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प्रधानमंत्री के घर और निजता से संबंधित ये कैसी खबर.?

By   /  February 24, 2017  /  No Comments

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इस बार के “शुक्रवार” (24 फरवरी – 02 मार्च 2017) में एक गंभीर खबर है। पहले पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित इस खबर का शीर्षक है, “फिर विवादों में घिरी एसपीजी” लेकिन यह प्रधानमंत्री निवास से संबंधित विवाद खड़ा कर रही है। खबर के मुताबिक एसपीजी की महिला सुरक्षा कर्मियों ने अपने आला अफसरों से गुहार लगाई है कि उन्हें रात की ड्यूटी पर न रखा जाए।
यहां यह गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के घर में परिवार की कोई महिला सदस्य नहीं रहती है। आम जानकारी यही है कि प्रधानमंत्री अपने घर पर अकेले रहते हैं। ऐसे में भारतीय संस्कारों के लिहाज से महिला सुरक्षा कर्मियों की रात की ड्यूटी लगनी ही नहीं चाहिए। उन्हें अधिकारियों से गुहार लगाने की आवश्यकता ही क्यों पड़े? यही नहीं, खबर में आगे कहा गया है, “माना जा रहा है कि वे किसी विवाद का साक्षी बनना नहीं चाहती हैं।” यह और गंभीर है।
खबर में (टाइपिंग की कुछ गड़बड़ी है) कहा गया है कि एसपीजी के तत्कालीन निदेशक दुर्गा प्रसाद को हटा दिया गया था। हटाने की कोई वजह नहीं बताई गई थी। हालांकि जिस तरह से यह कार्रवाई की गई थी उसमें तमाम अटकलों को बल मिला था। इनमें एक अटकल यह भी थी कि दुर्गा प्रसाद चाहते थे कि प्रधानमंत्री से जो भी मिलने आए उसे कैमरों के सामने से गुजरना पड़े और उसका पूरा रिकार्ड रखा जाए। इसमें कोई बुराई नहीं है और यह जरूरी भी लगता है। पर उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी (और पद से हटा दिया गया)। खबर में यह नहीं लिखा है कि दुर्गाप्रसाद के बाद कौन निदेशक हैं और अब क्या होता है। ना ही अभी के निदेशक से कोई बातचीत की गई है।
खबर में आगे लिखा है, अब यह अफवाह जोर पकड़ रही है कि प्रधानमंत्री नहीं चाहते हैं कि उनके निवास में लगे कैमरे कमरों के अंदर नजर रखें। इसमें कोई बुराई नहीं है। अगर प्रधानमंत्री नहीं चाहते हैं तो शयन कक्षों में कैमरे नहीं होने चाहिए और दरवाजे तक को कैमरे की नजर में लाकर अंदर छोड़ा जा सकता है और इसपर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। पर विवाद हैं औऱ महिलाएं रात में ड्यूटी करना नहीं चाहती हैं – सबको जोड़ कर देखिए तो एक बड़ी खबर बनती है। अगर अधिकृत खबर नहीं छपी तो तरह-तरह की अफवाहें उड़ती रह सकती हैं और प्रधानमंत्री के घर के बारे में ऐसी खबरें, जैसे अंदर जाने वालों के लिए कैमरा नहीं है – सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की फेसबुक वॉल से..

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  • Published: 3 years ago on February 24, 2017
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  • Last Modified: February 24, 2017 @ 4:17 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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