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UNI: जो खबर देते थे सबकी उनकी खबर नहीं..

By   /  September 15, 2016  /  No Comments

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-कश्यप किशोर मिश्रा॥
जरूरी नहीं, कि जो सबकी खबर दे उसके बारे में भी सबको खबर हो । देश की शीर्ष समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के संदर्भ में यह बात सटीक बैठती है । दुनिया भर की खबर देने वाली यूएनआई की अपनी खबर यह है, कि आज यूएनआई में हड़ताल रही । बीते दो महीनों से वेतन न मिलने से हलकान यूएनआई के पत्रकारों और गैर-पत्रकार कर्मचारियों ने आज हड़ताल और प्रदर्शन किया।Uni

सूत्रों के हवाले से खबर है, कि इस महीने की तीन तारीख को हुई यूएनआई की जनरल बॉडी की बैठक में, एजेंसी प्रबंधन ने सप्ताह भर के भीतर कर्मचारियों को वेतन दिये जाने का आश्वासन दिया था। कर्मचारियों के संगठन ने इस आश्वासन को पूरा नहीं किये जाने की स्थिति में हड़ताल की चेतावनी दी थी।

आज आयोजित हड़ताल में कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों ने चेयरमैन विश्वास त्रिपाठी के इस्तीफे की माँग करते हुए एजेंसी को व्यक्तिगत संपत्ति में तब्दील करने की कोशिशों पर आक्रोश जताया। सूत्रों के अनुसार इस दौरान उन्होंने कहा कि जब-तब पैसे नहीं होने का हवाला देकर वेतन को टाल दिया जाता है, कर्मचारी संगठन का आरोप है कि इसबार विज्ञापन संबंधी नये सरकारी प्रावधान के बाद एजेंसी के पास करीब पाँच सौ नये सब्सक्राइवर आये हैं। इसके अलावा अन्य स्रोतों से भी एजेंसी को पर्याप्त भुगतान प्राप्त हो चुका है। पीएफ में चालीस लाख रुपये जमा कराने के बाद भी कंपनी के खाते में पर्याप्त पैसे शेष हैं जिससे सभी कर्मचारियों को वेतन दिया जा सकता है। लेकिन प्रबंधन एजेंसी को व्यक्तिगत संपत्ति की तरह चला रहा है और कर्मचारियों का वेतन लगातार टाला जा रहा है।

हाल यह था, कि प्रदर्शन उग्र हो जाने पर यूएनआई के चीफ एडिटर अशोक टूटेजा ने कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिये बुलाया और यह आश्वासन दिया, कि चेयरमैन से निर्देश मिलते ही वेतन का भुगतान जारी कर दिया जाएगा। हालाँकि देर शाम तक कई कर्मचारियों से सम्पर्क करने पर पता चला कि अबतक उन्हें वेतन नहीं मिला है।

यूएनआई में तमाम अटकलों का बाजार गर्म है और इस विश्वस्त सूत्र ऑडिट में घोटाले की बात करते हैं। ऐसी चर्चा आम है कि एजेंसी के नये भवन का निर्माण इसीलिये टल रहा है।

सूत्रों के अनुसार प्रबंधन में एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुत्री की शादी का हवाला देकर कमीशन की माँग की जा रही है और यूनियन और प्रबंधन के कुछ सदस्य मिलकर भवन निर्माण में बड़ा घोटाला करने की साजिश रच रहे हैं।

यूएनआई में स्थायी कर्मचारियों को आखिरी बार 27-28 जुलाई को वेतन दिया गया था। नये स्थायी कर्मचारियों का वेतन अभी छह महीने पीछे चल रहा है यानि सितंबर में यदि वेतन मिला तो वह मार्च महीने का होगा। पुराने कर्मचारियों का वेतन बीस महीने तक के बैकलॉग में है। इससे इतर एजेंसी पर पीएफ का भी करोड़ों रुपया बकाया है। एक समय कई करोड़ का फिक्स्ड डिपोजिट रखने वाली कंपनी का इस तरह बदहाल स्थिति में पहुँच जाना चिंतनीय है। यह चिंता तब और जटिल हो जाती है जब इस तरह का घोटाला देश की सबसे पुरानी और विस्तृत समाचार एजेंसी में हो रहा हो और इसकी खबर किसी को नहीं है।

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  • Published: 1 year ago on September 15, 2016
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  • Last Modified: September 15, 2016 @ 11:01 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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