Share this on WhatsApp
Subscribe to RSS
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

मजीठिया: केस लड़ रहे सभी साथी ध्‍यान दें..

साथियों, जैसा कि आप सभी को पता है कि 14 मार्च 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया वेजबोर्ड के लाभ प्राप्‍त करने की अभिलाषा रखने वालों और उनके उत्‍पीड़न व बर्खास्‍तगी के मामलों में सभी राज्‍यों के श्रमायुक्‍तों से रिपोर्ट मांगी है। और हममें से कइयों ने मजीठिया को लेकर रिकवरी लगा रखी है या अपनी बर्खास्‍तगी या उत्‍पीड़न को लेकर उपश्रमायुक्‍त से लेकर विभिन्‍नअदालतों में लड़ाई लड़ रहे हैं।

justice-majithia-left-chairman-of-the-wage-boards-for-working-journalists-and-non-journalists-and-other-newspaper-employees-submitting-the-recommendations-to-labour-secretary-p-k-ch1

ऐसे में सभी पत्रकार साथियों से अनुरोध है कि जिनके मामले उप श्रमायुक्‍त के यहां से रेफर होकर इंडिस्‍ट्रयल टि्ब्‍यूनल, नेशनल टि्ब्‍यूनल या श्रम अदालत में चले गए हैं या जिन्‍होंने सिविल अदालत या विभिन्‍न हाईकोर्टों में अपने मामले लगा रखे हैं वे अपने वकील के माध्‍यम से 14 मार्च 2016 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में अपने राज्‍य के श्रम आयुक्‍त को सीधे या फि‍र उपश्रमायुक्‍त कार्यालय के माध्‍यम से अपने केस के बारे में लिखित जानकारी दें और उसकी प्राप्ति की कापी जरुर लें।

जिससे सुप्रीम कोर्ट में जमा करवाने के लिए अपनी-अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय श्रमायुक्‍तों द्वारा आपके केसों के तथ्‍यों का भी ध्‍यान रखा जाए। इसका मुख्‍य कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्‍यों के श्रमायुक्‍तों को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है ना कि निचली अदालतों को। ऐसे में आपको खुद ही यह जानकारी श्रमायुक्‍तों तक पहुंचानी होगी।

ऐसे ही विभिन्‍न राज्‍यों में कार्यरत बहुत सारे साथियों ने फार्म सी तो भरा था, परंतु उन्‍होंने किसी भी उपश्रमायुक्‍त कार्यालय में रिकवरी नहीं डाली थी। उनसे अनुरोध है वे इस मामले में उपश्रमायुक्‍त को 14 मार्च 2016 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए जानकारी मांगें और उनसे अपनी रिपोर्ट भेजने के दौरान इन तथ्‍यों का भी ध्‍यान रखने का अनुरोध करें। यदि आप ऐसा खुद नहीं कर पा रहे हैं तो अपने जिले या राज्‍य में मौजूद पत्रकार संगठनों के माध्‍यम से भी यह कर सकते हैं।

आप सबसे से अनुरोध है कि आप इस मामले में ज्‍यादा ढिलाई न बरतें क्‍योंकि राज्‍यों के श्रमायुक्‍तों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिपोर्ट सौंपने की अंतिम तिथि नजदीक आ रही है।

(मप्र के एक पत्रकार साथी की रिपोर्ट पर आधारित)

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

0 comments

Add your comment

Nickname:
E-mail:
Website:
Comment:

Other articlesgo to homepage

अभागे ओम पुरी का असली दर्द..

अभागे ओम पुरी का असली दर्द..(0)

Share this on WhatsApp-निरंजन परिहार|| ओम पुरी की मौत पर उस दिन नंदिता पुरी अगर बिलख बिलख कर रुदाली के अवतार में रुदन – क्रंदन करती नहीं दिखती, तो ओम पुरी की जिंदगी पर एक बार फिर नए सिरे से कुछ नया लिखने का अपना भी मन नहीं करता. पति के अंतिम दर्शन पर आंखों

सवालों से किसे नफ़रत हो सकती है.?

सवालों से किसे नफ़रत हो सकती है.?(1)

Share this on WhatsApp-रवीश कुमार॥ सवाल करने की संस्कृति से किसे नफरत हो सकती है? क्या जवाब देने वालों के पास कोई जवाब नहीं है ? जिसके पास जवाब नहीं होता, वही सवाल से चिढ़ता है। वहीं हिंसा और मारपीट पर उतर आता है। अब तो यह भी कहा जाने लगा है कि अथारिटी से

क्या अघोषित इमरजेंसी की पदचाप और मुखर नहीं हो रही.?

क्या अघोषित इमरजेंसी की पदचाप और मुखर नहीं हो रही.?(3)

Share this on WhatsApp-ओम थानवी॥ एक रोज़ पहले ही रामनाथ गोयनका एवार्ड देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हम इमरजेंसी की मीमांसा करते रहें, ताकि देश में कोई ऐसा नेता सामने न आए जो इमरजेंसी जैसा पाप करने की इच्छा भी मन में ला सके। और भोपाल की संदिग्ध मुठभेड़, दिल्ली में मुख्यमंत्री-

तकदीर के तिराहे पर नवजोत सिंह सिद्धू …क्योंकि राजनीति कोई चुटकला नहीं..

तकदीर के तिराहे पर नवजोत सिंह सिद्धू …क्योंकि राजनीति कोई चुटकला नहीं..(0)

Share this on WhatsAppआप जब ये पंक्तियां पढ़ रहे होंगे, तब तक संभव है नवजोत सिंह सिद्धू को नया राजनीतिक ठिकाना मिल गया होगा। लेकिन सियासत के चक्रव्यूह में सिद्धू की सांसे फूली हुई दिख रही हैं। पहली बार वे बहुत परेशान हैं। जिस पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया, और जिसे वे मां कहते

मजीठिया: हिंदुस्‍तान, अमर उजाला, पंजाब केसरी के साथियों इतिहास आपको कभी माफ नहीं करेगा..

मजीठिया: हिंदुस्‍तान, अमर उजाला, पंजाब केसरी के साथियों इतिहास आपको कभी माफ नहीं करेगा..(0)

Share this on WhatsAppहक के लिए आवाज न उठाने के लिए पत्रकारिता के इतिहास में हिंदुस्‍तान, अमर उजाला, पंजाब केसरी जैसे अखबारों में कार्यरत साथियों का नाम काले अक्षरों में लिखा जाएगा। यह बहुत ही शर्म की बात है कि अंदर कार्यरत साथियों को तो छोड़ों, जो रिटायर या नौकरी बदल चुके हैं उन्‍होंने भी

read more

मीडिया दरबार एंड्राइड एप्प

मीडिया दरबार की एंड्राइड एप्प अपने एंड्राइड फ़ोन पर इंस्टाल करें.. Click Here To Install On Your Phone

Contacts and information

मीडिया दरबार - जहाँ लगता है दरबार. आप ही राजा हैं इस दरबार के और कटघरे में है मीडिया. हम तो मात्र एक मंच हैं और मीडिया पर अपनी निगाह जमायें हैं, जहाँ भी मीडिया में कुछ गलत होता दिखाई देता है उसे हम आपके सामने रख देते हैं और चलाते हैं मुकद्दमा. जिसपर सुनवाई करते हैं आप, जहाँ न्याय करते हैं आप. जी हाँ, यह एक अलग किस्म का दरबार है. मीडिया दरबार...

Social networks

Most popular categories

© 2014 All rights reserved.
%d bloggers like this: