/ढोलकल की ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा की चोरी में हो सकता है कल्लुरी का हाथ..

ढोलकल की ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा की चोरी में हो सकता है कल्लुरी का हाथ..

सरकारी हेलीकॉप्टर के दुरूपयोग की आशंका..

-कमल शुक्ला॥

ढोलकल की ऐतिहासिक नागकालीन गणेश जी की मूर्ति के चोरी होने की खबर है । इस मामले में बस्तर पुलिस के कुख्यात अधिकारी कल्लुरी की संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है । ढोलकल के आस-पास के कई गांवों के ग्रामीणों ने पत्रकारों को बताया है कि पिछले कुछ दिनों से एक हेलीकॉप्टर इस पहाड़ी के आस-पास लगातार चक्कर लगा रहा था । साथ ही नक्सली उन्मूलन के नामपर भारी संख्या में डीआरजी और एसपीओ के जवान लगातार बने हुए थे ।
ज्ञात हो कि बस्तर के आईजी शिवराम प्रसाद कल्लुरी को नक्सल उन्मूलन के नामपर सरकारी हेलीकॉप्टर के निजी इस्तेमाल की छूट मिली हुई है । पिछले दिनों मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बाद उनके सामने पेश होने के बजाय इसी हेलीकॉप्टर से ये प्रदेश के सारे सुविधा सम्पन्न हॉस्पिटल की उपेक्षाकर अपने गृह प्रदेश में विशाखापट्नम स्थित एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती हो गए थे। उस समय भी उनपर सोशल मीडिया में कई लोगों ने अपना करोड़ों का कालाधन इस हेलीकॉप्टर के जरिये  ठिकाने लगाने का आरोप लगाया था । ज्ञात हो कि हाल में ही भाकपा नेता मनीष कुंजाम ने उनपर अवैध माईनिंग के कारोबार में संलिप्तता और कारोबारियों – अधिकारियों से अवैध वसूली का आरोप लगाया था ।

50 हजार से अधिक जवानों को केवल नक्सल उन्मूलन के नाम पर जंगल जंगल थका कर जहाँ अभी तक नक्सलियों का सफाया करने में भी असफल रहे वहीँ पूरे बस्तर में चोरी और अन्य वारदातों में तेजी आई है । दंतेवाड़ा में थाना से मात्र सौ मीटर की दूरी पर सैकड़ों सुरक्षा कर्मियों की मौजदगी में दन्तेश्वरी मंदिर में चोरी होना और नक्सल मामलों को छोड़ बाकी अपराधों में अधूरी विवेचना बस्तर पुलिस की भूमिका को संदिग्ध बनाती है । कई समाजसेवियों ने कल्लुरी पर पहले भी आरोप लगाया है कि वे नक्सल उन्मूलन के नाम पर तरह तरह के संगठन बनाकर चोरी , गुंडागर्दी के आरोपियों और अवैध कारोबार करने वालों को उनके पदाधिकारी बनाकर बस्तर के आदिवासियों और उनके लिए आवाज उठाने वालों को डराने धमकाने का काम करते रहे हैं ।
देश के सुप्रीमकोर्ट , मानवाधिकार आयोग , महिला आयोग और विभागीय जांच सहित कई अंतराष्ट्रीय संगठनों की उनके खिलाफ जांच रिपोर्ट और टिप्पणी के बाद भी उन्हें बस्तर से नहीं हटाने को लेकर भी उनके करोड़ों के अवैध कारोबार में ऊपर स्तर पर संलिप्तता का संदेह होता है ।
ढोलकल की गणेश की मूर्ति न केवल बस्तर के ऐतिहासिक महत्व की थी बल्कि इसकी कीमत भी अतंराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों की है । जिस दुर्गम रास्ते से इस तक पहुंचना मुश्किल था , वहां से टनो वजनी मूर्ति को नीचे उतार कर गायब करना किसी बड़े ग्रुप जो जंगल और पहाड़ का अनुभव रखते हों , की ही हो सकती है । ध्यान रहे कि कल्लुरी ने सैकड़ों हत्यारे और अपराधी नक्सलियों को समर्पण करा उन्हें फ़ोर्स में भी शामिल करा लिया है । बहुत संभव हो कि यह ऐसे ही लोगों का काम हो । हेलीकॉप्टर से रस्सी फंसाकर भी गायब किया गया हो सकता है । अगर इस मामले में ग्रामीणों का बयान सच है तो बिना कल्लुरी की भागीदारी के इस मूर्ति की चोरी सम्भव प्रतीत नहीं होती । निष्पक्ष जांच से सही जानकारी सामने आएगी , पर यह होगी कैसे ? कल्लुरी के खिलाफ तो पुलिस के बड़े अफसरों की छोड़े , प्रदेश के मुखिया रमन सिंह की भी कार्यवाही की हिम्मत नहीं है ।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.