/फुटबॉल में बहुत उज्ज्वल दिखता है भारत का भविष्य..

फुटबॉल में बहुत उज्ज्वल दिखता है भारत का भविष्य..

-आफताब आलम||

वैसे तो भारत में सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट माना जाता है लेकिन फुटबॉल के प्रति भारतीय लोगो की दीवानगी भी किसी से छिपी नहीं है, चाहे वो इंग्लेंड में खेला जाने वाला दुनियाँ का सबसे बड़ा फुटबॉल लीग इंग्लिश प्रीमियर लीग हो या स्पेन में खेला जाने वाला लीगा BBVA. इटली में खेला जाने वाला सीरिया ए लीग हो या जर्मनी का बुनडसलीगा ! फुटबॉल प्रेमियों में ये सारे लीग बहुत ही मशहूर हैं और भारतीय दर्शक इन्हें देखने के लिए रात तक जागते भी हैं. अगर एक आकड़े की बात करें तो भारत फूटबाल पसंद करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश हैं,. भारत में इंग्लिश  क्लब, मानचेस्टर युनाइटेड, आर्सेनल, लिवरपूल, चेल्सी हो या स्पेन के क्लब रियल मेड्रिड, बार्सेलोना, या अट्लेटिको मेड्रिड ये ऐसे क्लब हैं जिनके फैंस पूरे भारत में भरे पड़े हैं !

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क्लब के प्रति फैंस कि दीवानगी और भारत को अपना मज़बूत बाज़ार मानते हुए इन क्लब्स ने भारत के कई बड़े शहरों में अपने सॉकर स्कूल भी खोल रखे हैं, साथ ही यहाँ कई लोकल पब और दूसरे रेस्तूरेंट्स के साथ करार भी कर रखा है जो इनके फैंस को VIP जैसा माहौल देते हुए लाइव मैचो का प्रसारण भी करते हैं.

 
इन्हीं सब को देखते हुए ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरशन ने 2014 में IMG रिलांस और स्टार इंडिया के साथ मिल कर भारत में इंडियन सुपर लीग की शुरुआत की थी. लीग के पहले संस्करण में आर्सेनल और इटली स्टार रॉबर्ट पेरिस, लिवरपूल के मिडफील्ड की जान रहे लुईस गार्सिया, ब्राज़ील के एलानो 2006 वर्ल्ड कप विनर मार्को मीटाराज़ी जैसे खिलाड़ियों ने लीग की शान बढ़ाई.

 
भारतीय दर्शक भी फूटबाल जगत के इन दिगगज़ों को देखने के लिए स्टेडियम में खूब आए, लीग के सारे मैचो में स्टेडियम फूलहाऊस थे. इंडियन सुपर लीग का पहला संस्करण सौरभ गांगुली और अटलेटिको मेड्रिड की सहस्वामित्व वाली अटलेटिको-डे-कोलकाता ने फाइनल मैच में सचिन तेंदुलकर की मालिकाना हक वाली केरला बलास्टर्स को हरा कर जीता था.
2015 में खेला गया दूसरा संस्करण भी दर्शकों के जोश और खेल के रोमांच से भरा रहा इस संस्करण को अभिनेता अभिषेक बच्चन की चेन्नईयन एफसी ने विराट कोहली और वरुण धवन कि टीम गोवा को हरा कर जीता था.
इस लीग के शुरू होने के बाद भारत में फुटबॉल देखने और इसपर चर्चा करने वालो की संख्या में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ हैं जिसका सबसे नया सबसे अच्छा उदाहरण 3 सितंबर को भारत और पुर्तोरिको के बीच खेला गया मैच था . जिसमें भारतीय टीम ने पुर्तोरिको कि टीम को 4-1 से मात दी. इस मैच को देखने के लिए मुंबई के स्टेडियम में तो काफ़ी संख्या में दर्शक आएँ ही फूटबाल प्रेमियों ने भी इसपर खूब चर्चा की और इसे फेसबूक पर टॉप ट्रैंड में बनाए रखा.
इंडियन सुपर लीग का तीसरा संस्करण भी शुरू हो चुका है और फुटबॉल प्रेमी इस संस्करण में भी खुल कर अपने पसंदीदा टीम्स का हौसला बढ़ा रहे है,
हाल ही में आई लीग चैपियन बेंगालुरू एफसी ने पहली बार एशिया की दूसरी सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बना ली है, एफसी कप के 13 साल के इतिहास में बेंगलुरू एफसी पहली भारतीय टीम है इन सभी को देखते हुए ये तो ज़रूर ही कहा जा सकता है कि भारत का भविष्य फुटबॉल में बहुत उज्ज्वल है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.