन्तु नोटीफिकेशन न करने के कारण आज तक सी. बी. आई. जांच प्रारंभ नहीं हो सकी।

वर्तमान प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को भी इस हत्याकाण्ड की जानकारी है एवं हमने उन्हें अगस्त 2014 से लेकर लगातार पत्र लिखें, किन्तु वे भी वैसे ही निकले जैसे अन्य नेता हैं। शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर, डॉ गौरीशंकर शैजवार, गोपाल भार्गव, विश्वास सारंग के साथ मुख्यमन्त्री आवास में बैठक (23 जुलाई 2015) के बाद शिवराज ने हम से कहा था कि मिश्रा जी मैं आपके साथ हूं मेरी प्रधानमन्त्री जी से बात हो चुकी है। यही बात म.प्र. संगठन मन्त्री अरविन्द मे भी कही थी कि मिश्रा जी मैं अन्न की कसम खाता हू्ं इसकी जांच सीबीआई से होगी। मेरी मोदी जी से बात हो चुकी है।

लेकिन शर्म की बात है कि इस मामले में एक भी सरकार ने कोई भी कान नहीं दिया। जबकि यह सारे दल इस समय आम आदमी के मन में महिलाओं को लेकर सम्मान, शील की भाव का प्रदर्शित करने में संलग्न है।

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

0 comments

Add your comment

Nickname:
E-mail:
Website:
Comment:

Other articlesgo to homepage

डाॅ. राममनोहर लोहिया एक अनूठे फक्कड़ नेता..

डाॅ. राममनोहर लोहिया एक अनूठे फक्कड़ नेता..(0)

Share this on WhatsApp-मनमोहन शर्मा॥ 1958 की बात है। मैं इरविन अस्पताल के बस स्टैंड पर खड़ा बस का इंतजार कर रहा था कि मुझे सड़क पर खरामा-खरामा चलते हुए समाजवादी नेता डाॅ. राममनोहर लोहिया नजर आए। मई का महीना था और दिल्ली की कड़ाकेदार गर्मी जोरों पर थी। गर्मी के कारण मैं पसीना-पसीना हो

क्यों राहुल-अखिलेश को यह साथ पसन्द है..

क्यों राहुल-अखिलेश को यह साथ पसन्द है..(1)

Share this on WhatsApp-क़मर वहीद नक़वी॥ लखनऊ में रविवार को राहुल-अखिलेश के साझा रोड शो के कुछ राजनीतिक सन्देश बड़े स्पष्ट हैं. एक, यह महज़ उत्तर प्रदेश का चुनावी गठबन्धन नहीं है, बल्कि 2019 का विपक्षी राजनीति का रोडमैप है. यानी गठबन्धन को लम्बा चलना है. दो, दाँव पर सिर्फ़ एक चुनाव की हार-जीत नहीं

ढोलकल की ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा की चोरी में हो सकता है कल्लुरी का हाथ..

ढोलकल की ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा की चोरी में हो सकता है कल्लुरी का हाथ..(0)

Share this on WhatsAppसरकारी हेलीकॉप्टर के दुरूपयोग की आशंका.. -कमल शुक्ला॥ ढोलकल की ऐतिहासिक नागकालीन गणेश जी की मूर्ति के चोरी होने की खबर है । इस मामले में बस्तर पुलिस के कुख्यात अधिकारी कल्लुरी की संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है । ढोलकल के आस-पास के कई गांवों के ग्रामीणों ने पत्रकारों को बताया

क्या राजस्थान के नेताओं ने पंजाब में कांग्रेस का माहौल मजबूत बना दिया

क्या राजस्थान के नेताओं ने पंजाब में कांग्रेस का माहौल मजबूत बना दिया(0)

Share this on WhatsApp-विशेष संवाददाता॥ चंडीगढ़। देश के जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो हैं, उनमें से पंजाब में कांग्रेस की स्थिति सबसे मजबूत है। कांग्रेस के इस मजबूत माहौल के लिए जिन लोगों ने पंजाब में बहुत मेहनत की है, उनमें निश्चित रूप से पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सबसे आगे हैं। लेकिन

हे धनुर्धर अर्जुन, तुम शिखंडी नहीं हो..

हे धनुर्धर अर्जुन, तुम शिखंडी नहीं हो..(0)

Share this on WhatsApp-त्रिभुवन॥ झीलों की इस नगरी उदयपुर में कुछ लालची मुनाफाखोर आए दिन निर्दोष लोगों के जीवन को संकट में डालकर उनके चेहरों पर आंसुओं की झीलें बनाते रहते हैं। पूरा प्रशासनिक अमला असहाय होकर देखता रहता है। थोड़ी कानूनी कार्रवाई होती है और फिर इसे भुलाकर हम सब अगली दुर्घटना का इंतजार

read more

मीडिया दरबार एंड्राइड एप्प

मीडिया दरबार की एंड्राइड एप्प अपने एंड्राइड फ़ोन पर इंस्टाल करें.. Click Here To Install On Your Phone

Contacts and information

मीडिया दरबार - जहाँ लगता है दरबार. आप ही राजा हैं इस दरबार के और कटघरे में है मीडिया. हम तो मात्र एक मंच हैं और मीडिया पर अपनी निगाह जमायें हैं, जहाँ भी मीडिया में कुछ गलत होता दिखाई देता है उसे हम आपके सामने रख देते हैं और चलाते हैं मुकद्दमा. जिसपर सुनवाई करते हैं आप, जहाँ न्याय करते हैं आप. जी हाँ, यह एक अलग किस्म का दरबार है. मीडिया दरबार...

Social networks

Most popular categories

© 2014 All rights reserved.
%d bloggers like this: