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रामदेव की स्वाभिमान यात्रा पर ‘बुद्धिजीवियों’ ने उठाए सवाल, कहा, योग गुरु दे रहे हैं ‘सफाई’

By   /  September 20, 2011  /  8 Comments

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”काले धन को मु्द्दा बनाकर अपनी सफाई देने में जुटे हैं बाबा रामदेव,” ये कहना है फेसबुक पर कुछ ‘स्वनामधन्य जाने-माने’ लोगों का जिनकी नजर में योग गुरू का ताजा अभियान दरअसल खुद को पाक-साफ दिखाने का तरीका है। फेसबुक पर लिखा गया है कि बाबा रामदेव की ‘नीयत में खोट’ था जिसके चलते उनका रामलीला मैदान वाला अनशन पुलिसिया डंडो की भेंट चढ़ गया। कुछ लोगों ने तो यहां तक लिखा है कि अगर बाबा रामदेव ने शुरू से पारदर्शिता दिखायी होती ते उनका अनशन सफल होता, इसलिए उनकी स्वाभिमान यात्रा पर भी शक होता है। गौरतलब है कि इस साल जून में दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के दौरान पुलिसिया कार्रवाई के चलते बाबा रामदेव और उनके समर्थकों को रामलीला मैदान छोड़ना पड़ा था।

सवाल यह उठता है कि रामदेव को सफाई देने की जरूरत क्या है? दरअसल योग गुरु को दो तरफा वार झेलना पड़ रहा है। एक तरफ जहां सरकार और कांग्रेस उनकी आलोचना में जुटी है वहीं दूसरी तरफ टीम अन्ना और उनके समर्थक अप्रत्यक्ष तौर पर उनकी टांग खिंचाई में जुट गए हैं। हालांकि रामदेव ने हमेशा अन्ना के आंदोलन को खुला समर्थन दिया है लेकिन अन्ना ने कभी अपने दिलों के दरवाजे उनके लिए नहीं खोले। यहां तक कि जब अन्ना के 13 दिन चले अनशन के शुरुआती दिनों में रामदेव ने समर्थन में आने की कोशिश की तो टीम अन्ना ने टूक कह दिया था कि उन्हें मंच पर आने की इजाजत नहीं मिलेगी। बाद में मीडिया में आलोचना और अगनिवेश से मिले धोखे के बाद अन्ना को रामदेव फिर याद आए थे, लेकिन अब फेसबुक अभियान से साफ हो रहा है कि दोनों पक्षों में खींचतान जारी है।

पिछली बार की ही तरह इस बार भी अन्ना ने रामदेव के समर्थन में कोई अपील तक जारी नहीं की। योग गुरु इस मसले पर बहुत सधे हुए शब्दों में जवाब दे रहे हैं। उन्होंने झांसी में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, ”इस बार के आंदोलन को सरकार हिला नहीं पाएगी। मेरा न्याय व्यवस्था में पूरा विश्वास है।” अन्ना हजारे के बारे में पूछने पर योग गुरु ने कहा, ”मैं सभी महापुरुषों का सम्मान करता हूं। आज के दौर के महान लोगों की भी मैं बहुत इज़्ज़त करता हूं। लेकिन दो व्यक्तियों में तुलना करना सही नहीं है।”

खास बात यह है कि अन्ना के आंदोलन जहां शहरों तक ही सीमित रहा वहीं योग गुरु ने अपना ध्यान गांव और किसानों पर केंद्रित रखा है। शिविर में योग गुरु ने लोगों से पूछा कि क्या योग सिखाना पाप है? बाबा रामदेव ने राजनीतिक दलों को भी खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि उन्हें किसी भी पार्टी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। योग गुरु ने कहा कि जिन लोगों का कैरेक्टर ही नहीं है, वे मुझे क्या कैरेक्टर सर्टिफिकेट देंगे? बाबा रामदेव की भारत स्वाभिमान यात्रा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब से होकर गुजरेगी। पहले चरण में बाबा रामदेव 3 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश के झांसी से फर्रूखाबाद तक की यात्रा करेंगे। 7 अक्टूबर से उत्तराखंड में यात्रा का दूसरा चरण शुरू होगा।

इससे पहले सोमवार को बाबा रामदेव मध्य प्रदेश के ग्वालियर में थे। भ्रष्टाचार विरोधी और कालाधन वापस लाने की अपनी मुहिम के तहत बाबा रामदेव ने सोमवार को रानी लक्ष्मीबाई की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। उनके साथ आचार्य बालकृष्ण, राजनीतिक विचारक वेदप्रताप वैदिक और दंदरौआ सरकार महंत रामदास भी मौजूद थे। समाधि स्थल से सरकार को कालेधन के मुद्दे पर घेरते हुए बाबा ने कहा सारी दुनिया जान चुकी है कि सरकार ने आम आदमी का धन लूटा है और दुनिया के तमाम बैंकों में इनका कालधन जमा है।

योगगुरु बाबा रामदेव ने सोमवार को ग्वालियर की धरती से भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्ध छेडऩे की घोषणा की। उन्होंने सोमवार को रानी लक्ष्मीबाई समाधि की परिक्रमा कर संकल्प लिया कि वह विदेशों में जमा काला धन वापस लाने तक अभियान जारी रखेंगे। रामदेव ने कहा, इन्होंने (कांग्रेस नेताओं ने) अन्ना हजारे पर आरोप लगाए, हम पर आरोप लगाए, लेकिन आरोप लगाने भर से कोई दोषी नहीं हो जाता। अब तो सारा जहां जानता है कि हमारा चरित्र क्या है और इनका का चरित्र क्या है?’

उन्होंने कहा, ‘ग्वालियर में हमारा कोई घोषित कार्यक्रम नहीं था, फिर भी इतने लोग हमें समर्थन देने आएं हैं, मैं इससे अभिभूत हूं। मुख्यधारा की राजनीति में आने के सवाल पर योगगुरू ने कहा, ‘व्यवस्था परिवर्तन के लिए देश भर में पहले से योग विज्ञान और राष्ट्र निर्माण शिविर चलाए जा रहे हैं, इस पूरे आंदोलन को लेकर न तो पहले हमारा कोई राजनीतिक उद्देश्य था, न अभी है।’

बाबा रामदेव के साथ भारत स्वाभिमान यात्रा के दूसरे चरण में हिस्सा ले रहे आचार्य बालकृष्ण ने मंगलवार को झांसी में मीडिया से बातचीत की। इस दौरान पासपोर्ट विवाद से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि विवाद है नहीं, लेकिन विवाद बनाया जा रहा है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा, ‘ हमारा अभियान देश और राष्ट्र के लिए अर्पित है। सरकार के पास शक्तियां हैं, वे किसी को बदनाम कर सकती है।’

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

8 Comments

  1. डॉ. विक्रम देव "क्रांतिवीर" says:

    ॐ “जय गुरु देव” वन्देमातरम. वन्देगोमात्रम. “शुद्ध शाकाहार अपनाएं”
    युग पुरोधा योग ऋषि स्वामी राम देव जी महाराज देशभक्तों के आदर्श राष्ट्रधर्म के प्रतीक हैं ऐसे महापुर्ष का विरोध करना राष्ट्रद्रोह है . स्वामी जी ने कोई धन अर्जन नहीं किया वे एक सन्यासी हैं सन्यासी को खुद के लिए किसी धन की कोई जरुरत भी नहीं होती लेकिन इतने बड़े महान उद्देश्यों हेतु धन की जरुरत तो पड़ती ही है. चाहे 10,००० गरीब लोगों का मुफ्त रविदास लंगर हो या ५००० गरीब लोंगों के लिए मुफ्त का बाल्मीकि धर्मशाला हो. ANYA समाजी व् राष्ट्रीय सेवा हो. विश्वविद्यालय, चिकिसालय, महाविद्यालय, गुरुकुलों का निर्माण कर देश के आम लोगों की सेवा हो . इन कार्यों हेतु धन की जरुरत तो पड़ती ही है. राज सत्ता व् धर्म सत्ता के पास धन तो जनता से आता ही है , फर्क ये है की राज सत्ता टैक्स के जरिये व् धर्म सत्ता दान के जरिये धन इकठ्ठा करती है . अब सवाल आता है उस धन के सदुपयोग व् दुरुपयोग का. राज सत्ता उसका POORI तरह से दुरुपयोग कर रही लेकिन धर्म सत्ता ( स्वामी राम देवजी) उसका जनहित व् राष्ट्रहित में सदुपयोग कर रहे. — डॉ. विक्रम डी शर्मा “क्रांतिवीर” – ९९१९८८३५३३

  2. RAJDEEP says:

    Ramdev ji is far better than Annaji… They do very hard work & get whatever Money …Totaly used in public fever…But in my point of view Babaji should sepratge business with BST & Till system is not change do it work according to present system I mens first leran from TATA group for Business go for public domin & at time No need to target each & every person….Even business of BABAJI too much help in Indian Growth & even fight with MNC… In today market total FMGC turn over more than 3 lacs crore… I hope & belive that if BABAJI do it as per public domin then get this entire busniss… it is help too much poor person of the nation….

  3. अजित जांगड़ा भारतीय says:

    एक तरफ तो बाबा बोलते हैं विदेशी वस्तु न ख़रीदे इससे देश को हानि होती है ….दूसरी स्वदेशी वस्तुए बाजार में आसानी से मिलती नहीं …….या फिर पहचान नहीं पाते ……तो इस हम बाबा से कहते बाजार में स्वदेशी वस्तुए मिलती या फिर पहचान नहीं पाते …..तब बाबा अगर ये सब वस्तुए बाजार में लेकर आये हैं तो ….क्या गलती कर दी अगर ये वस्तुए नहीं आएगी तो कैसे लड़ेंगे विदेशी कंपनियों से …….और इन सब के पैसो की जरुरत पड़ती है ………..और अगर आज कुछ लोग कहते है बाबा ने ये गलत किया है बाबा को तो सिर्फ योग ही करवाने चाहिए ……मै कहता हू क्यों ? बोलने लोग या फिर ये नेता सारे गलत कार्य कर सकते है ……..अगर हम देखना ही चाहते है तो यह देखे की उद्देश्य क्या …….क्या कार्य हो रहा अच्छा हो रहा है या बुरा ……….मै तो यह कहता हू बाबा को हर उस क्षेत्र में आना चाहिए …….जहा पर देशद्रोही बैठे है ……………….यहाँ तक की राजनीती में भी ……………बाबा की सम्पति के बारे में वही बोलते है जिन्होंने अपने जीवन में कुछ नहीं किया (अच्छा कार्य )….और नहीं पैसे कमाए है ..मेहनत से …….इसी लिए वो बाबा की कामयाबी से डरते है ………

  4. राम चंदर येदाव says:

    मैंने काफी दिन पहले एक खबर सुनी थी / किसी ने कहा था मीडिया एक दिन अपनी विश्वश्निता खो देगा / तब मैंने एसा कभी नहीं सोंचा था की इतनी जल्दी हो जायेगा /
    अभी भी वक़्त है मिडिया अपनी गिरेह्वन में झांके – अपनी गलतियाँ सुधारे /
    – – – ॐ जय भारत जय हिंद

  5. ajit bhosle says:

    बाबा रामदेव के बारे में लाख कोई कुछ भी बोले मैं बाबा रामदेव को बेहद करीब से जानता हूँ बल्कि मेरा कुछ समय उनके साथ गुजरा है, उनके जैसे लोग इस धरती पर सिर्फ लोगों का कल्याण करने के लिए जन्म लेते हैं, जहां तक उनके अर्थ अर्जन का प्रश्न है बिना अर्थ के किसी का भी भला नही हो सकता, बाबा पर संदेह करना सूरज पर टोर्च फैंकने के समान है, अगर राष्ट्र-प्रेम उनका कोई मुकाबला कर सकता है तो सिर्फ नरेन्द्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान बल्कि ये लोग भी उनसे उन्नीस ही बैठेंगे.

  6. YASHWANTSINGH says:

    बाबा रामदेव जी की तरफ से एक ही कमजोरी झलकती है कि वे पूर्ण रूप से अहिंसक नहीं वे वार करके सफलता चाते है | यह तथ्य इस बात से भी प्रकट होता है कि चाहे उनके स्वयं के नाम से नहीं हो किन्तु धन अर्जन में कमी नहीं रखी |

    • ॐ. यशवंत जी ! यदि बाबा की राष्ट्रीय सेवावों व् देशभक्तों द्वारा बाबा को दिए गए दान को बाबा द्वारा किया गया धनार्जन कहते हो तो ये बेहद शर्म की बात है. सवाल ये है की बाबा एक सन्यासी होकर धनार्जन क्यों करेंगें.?लगता है आप नीच कांग्रेस के एजेंट हो! आपका बाबा के ऊपर लगाया गया आरोप आपको देशद्रोही ठहराने के लिए काफी है. पहली बात तो ये की बाबा एक सन्यासी संत होने के आलावा राष्ट्रवाद के प्रखर प्रतिक बन चुके हैं उनका विरोध करने वाला देशभक्त तो कत्तई नहीं हो सकता है. उनके पास तो एक रुपये भी नहीं हैं लेकिन जो कुछ भी उनके आश्रम या ट्रस्ट के पास संम्पति है वो सभी राष्ट्र की संम्पति है और राष्ट्र सेवा के लिए काम आ रही है. बाबा द्वारा स्थापित रविदास लंगर( १०,००० गरीब लोगों को प्रतिदिन पवित्र भोजन मुफ्त में ) , बाल्मीकि धर्मशाला (५,००० निर्धनों के मुफ्त में रहने की सुन्दर व्यवस्था ) , कहीं बढ़, सुखा , अकाल या राष्ट्रीय आपदा में बाबा का राष्ट्र लाखों/ करोड़ों खर्च कर देश व् समाज की अनुकर्णीय सेवा करता है, उतना कोई क्रिकेटर, नेता, अभिनेता, उद्योगपति या आश्रम वाला करता है? जवाब नहीं! तो लानत है ऐसे आदर्श महापुर्ष पे लांचन लगाने वाले को. वन्देगोमात्रम. जयतु भारती.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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