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क्या अघोषित इमरजेंसी की पदचाप और मुखर नहीं हो रही.?

By   /  November 4, 2016  /  3 Comments

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-ओम थानवी॥

एक रोज़ पहले ही रामनाथ गोयनका एवार्ड देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हम इमरजेंसी की मीमांसा करते रहें, ताकि देश में कोई ऐसा नेता सामने न आए जो इमरजेंसी जैसा पाप करने की इच्छा भी मन में ला सके।images-4

और भोपाल की संदिग्ध मुठभेड़, दिल्ली में मुख्यमंत्री- उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस उपाध्यक्ष की बार-बार होने वाली हिरासतकारी को भूल जाइए, ताज़ा बुरी ख़बर यह है कि एनडीटीवी-इंडिया पर भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक रोज़ का प्रतिबंध घोषित किया है।

मंत्रालय के आदेश के अनुसार उसकी एक उच्चस्तरीय समिति ने पठानकाट हमले के दौरान उक्त चैनल की रिपोर्टिंग को देश की सुरक्षा के लिए ख़तरे वाली क़रार दिया है। इसलिए सज़ा में चैनल को 9 नवम्बर को एक बजे से अगले रोज़ एक बजे तक चैनल का परदा सूना रखना होगा।

क्या अघोषित इमरजेंसी की पदचाप और मुखर नहीं हो रही? मुझे आशंका है कि आने वाले दौर में यह और तल्ख़ होगी अगर इसका एकजुट और विरोध न किया गया। देश की सुरक्षा ख़तरे में डालने के संगीन आरोप में किसी समाचार माध्यम पर ऐसा प्रतिबंध देश में पहले कभी नहीं लगाया गया है।

इसलिए मेरा सुझाव है कि 9 नवम्बर को, जब एनडीटीवी-इंडिया का परदा सरकारी आदेश में निष्क्रिय हो, देश के हर स्वतंत्रचेता चैनल और अख़बार को अपना परदा/पन्ना विरोध में काला छोड़ देना चाहिए।

एडिटर्स गिल्ड, प्रेस क्लब आदि संस्थाओं को उस रोज़ प्रतिरोध के आयोजन करने चाहिए – अगर अपना लोकतंत्र हमें बचा के रखना हो। वरना शासन का शिकंजा एनडीटीवी की जगह आगे अभिव्यक्ति के किसी और माध्यम पर होगा।

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  • Published: 1 year ago on November 4, 2016
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  • Last Modified: November 4, 2016 @ 5:27 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. साहित्यिक समाचार
    ———————
    राष्ट्रीय ख्याति के अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकें आमंत्रित
    ——————————————————————————-
    साहित्य सदन , भोपाल द्वारा राष्ट्रीय ख्याति के उन्नीसवे अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों हेतु साहित्य की अनेक विधाओं में पुस्तकें आमंत्रित की गई हैं । उपन्यास, कहानी, कविता, व्यंग, निबन्ध एवं बाल साहित्य विधाओं पर , प्रत्येक के लिये इक्कीस सौ रुपये राशि के पुरस्कार प्रदान किये जायेंगे । दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकों की दो प्रतियाँ , लेखक के दो छाया चित्र एवं प्रत्येक विधा की प्रविष्टि के साथ दो सौ रुपये प्रवेश शुल्क भेजना होगा । हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकों की मुद्रण अवधि 1जनवरी 2014 से लेकर 31 दिसम्बर 2015 के मध्य होना चाहिये । राष्ट्रीय ख्याति के इन प्रतिष्ठा पूर्ण चर्चित दिव्य पुरस्कारों हेतु प्राप्त पुस्तकों पर गुणवत्ता के क्रम में दूसरे स्थान पर आने वाली पुस्तकों को दिव्य प्रशस्ति -पत्रों से सम्मानित किया जायेगा । श्रेष्ठ साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादकों को भी दिव्य प्रशस्ति – पत्र प्रदान किये जायेंगे ।अन्य जानकारी हेतु मोबाइल नं. 09977782777, दूरभाष – 0755-2494777एवं ईमेल – [email protected] पर सम्पर्क किया जा सकता है । पुस्तकें भेजने का पता है – श्रीमती राजो किंजल्क , साहित्य सदन , 145-ए, सांईनाथ नगर , सी – सेक्टर , कोलार रोड, भोपाल- 462042 । पुस्तकें प्राप्त होने की अंतिम तिथि है 30 दिसम्बर 2016 । कृपया प्रेषित पुस्तकों पर पेन से कोई भी शब्द न लिखें ।
    ( जगदीश किंजल्क )
    संपादक : दिव्यालोक
    साहित्य सदन 145-ए, सांईनाथ नगर , सी- सेक्टर
    कोलार रोड , भोपाल ( मध्य प्रदेश ) -462042
    मोबा : 09977782777
    ईमेल: [email protected]

  2. Joshi says:

    राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यहां भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट के पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों की मूल पेंशन दिसंबर, 2015 की तुलना में 2.57 गुना बढ़ गयी है।

    पूर्व सैनिकों की मूल पेंशन 2.57 गुना बढ़ी: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
    राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यहां भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट के पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों की मूल पेंशन दिसंबर, 2015 की तुलना में 2.57 गुना बढ़ गयी है। सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर मुखर्जी ने भारत की सीमा की चौकसी करने वाले गोरखा सैनिकों के साहस एवं अनुशासन की सराहना की । नेपाल की तीन दिन की राजकीय यात्रा पर आए मुखर्जी अपनी यात्रा के आखिरी पड़ाव में यहां पूर्व गोरखा सैनिकों के पेंशन कार्यालय गए क्योंकि बड़ी संख्या में ये सैनिक सेवानिवृत्ति के बाद यहां रहते हैंं। धौलागिरि, मचापुचारे और अन्नपूर्णा शिखरों की गोद में स्थित विहंगम पोखरा घाटी भारतीय सेना की प्रख्यात गोरखा रेंजीमेंट के अनेक सैनिकों का निवास स्थान है। राष्ट्रपति का यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया । वह हवाईअड्डे से एक होटल पहुंचे और वहां थोड़ी देर ठहरने के बाद पेंशन कार्यालय गए। उनके रास्ते मेंं लोग पारंपरिक वेशभूषा पहनकर और भारत तथा नेपाल के झंडे लेकर उनके स्वागत में खडे थे।

    मुखर्जी ने कहा, ‘‘सातवें वेतन आयोग के अनुसार 31 दिसंबर, 2015 की मूल पेंशन की तुलना में वन रैंक वन पेंशन योजना के तहत मूल पेंशन 2.57 गुना बढ़ गयी है। ’’
    उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षाबलों का सर्वोच्च कमांडर होने के नाते उनके लिए बड़े संतोष एवं गर्व की बात है कि नेपाल में पूर्व सैनिकों की सभी कल्याणकारी योजनाएं समय से लागू की जा रही हैं। भारतीय सेना में 32,000 गोरखा सैनिक एवं 1.26 लाख पूर्व गोरखा सैनिक हैं। भारत पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए सभी संभव कदम उठाने में कभी संकोच नहीं करेगा।

  3. Joshi says:

    शर्म करो क्यों पत्रकारिता के नाम पर देश की अश्मिता और शुरक्षा से खेलना चाहते हो आप एक बात तय है आप जैसे पत्रकारों की बात में अब देश नहीं आने वाला है तुम्हारी हकीकत देश की जनता जानती है,जब नीरा राडिया कांड हुआ था किस पत्रकार ने या आपने बरखा दत्त का बहिष्कार किया , नहीं किया ना सेक्युलरता की आड़ लेकर राष्ट्र को मत बर्बाद करो बर्ना वो दिन दूर नहीं जब ISIS के लोग आपसे गुलामी करवाएंगे और आने वाली पीढ़ी आपको लानत देगी

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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