कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

कटनी के हवालाकाण्ड ने शिवराज को फिर कटघरे में खड़ा किया..

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

मध्यप्रदेश के कटनी जिले के हवाला कारोबार के खुलासे ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है. यह ठीक वैसे ही सुर्खियां बन रहा है, जैसा कभी डंपर कांड, व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) कांड बने थे और कई बड़े लोगों पर इन मामलों की आंच आई थी.

लेकिन इन सभी मामलों में उन लोगों को सजा नहीं मिली जिन पर राजनीतिक हमले हुए थे या जिनका रसूख था. कटनी का हवाला कांड तो शुरुआत में ही उस दिशा में बढ़ता नजर आने लगा है, जहां डंपर और व्यापमं पहुंचे हैं.

कटनी में हुए लगभग 500 करोड़ रुपए के हवाला कारोबार का खुलासा करने वाले पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी का तबादला होने के बाद आए नए पुलिस अधीक्षक शशिकांत शुक्ला ने पदभार संभालने के बाद संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा, “अभी सिर्फ प्रकरण दर्ज हुआ है मामले की जांच होना बाकी है और लोगों पर आरोप लगाए जाने लगे हैं, दोषी ठहराया जाने लगा है, लिहाजा जांच होने पर ही हकीकत सामने आएगी.”

वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा हवाला मामले की जांच में पुलिस के सक्षम न होने की बात कही और फिर तिवारी को अच्छा तथा शुक्ला को बहुत अच्छा पुलिस अफसर बताया है. हवाला मामले में सामने आए यह बयान आगामी दिनों में होने वाली संभावित कार्रवाई की ओर इशारा करने के लिए काफी है.

यहां बताना लाजिमी होगा कि गौरव तिवारी ने कटनी का पुलिस अधीक्षक रहते हुए हवाला मामले की जांच के लिए पुलिस की एसआईटी बनाई, इस एसआईटी ने कई फर्जी खातों का खुलासा करते हुए हवाला कारोबारी सरावगी बंधु के कर्मचारी संदीप बर्मन को गिरफ्तार भी किया और बड़ी मात्रा में दस्तावेज भी बरामद किए. वे लोग भी सामने आए है, जिनके नाम पर बैंक में फर्जी खाते खोलकर करोड़ो रुपयों का लेन-देन हुआ.

इतना ही नहीं सरावगी के साथ राज्य के मंत्री संजय पाठक की एक तस्वीर भी सामने आई. इसी बीच तिवारी का छिंदवाड़ा तबादला कर मुख्यमंत्री की सुरक्षा में अरसे तक तैनात रहे शशिकांत शुक्ला को कटनी का पुलिस अधीक्षक बनाया गया है.

शुक्ला की पदस्थापना पर सवाल उठे, तो मुख्यमंत्री चौहान ने सफाई दी, “हमें मध्यप्रदेश की पुलिस पर गर्व है, शुक्ला बहुत अच्छे अफसर हैं और उनकी ईमानदारी व निष्ठा पर कभी संदेह नहीं रहा.”

तिवारी के तबादले को जहां राजनीतिक दबाव में किया जाना माना जा रहा है और कटनी के लोग आंदोलन भी कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार इसे सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई करार दे रही है. मगर सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश को दरकिनार किया गया है, जिसमें कहा गया है कि आईएएस और आईपीएस का दो वर्ष से पहले तबादला न किया जाए, अगर तबादला आवश्यक हो तो कारण बताया जाए. तिवारी को महज छह माह में कटनी से हटाया गया और कोई कारण भी नहीं बताया गया है.

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री और उनकी सरकार हवाला कारोबार से जुड़े लोगों को बचाने में लगी है, वे एक ईमानदार अफसर को हटाकर बेइमानों के रहनुमा बने हैं. मुख्यमंत्री का यह रवैया जनभावनाओं को आहत करने वाला है और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वालों को हतोत्साहित करने वाला है.

शिवराज के 11 वर्ष के मुख्यमंत्रित्व काल में कटनी का हवाला कांड तीसरा ऐसा मामला है, जिससे सीधे तौर पर उनकी छवि पर आंच आने की आशंका बनी है. इससे पहले वर्ष 2007 में डंपर कांड सामने आया था, जिसमें मुख्यमंत्री की पत्नी साधना सिंह के नाम पर एक निर्माण कंपनी में डंपर लगाए जाने के आरोप लगे थे. आरोप था कि दस्तावेज गलत लगाए गए हैं, इस मामले पर न्यायालय के निर्देश पर लोकायुक्त ने जांच की और वर्ष 2010 में मुख्यमंत्री को क्लीनचिट मिल गई.

डंपर के बाद बड़ा मामला व्यापमं का आया. मुख्यमंत्री, उनके परिवार, मंत्रिमंडल के सदस्यों व अफसरों पर सीधे उंगली उठी. इसकी जांच के लिए पुलिस की एसटीएफ बनी, तत्कालीन मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा सहित कई अन्य लोग गिरफ्तार हुए. फिर उच्च न्यायालय के निर्देश पर एसआईटी बनी. उसके बाद मामला की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई.

व्यापमं वह मामला है, जिसमें नौ जुलाई 2015 को सीबीआई को सौंपे जाने से पहले तक जांच कर रही एसटीएफ ने व्यापमं घोटाले में कुल 55 प्रकरण दर्ज किए गए थे. 2100 आरोपियों की गिरफ्तारी की और 491 आरोपी अब भी फरार है. इस जांच के दौरान 50 लोगों की मौत हो चुकी है. इस मामले की जांच एसआईटी के बाद सीबीआई को सौंपी गई. अभी तक ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जो इतने बड़े घोटाले की गंभीरता को साबित करने वाला हो.

कटनी हवाला मामले के खुलासे के बाद जांच कर रहे अफसर का तबादला, मुख्यमंत्री चौहान और नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक का आया बयान बहुत कुछ बयां करने वाला है. अब देखना होगा कि गरीबों के फर्जी खातों के जरिए करोड़ों रुपयों का लेन-देन करने वाले पुलिस की गिरफ्त में कब आते हैं या गरीब ही आयकर विभाग के निशाने पर आते हैं और फिर जांच के दौरान मध्य प्रदेश की रीति के हिसाब से मरते भी हैं.
(जनता जनार्दन)

Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
Share.

About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: