/नये मुख्य निर्वाचन आयुक्त फ़ौरी तौर पर देश को भरोसा दिलाने में कामयाब..

नये मुख्य निर्वाचन आयुक्त फ़ौरी तौर पर देश को भरोसा दिलाने में कामयाब..

-उर्मिलेश उर्मिल॥

निहायत एरोगेंट, आरामतलब और मुद्रा-लोभियों से भरी पार्टी में आज भी कोई शक्ति सिंह गोहिल बचा हुआ है! लंबा सिलसिला है। पर यह व्यक्ति गुजरात में लगातार जूझता रहा, न बिका और न टूटा! अपनी पीठ आप ठोंकने वाले तो अब बहुत होंगे लेकिन 8 अगस्त की रात की असल लड़ाई और दौलत व ताकत के गठबंधन के पर्दाफाश का बड़ा श्रेय गोहिल को जाता है।

अगर कांग्रेस आज सिमटती नजर आ रही है और यदा-कदा उसके फिर से उठकर खड़ा होने की संभावना दिखती है तो इसलिए कि उसमें शक्ति सिंह गोहिल इक्का दुक्का बचे हुए हैं।

आज की रात, अहमद पटेल की चुनावी जीत के ऐलान के साथ एक और पहलू जुड़ा है। नये मुख्य निर्वाचन आयुक्त फ़ौरी तौर पर देश को भरोसा दिलाने में कामयाब रहे कि वह भले ही गुजरात के पूर्व मुख्य सचिव (जब मौजूदा प्रधानमंत्री जी राज्य के मुख्यमंत्री थे!)क्यों न रहे हों, आयोग को दबाव-मुक्त रखेंगे।

इस चुनाव का तीसरा पहलू है: गांधीनगर स्थित मतगणना केन्द्र के सामने सत्ताधारी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्य के मुख्यमंत्री और तमाम बड़े नेताओं का देर रात तक अड्डा मारकर बैठना और यहां दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के समक्ष सरकारी दल और मुख्य विपक्षी दल का अपने बड़े नेताओं के साथ डेलीगेशन लेकर तीन-तीन बार जाना। बीच-बीच में भाजपाइयों का लड्डू बांटना! आयोग का फैसला आते ही लड्डू पैकेटों का अचानक गायब हो जाना! उत्तेजना भरे दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम की टीवी पर ये लाइव तसवीरें लोगों को बार-बार याद आयेंगी!

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.