/जिम्बाब्वे दौरे पर गए टीम इंडिया दल के एक सदस्य पर रेप का आरोप..

जिम्बाब्वे दौरे पर गए टीम इंडिया दल के एक सदस्य पर रेप का आरोप..

भारतीय क्रिकेट टीम के जिम्बाब्वे दौरे के दौरान रविवार (19 जून) को एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब सीरीज के प्रायोजकों में से एक से जुड़े अधिकारी को कथित बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया। हालांकि इस अधिकारी ने इस आरोप से इनकार किया और खुद को निर्दोष बताया है। यह विवाद तब खड़ा हुआ जब जिम्बाब्वे मीडिया में खबर आई कि एक भारतीय क्रिकेटर को बलात्कार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है, हालांकि उसका नाम नहीं दिया हुआ था।np

रिपोर्ट में कहा गया कि अफ्रीकी देश के भारतीय दूत आर मासाकुई ने शनिवार (18 जून) रात हरारे के होटल में खिलाड़ी की गिरफ्तारी को रोकने की कोशिश की। हालांकि भारत में अधिकारिक सूत्रों ने इस रिपोर्ट से इनकार किया है। इसमें कहा गया कि जो व्यक्ति गिरफ्तार हुआ, वह मौजूदा एक दिवसीय श्रृंखला के प्रायोजकों से एक से जुड़ा हुआ है।

सूत्रों ने कहा, ‘हरारे में बलात्कार के कथित आरोप में भारतीय क्रिकेटर के संबंध में आयी मीडिया रिपोर्टों के बारे में हमने जिम्बाब्वे में हमारे दूत से बात की है। रिपोर्ट पूरी तरह झूठ है। कोई भी भारतीय क्रिकेटर इसमें शामिल नहीं है।’ सूत्र ने कहा, ‘प्रायोजकों में से एक से जुड़े भारतीय को गिरफ्तार किया गया है। उसने भी आरोप से इनकार किया है और कहा कि वह खुद को निर्दोष साबित करने के लिये डीएनए परीक्षण भी कराने को तैयार है। हमारे दूत इस मामले पर नजर रखे हैं।’

बीसीसीआई ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उसे इस मामले के सही तथ्यों का पता करना होगा। बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ‘हम इस प्रकरण पर करीब से निगाह लगाये हैं। यह गंभीर मुद्दा है। इस मुद्दे की नजाकत को देखते हुए बीसीसीआई तथ्यों को जाने बिना कोई टिप्पणी नहीं करेगा।’

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.