/क्या महबूबा ने सचमुच की थी मोदी की तारीफ? उमर के ट्वीट पर सुषमा का ट्वीट-ट्वीट

क्या महबूबा ने सचमुच की थी मोदी की तारीफ? उमर के ट्वीट पर सुषमा का ट्वीट-ट्वीट

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के उपवास के बाद अब उनपर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद में बयानबाजी टीवी या अखबारों में नहीं बल्कि सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर चल रही है। ताज़ा विवाद बीजेपी की वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता, विपक्ष सुषमा स्वराज के एक बयान को लेकर उठा है, जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर की विपक्षी पार्टी पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती के हवाले से मोदी और गुजरात सरकार के कामकाज की तारीफ की थी।

दरअसल, सुषमा ने सोमवार को मोदी के उपवास खत्म करने से ठीक पहले अपने भाषण में कहा था कि 10 सितंबर को राष्‍ट्रीय एकता परिषद की बैठक में पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती के एक मुस्लिम मित्र ने गुजरात में उद्योग लगाने के लिए नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा और उन्हें तत्काल समय मिल गया। बकौल सुषमा मुफ्ती के मित्र को तब आश्चर्य हुआ जब वे मोदी से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे। दफ्तर में उन्होंने देखा कि मोदी सभी संबंधित अफसरों के साथ बैठे हुए हैं। आधे घंटे की चर्चा के बाद उन्‍हें उद्योग लगाने की इजाजत मिल गई और आज वह उद्योग लगा रहे हैं।’ सुषमा ने कहा था कि उनकी धुर विरोधी पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने भरी मीटिंग में यह बात कही थी।

सुषमा के इस बयान पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर महबूबा मुफ्ती की आलोचना की है। ट्विटर पर अपनी टिप्पणी में उमर ने लिखा है, ”मुझे इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं है कि महबूबा मुफ्ती ने मोदी की तारीफ की। वह जिसकी चाहें तारीफ कर सकती हैं। मुझे इस बात पर आश्चर्य होगा कि वह तब भी अपने बयान से इनकार करेंगी जब वे जानती हैं कि दूसरों ने उन्हें ऐसा कहते हुए सुना है। बजाय इनकार करने के उन्होंने जो कहा है, वह उसे मान क्यों नहीं लेतीं? सुषमा स्वराज को झूठा कहने से ज़्यादा अच्छा है कि मुफ्ती यह मान लें। कम से कम उनके पिता के पास इतनी समझ थी कि उन्होंने गृह मंत्री के तौर पर लालू प्रसाद यादव को फोन करके आडवाणी को रिहा किए जाने का निर्देश देने की बात स्वीकार की थी। उन्होंने वही किया था जो शुतुरमुर्ग करते हैं।”

इस आलोचना से परेशान महबूबा मुफ्ती सामने आ गई हैं और उन्होंने कहा है कि यह बिल्‍कुल गलत बात है। उनके मुताबिक, ”मैंने कभी नरेंद्र मोदी की तारीफ नहीं की। कभी कोई ऐसी बात नहीं कही। मुझे बहुत अफसोस है कि सुषमा स्वराज ने मुझे ‘मिसकोट’ किया। पता नहीं क्‍यों? मैं अपील करती हूं कि भारत सरकार मेरे भाषण का पूरा रिकॉर्ड रिलीज करे।’ महबूबा की पार्टी पीडीपी की वेबसाइट पर उपलब्ध उनके बयान में भी ऐसी किसी बात का जिक्र नहीं है।

उमर ने आज किए गए ट्वीट में लिखा, ”महबूबा मुफ्ती जी, मैंने कभी इस बात से इनकार नहीं किया है मैं एनडीए का हिस्सा रहा हूं। लेकिन मैंने यह भी कहा है कि यह मेरी गलती थी। मुझे इसका अफसोस है। मैं ऐसी गलती कभी नहीं दोहराऊंगा और न ही अपनी पार्टी को ऐसा करने दूंगा। कम से कम मेरे पास इतनी हिम्मत थी कि मैंने अपनी गलती मानी। आपके पास इतना साहस क्यों नहीं है कि आप इस बात को मान लें कि आपने मोदी की तारीफ की है, जिसे हर किसी ने सुना है।”

वहीं, सुषमा स्वराज ने विवाद पर सफाई देते हुए ट्विटर पर टिप्पणी की है, ”मैंने कल महबूबा मुफ्ती के हवाले से बिल्कुल सही बयान सामने रखा। वह निजी बातचीत नहीं थी। मैंने वही कहा जो उन्होंने सैंकड़ों लोगों की मौजूदगी में 10 सितंबर को राष्ट्रीय एकता परिषद के कार्यक्रम में दोपहर बाद कहा था।”

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.