/उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के CBI जाँच के पात्र कुछ बड़े घोटाले..

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के CBI जाँच के पात्र कुछ बड़े घोटाले..

IAS सूर्य प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश में प्रमुख पदों पर रहे हैं और विभिन्न सरकारों के काम को ही नहीं बल्कि सरकार में बैठ कर सरकारी खजाने को चूना लगते भी बहुत करीब से देखा है.. सूर्य प्रताप सिंह इन दिनों फेसबुक पर रोज कुछ न कुछ ऐसे घपले घोटाले खोल रहे हैं.. याद रहे यह घोटाले कोई पत्रकार या राजनेता नहीं बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी खोल रहा है.. इन्होंने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में 38 ऐसे घोटालों का जिक्र किया है जिनकी जांच यदि CBI करे तो उत्तरप्रदेश की राजनीति के दिग्गज जेल की सलाखों के पीछे नज़र आएं.. हमने उनकी यह पोस्ट बिना किसी सम्पादन और संशोधन, जस की तस यहां प्रकाशित कर दी हैं-मॉडरेटर

 

-सूर्य प्रताप सिंह॥

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के CBI जाँच के पात्र कुछ बड़े घोटाले..

1. रु. २.०० लाख करोड़ के बृहत् घोटाले-नॉएडा/ग्रेटर नॉएडा/ यमुना इक्स्प्रेस्वे अथॉरिटी/UDSIDC /GDA/LDA विकास प्राधिकरणों/ आवास विकास परिषद के पिछले १० वर्षों के भूमि आवंटन,एफ़एआर परिवर्तन, ब्याज माफ़ी,भू उपयोग परिवर्तन, ठेके, टेंडर, संस्थानों को सस्ती भूमि देना, मेट्रो , १करोड़ से बड़े निर्माण कार्य, नॉएडा इक्स्टेन्शन व बड़े बिल्डर्ज़ के नक़्शे पास करने में अनियमिततायें, ग्रीन बेल्ट पर क़ब्ज़े, भू अधिग्रहण व मुआवज़े वितरण, इन्स्टिटूशनल ऋण आदि में हुए भ्रष्टाचार के बड़े मुद्दे।
2. रु. ३०,००० करोड़ का लखनऊ-आगरा इक्स्प्रेस्वे का भ्रष्टाचार
3. रु. १५५० करोड़ का गोमती रिवर फ़्रंट प्रोजेक्ट घोटाले
4. चीनी मिलों की बिक्री व चीनी मिल संघ में भर्ती घोटाला, शीरा व बगास क्रय/विक्रय
5. UPPSC व अन्य भर्ती आयोगों के घोटाले
6. रु. ७०० करोड़ का मिडडे मील/पंजीरी ठेका
7. रु. १६००० करोड़ प्रति वर्ष के शराब के ठेके
8. रु. ५०,००० करोड़ का खनन का भ्रष्टाचार
9. रु. २५,००० करोड़ के मंडी समिति के निर्माण कार्य
10. रु. ५,००० करोड़ का नक़ल का धंधा, बोर्ड द्वारा द्वारा करायी प्रंटिंग, किताब व अन्य ख़रीदारी, सर्व शिक्षा अभियान के निर्माण कार्य, लैप्टॉप ख़रीद,
11. समाज कल्याण विभाग का छात्रवृत्ति घोटाला
12. रु. ५०,००० करोड़ के आवास विभाग द्वारा बड़े बिल्डर्ज़ को किए गए भूमि आवंटन व बिल्डर्ज़ की अनियमित्ताएँ
13. पिछले १० वर्ष के २.०० लाख करोड़ के बिजली विभाग में ख़रीदारी व निर्माण कार्यों की जाँच
14. रु. २५,००० करोड़ PWD/सिंचाई/लघु सिंचाई विभागों के निर्माण कार्य
15. पंचायती राज विभाग के निर्माण कार्य
16. रु. ५०,००० करोड़ के चिकित्सा विभाग/NHRM में पुनः हुए घोटाले-दवा व उपकरण ख़रीद, ऐम्ब्युलन्स सेवा, बिल्डिंग निर्माणआदि
17. फ़र्ज़ी वृक्षारोपण घोटाला
18. सचिवालय में स्टेशनेरी ख़रीद घोटाला
19. रोडवेज़ बस ख़रीद घोटाला, परिवहन विभाग का ओवर्लोडिंग घोटाले-टोकन सिस्टम
20. फ़िल्म निर्माण अनुदान घोटाला
21. निर्माण एजेंसियों-राजकीय निर्माण निगम, ब्रिज कॉर्परेशन,RES,PWD, सहकारी संघ,समाज कल्याण निगम,जल निगम/जल संस्थान के द्वारा निर्माण कार्यों जे गुणवत्ता की जाँच
22. Outsourcing के माध्यम से की जा रही भर्तियाँ
23. प्रदेश में विभिन्न दरों पर साइकल ट्रैक निर्माण
24. ग़ाज़ियाबाद में हज हाउस निर्माण
25. मनेरेगा फ़र्ज़ी मस्टर रोल घोटाला
26. नयीं नहरों/डेम के निर्माण/सफ़ाई घोटाला
27. लघु सिंचाई का चेक डेम घोटाला
28. कृषि बीज ख़रीदारी
29. नए विमान ख़रीद
30. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी clearances
31. पशुधन विभाग की भर्तियाँ
32. सहकारिता विभाग व बैंक की भर्ती व ऋण वितरण
33. सरकारी भवनों पर क़ब्ज़े व आवंटन
34. पूरे प्रदेश में सरकारी व ग़ैर सरकारी जमीनो पर सपा के गुंडों द्वारा किए गए क़ब्ज़े
35. पूरे प्रदेश में ग़ायब हुए हज़ारों बच्चे व महिलाएँ
36. सांसद व विधायक निधि व सरकार द्वारा से प्राइवेट संस्थाओं को दिया गया धन-अमानत में खयानत के घोटाले।
37. रु. ८६० करोड़ का जय प्रकाश नारायण अन्तराष्ट्रीय केन्द्र(जेपी सेन्टर), चक गंजरिया सिटी, जनेश्वर मिश्र पार्क तथा पुराने लखनऊ के सुन्दरीकरण के घोटाले
38. सैफ़ई गाँव के लगभग रु. २०,००० करोड़ के कार्य
जाँच होने से कई बड़े लोग-नेता/नौकरशाह जेल जाएँगे ….मुलायम/मायावती/अखिलेश/यादव परिवार के लोग जेल जाएँ तो जनता को राहत मिले …..विश्वास क़ायम हो !!!

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.