/रामदेव की स्वाभिमान यात्रा पर ‘बुद्धिजीवियों’ ने उठाए सवाल, कहा, योग गुरु दे रहे हैं ‘सफाई’

रामदेव की स्वाभिमान यात्रा पर ‘बुद्धिजीवियों’ ने उठाए सवाल, कहा, योग गुरु दे रहे हैं ‘सफाई’

”काले धन को मु्द्दा बनाकर अपनी सफाई देने में जुटे हैं बाबा रामदेव,” ये कहना है फेसबुक पर कुछ ‘स्वनामधन्य जाने-माने’ लोगों का जिनकी नजर में योग गुरू का ताजा अभियान दरअसल खुद को पाक-साफ दिखाने का तरीका है। फेसबुक पर लिखा गया है कि बाबा रामदेव की ‘नीयत में खोट’ था जिसके चलते उनका रामलीला मैदान वाला अनशन पुलिसिया डंडो की भेंट चढ़ गया। कुछ लोगों ने तो यहां तक लिखा है कि अगर बाबा रामदेव ने शुरू से पारदर्शिता दिखायी होती ते उनका अनशन सफल होता, इसलिए उनकी स्वाभिमान यात्रा पर भी शक होता है। गौरतलब है कि इस साल जून में दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के दौरान पुलिसिया कार्रवाई के चलते बाबा रामदेव और उनके समर्थकों को रामलीला मैदान छोड़ना पड़ा था।

सवाल यह उठता है कि रामदेव को सफाई देने की जरूरत क्या है? दरअसल योग गुरु को दो तरफा वार झेलना पड़ रहा है। एक तरफ जहां सरकार और कांग्रेस उनकी आलोचना में जुटी है वहीं दूसरी तरफ टीम अन्ना और उनके समर्थक अप्रत्यक्ष तौर पर उनकी टांग खिंचाई में जुट गए हैं। हालांकि रामदेव ने हमेशा अन्ना के आंदोलन को खुला समर्थन दिया है लेकिन अन्ना ने कभी अपने दिलों के दरवाजे उनके लिए नहीं खोले। यहां तक कि जब अन्ना के 13 दिन चले अनशन के शुरुआती दिनों में रामदेव ने समर्थन में आने की कोशिश की तो टीम अन्ना ने टूक कह दिया था कि उन्हें मंच पर आने की इजाजत नहीं मिलेगी। बाद में मीडिया में आलोचना और अगनिवेश से मिले धोखे के बाद अन्ना को रामदेव फिर याद आए थे, लेकिन अब फेसबुक अभियान से साफ हो रहा है कि दोनों पक्षों में खींचतान जारी है।

पिछली बार की ही तरह इस बार भी अन्ना ने रामदेव के समर्थन में कोई अपील तक जारी नहीं की। योग गुरु इस मसले पर बहुत सधे हुए शब्दों में जवाब दे रहे हैं। उन्होंने झांसी में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, ”इस बार के आंदोलन को सरकार हिला नहीं पाएगी। मेरा न्याय व्यवस्था में पूरा विश्वास है।” अन्ना हजारे के बारे में पूछने पर योग गुरु ने कहा, ”मैं सभी महापुरुषों का सम्मान करता हूं। आज के दौर के महान लोगों की भी मैं बहुत इज़्ज़त करता हूं। लेकिन दो व्यक्तियों में तुलना करना सही नहीं है।”

खास बात यह है कि अन्ना के आंदोलन जहां शहरों तक ही सीमित रहा वहीं योग गुरु ने अपना ध्यान गांव और किसानों पर केंद्रित रखा है। शिविर में योग गुरु ने लोगों से पूछा कि क्या योग सिखाना पाप है? बाबा रामदेव ने राजनीतिक दलों को भी खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि उन्हें किसी भी पार्टी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। योग गुरु ने कहा कि जिन लोगों का कैरेक्टर ही नहीं है, वे मुझे क्या कैरेक्टर सर्टिफिकेट देंगे? बाबा रामदेव की भारत स्वाभिमान यात्रा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब से होकर गुजरेगी। पहले चरण में बाबा रामदेव 3 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश के झांसी से फर्रूखाबाद तक की यात्रा करेंगे। 7 अक्टूबर से उत्तराखंड में यात्रा का दूसरा चरण शुरू होगा।

इससे पहले सोमवार को बाबा रामदेव मध्य प्रदेश के ग्वालियर में थे। भ्रष्टाचार विरोधी और कालाधन वापस लाने की अपनी मुहिम के तहत बाबा रामदेव ने सोमवार को रानी लक्ष्मीबाई की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। उनके साथ आचार्य बालकृष्ण, राजनीतिक विचारक वेदप्रताप वैदिक और दंदरौआ सरकार महंत रामदास भी मौजूद थे। समाधि स्थल से सरकार को कालेधन के मुद्दे पर घेरते हुए बाबा ने कहा सारी दुनिया जान चुकी है कि सरकार ने आम आदमी का धन लूटा है और दुनिया के तमाम बैंकों में इनका कालधन जमा है।

योगगुरु बाबा रामदेव ने सोमवार को ग्वालियर की धरती से भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्ध छेडऩे की घोषणा की। उन्होंने सोमवार को रानी लक्ष्मीबाई समाधि की परिक्रमा कर संकल्प लिया कि वह विदेशों में जमा काला धन वापस लाने तक अभियान जारी रखेंगे। रामदेव ने कहा, इन्होंने (कांग्रेस नेताओं ने) अन्ना हजारे पर आरोप लगाए, हम पर आरोप लगाए, लेकिन आरोप लगाने भर से कोई दोषी नहीं हो जाता। अब तो सारा जहां जानता है कि हमारा चरित्र क्या है और इनका का चरित्र क्या है?’

उन्होंने कहा, ‘ग्वालियर में हमारा कोई घोषित कार्यक्रम नहीं था, फिर भी इतने लोग हमें समर्थन देने आएं हैं, मैं इससे अभिभूत हूं। मुख्यधारा की राजनीति में आने के सवाल पर योगगुरू ने कहा, ‘व्यवस्था परिवर्तन के लिए देश भर में पहले से योग विज्ञान और राष्ट्र निर्माण शिविर चलाए जा रहे हैं, इस पूरे आंदोलन को लेकर न तो पहले हमारा कोई राजनीतिक उद्देश्य था, न अभी है।’

बाबा रामदेव के साथ भारत स्वाभिमान यात्रा के दूसरे चरण में हिस्सा ले रहे आचार्य बालकृष्ण ने मंगलवार को झांसी में मीडिया से बातचीत की। इस दौरान पासपोर्ट विवाद से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि विवाद है नहीं, लेकिन विवाद बनाया जा रहा है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा, ‘ हमारा अभियान देश और राष्ट्र के लिए अर्पित है। सरकार के पास शक्तियां हैं, वे किसी को बदनाम कर सकती है।’

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.