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मीडिया को मुफ्तखोर-दारूबाज बताने वाले BJP के इस विज्ञापन पर क्‍या मानहानि बनती है?

By   /  November 2, 2017  /  No Comments

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गुजरात के चुनाव प्रचार अभियान के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक वीडियो विज्ञापन जारी किया है। करीब चार मिनट लंबे इस विज्ञापन में एक सैलून में कुछ लोगों को बैठा दिखाया गया है। उनमें एक पत्रकार भी है जो दाढ़ी बनवा रहा है और नरेंद्र मोदी व केंद्र सरकार की आलोचना कर रहा है। वहीं बैठा एक तीसरा शख्‍स जो अब तक चुपचाप अख़बार पढ़ रहा था, अचानक उठ कर प्रतिवाद शुरू करता है।

यह शख्‍स विज्ञापन के अंत में अपना नाम विकास बताता है। वीडियो में 1.28 मिनट पर पत्रकारों को यह शख्‍स खुलेआम गाली देते हुए कहता है, ”ये पीएम मोदी एकदम बेकार है… मीडियावालों को कॉकटेल पार्टी नहीं देता… रिपोर्टरों को फॉरेन ट्रिप पर नहीं ले जाता।” यह बात कहते हुए व्‍यक्ति रिपोर्टर के ठीक पीछे उसके कंधे पर हाथ रखकर खड़ा रहता है और रिपोर्टर हतप्रभ है।

थोड़ी देर बाद वह पत्रकार के कंधे पर हाथ रखकर व्‍यंग्‍य करता है, ”अरे भाई, आप तो रिपोर्टर लग रहे हो। ज़रा समझाइए इनको…।”

अपने भाषण में यह व्‍यक्ति नाम लेकर लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह और सोनिया गांधी के बारे में कहता है कि ये तीनों अपने-अपने बच्‍चों को ”सेट” करने में लगे हैं।

लगातार तीन मिनट तक बोलने के बाद पत्रकार इस व्‍यक्ति से प्रभावित होकर इसका नाम और नंबर पूछता है, तब वह रिपोर्टर के कंधे पर हाथ रखकर ठसक से कहता है, ”मैं हूं विकास, मैं हूं गुजरात.. सेव कर लेना”। पत्रकार फिर हतप्रभ है।

देखें पूरा विज्ञापन

इस वीडियो के बारे में सामाजिक कार्यकर्ता अमीक जामेइ लिखते हैं:

“गुजरात के लिये भाजपा का यह इश्तेहार बताता है कि मोदी की मीडिया इमेज इसलिए ख़राब करती है कि उन्‍हें मोदी कॉकटेल पार्टी नहीं देता, उन्‍हें फॉरेन ट्रिप पर नहीं ले जाता। बताइए, क्या बेइज़्ज़ती की है मीडिया की, जबकी यूपीए टू में मीडिया ने करप्शन के मामले मे सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा लिया था!”

{सौजन्य: मीडिया विजिल}

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  • Published: 3 weeks ago on November 2, 2017
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  • Last Modified: November 2, 2017 @ 12:08 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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