/विध्वंस के स्तूप बनाते मोदीजी..

विध्वंस के स्तूप बनाते मोदीजी..

-जगदीश्वर चतुर्वेदी॥

पीएम मोदी की विशेषता है जो कहते हैं उससे एकदम उलटा आचरण करते हैं,नोटबंदी उनकी इसी खासियत का परिणाम है।पहले वायदा किया था कि पांच सौ और हजार के नोट 30दिसम्बर तक बदले जा सकेंगे, लेकिन आज सरकार ने घोषणा की है कि पुराने नोट अब बदले नहीं जाएंगे।इसी तरह पहले कहा करते थे संसद सर्वोच्च है अब कहते हैं ट्विटर और एप सर्वोच्च हैं ! नोट नीति के पक्ष में उन्होंने जो सर्वे किया है उसमें करोड़ों पीड़ित किसानों की राय शामिल नहीं है। सवाल है ये पाँच लाख कौन हैं जो जनता के कष्ट को सही मान रहे हैं?unnamed-1

जनता की तकलीफ़ों को जायज ठहराने की मोदी एप सर्वे ने जो कोशिश की है उससे एक बात साफ़ है कि यह सर्वे तयशुदा ढंग से तैयार किया गया है। यह जनता की नेचुरल राय का प्रतिनिधित्व नहीं करता। इस सर्वे का लक्ष्य है नोटबंदी के फैसले में निहित संविधानविरोधी फैसले को छिपाना और मोदी के नोटबंदी के फासिस्ट और संविधान विरोधी फैसले को वैध ठहराना।मोदी एप सर्वे में वे ही लोग शामिल हैं जो स्मार्टफ़ोन वाले हैं। देश की अधिकांश जनता के पास न स्मार्टफ़ोन हैं और न इंटरनेट है। करोड़ों दैनिक मज़ूरी करने वालों की राय का इस सर्वे से कोई लेना देना नहीं है। नोटबंदी से यह वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित है।
कालेधन और नोटबंदी पर अर्थशास्त्रियों की राय महत्वपूर्ण होगी लेकिन इसबार कहा जा रहा है संसद नहीं, अर्थशास्त्री नहीं, राजनीतिक दल नहीं, सिर्फ भाजपा,सिर्फ पाँच लाख मोदी यूजर तय करेंगे कि मोदी की नोट नीति सही है। मोदीभक्तों को जवाब देना चाहिए कि भाजपा करोड़ों सदस्यों वाला दल है उसमें से मात्र पाँच लाख लोग ही मोदी एप में वोट देने क्यों आए ? करोड़ों मोदी भक्त कहाँ हैं ? क्या मोदी एप के सर्वे का भाजपा सदस्यों ने बहिष्कार किया है? दिलचस्प बात है जो अर्थशास्त्र नहीं जानते, नोट नीति के बारे में नहीं जानते , वे बता रहे हैं नोटबंदी सही है, मोदी एप सर्वे की धुरी इसी तरह के लोग हैं।
संसद में पूर्ण बहुमत होने के बाद भी नोटबंदी का प्रस्ताव संसद में पेश करने से मोदी सरकार क्यों भाग रही है? मोदीजी क्यों डरे हुए हैं? मात्र पाँच लाख लोगों ने मोदी एप पर नोटबंदी पर पीएम के सर्वे का जवाब दिया। 125 करोड़ की आबादी में मात्र इतने कम लोगों के प्राथमिकतौर पर रिएक्शन सामने आए हैं। करोड़ों रूपये सोशलमीडिया पर ख़र्च करने बाद मात्र पाँच लाख लोगों ने सर्वे में भाग लिया है। इससे मोदी की इंटरनेट जनता पर बहुत कम लोगों तक पकड़ का अंदाज़ा लगता है।मात्र पाँच लाख लोग मोदी नीति के पक्ष में बोले हैं।बाकी जनता जो चुप है वह साथ नहीं है।
नोटबंदी के कारण अब तक 75 से ज्यादा लोग मारे गए हैं,इनमें 17लोग अस्पताल में पुराने नोट न लेने और इलाज के अभाव में मारे गए हैं।८नवम्बर के बाद पुराने नोट नहीं लिए जा रहे, खासकर निजी अस्पताल में पुराने नोट नहीं लिए जा रहे हैं।सवाल यह है सरकार ने पुराने नोटों को सरकारी अस्पताल में वैध रखा लेकिन निजी अस्पताल में वैध क्यों नहीं रखा ?
हम माँग करते हैं कि जिन लोगों के पास आधारकार्ड और जनधन खाता है और राशन ख़रीदने के पैसे नहीं हैं उनको केन्द्र सरकार गेहूँ,आटा, दाल, तेल और सब्ज़ी उधार दे । नोट नीति की तबाही थमने वाली नहीं है।इसके अलावा जिसके पास आधार कार्ड और जनधन खाता है उसे सरकारी और निजी अस्पताल में मुफ्त दवा और इलाज की सुविधा दी जाय ।
रिजर्व बैंक ने संविधान प्रदत्त अधिकारों , स्वायत्तता और जवाबदेही का जिस तरह त्याग किया है और रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने जिस तरह की गैर ज़िम्मेदाराना और संविधानविरोधी भूमिका अदा की है उसका हर स्तर पर प्रतिवाद होना चाहिए, साथ ही पीएम की नोटबंदी के असंवैधानिक निर्णय का भी प्रतिवाद होना चाहिए। आज बैंक कर्मचारी सबसे ज्यादा संकट में घिरे हैं। अब बैंक कर्मचारियों को संघर्ष का एलान करना चाहिए और साफ कहना चाहिए कि उनको अकारण असंवैधानिक और जनविरोधी नोट नीति का अंग बना दिया गया है।

आप जरा बैंक कर्मचारियों की मुश्किलों और बैंकिंग व्यवस्था के बारे में सोचें नोट नीति के कारण विगत दस दिनों से बैंकों का सारा कारोबार ठप्प पड़ा है। फिलहाल बैंक रूपये लेने देने के काम में लगे हैं।बैंकों की आमदनी ठप्प पड़ी है, कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। कर्मचारी बेहद तनाव में काम कर रहे हैं।बैंकों के समूचे कामकाज के ठप्प हो जाने से प्रतिदिन कितने हजार रूपये की क्षति हो रही है ? विगत दस दिनों से जो काम बंद पड़े हैं उस बक़ाया काम को समाप्त करने में बैंक कर्मचारियों को कितने हजार घंटे काम करना पड़ेगा ?यही हालात यदि कुछ सप्ताह और रहते हैं तो बैंक कर्मचारी शारीरिक तौर पर भयानक दवाब में आ जाएंगे।
फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड ऐंड इंडस्ट्रीम (फोर्टी) का मानना है नोटबंदी से राजस्थान में आगामी दो माह में करीब एक लाख करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होगा, समाचार पत्रों, सोशल मीडिया आदि के जरिये भ्रांति व भय के माहौल में व्यापारी वर्ग डरा हुआ है तथा मजदूर वर्ग को रोजगार की उपलब्धता के बावजूद भी आर्थिक तंगी का सामना करना पड रहा है। फोर्टी ने प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को कल सौंपा है जिसमें प्रधानमंत्री से व्यापार व उद्योग जगत के साथ-साथ आमजन को राहत पहुंचाने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि नोट बंदी के कारण विनिर्माण क्षेत्र और खुदरा क्षेत्र में बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। मजदूरों को मजदूरी का भुगतान करने के लिए पर्याप्तस नकदी उपलब्ध नहीं होने के कारण उत्पादन पर भी असर पडा है।

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.