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कश्मीर: खबरों का ब्लैक आउट, अखबार छापने पर लगी रोक, केबल टीवी बैन..

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शनिवार को कश्मीर घाटी में बढ़ते टेंशन पर काबू पाने के लिए सूचनाओं का ब्लैक आउट कर दिया गया.. खबरों के मुताबिक कश्मीर के स्थानीय अखबारों की कॉपियां जब्त करने के अलावा दफ्तरों को सीज कर दिया गया है.. केबल टीवी के प्रसारण को भी रोक दिया गया है..

कश्मीर घाटी में हिजबुल के कमांडर बुरहानी वानी के एनकाउंटर के बाद फैली हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। शनिवार को कश्मीर घाटी में बढ़ते टेंशन पर काबू पाने के लिए सूचनाओं का ब्लैक आउट कर दिया गया। खबरों के मुताबिक कश्मीर के स्थानीय अखबरों के की कॉपियां जब्त करने के अलावा दफ्तरों को सीज कर दिया गया है। केबल टीवी के प्रसारण को भी रोक दिया गया है। kashmir-curfew

जम्मू-कश्मीर सरकार के एक मंत्री ने कहा कि पाकिस्तानी चैनल यहां के केबल टीवी नेटवर्क की मदद से समस्या बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ अखबार भी हिंसा को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे थे।

कश्मीर घाटी में पुलिस ने शुक्रवार रात प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारकर उर्दू और अंग्रेजी के बड़े अखबारों की प्रतियां जब्त कर लीं। प्रकाशकों ने अपनी-अपनी वेबसाइटों पर दावा किया कि उनकी छपी हुई कॉपियां जब्त कर ली गईं और प्रिंटिंग प्रेस के लिए काम करने वाले लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
कश्मीर घाटी के सबसे बड़े अखबार ‘ग्रेटर कश्मीर’ की वेबसाइट की एक रिपोर्ट में कहा गया, ‘पुलिसकर्मियों ने ‘ग्रेटर कश्मीर’ की छपाई के लिए तैयार की गई प्लेटों और एक उर्दू दैनिक ‘कश्मीर उज्मा’ की 50,000 मुद्रित प्रतियां जब्त कर लीं और जी.के.सी. प्रिंटिंग प्रेस को बंद कर दिया।’ एक दूसरे अंग्रेजी दैनिक ‘कश्मीर रीडर’ ने कहा, ‘पुलिस ने ‘कश्मीर रीडर’ की प्रतियां जब्त कर लीं।’
डेली अखबार ने कश्मीर रीडर डॉट कॉम पर कहा, ‘पुलिस ने शुक्रवार रात दो बजे रांग्रेथ स्थित के.टी प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारकर आठ लोगों को हिरासत में ले लिया और ‘कश्मीर रीडर’ की प्रतियां भी जब्त कर लीं।’ के.टी. प्रेस घाटी के बड़े पिंटिंग प्रेसों में एक है और कई दैनिक अखबारों जैसे कश्मीर रीडर, तमील-ए-इरशाद, कश्मीर टाइम्स, कश्मीर ऑब्जर्वर, द कश्मीर मॉनिटर, ब्राइटर कश्मीर और कश्मीर ऐज को छापता है।

एक हॉकर ने कहा, ‘जब हम अखबार बांटने के लिए कॉपियां लेने गए तो तो पुलिसकर्मी पहले ही बंडलों को जब्त कर चुके थे। जब हमने उनसे पूछा यह क्यों हो रहा था तो उन लोगों ने हमारे साथ दुर्व्यवहार किया।’ मोबाइल नेटवर्क यहां गुरुवार की शाम से निलंबित है और 8 जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी (22) के सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने के बाद से यहां मोबाइल इंटरनेट सेवा भी बंद है।

घाटी में शनिवार को सातवें दिन भी अशांति बनी हुई है। अलगाववादियों ने लोगों से सोमवार तक बंद रखने का आह्वान किया है। घाटी में एकमात्र भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की मोबाइल सेवा और इंटरनेट कनेक्टिविटी के रूप में एकमात्र बीएसएनएल ब्रॉडबैंड सेवा चालू है।

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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