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दैनिक भास्कर ग्रुप में छँटनी, कई मीडियाकर्मी हुए बेरोज़गार..

By   /  November 10, 2017  /  No Comments

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दैनिक भास्कर समूह ने अपने स्‍टाफ में कटौती की है। मीडिया समूह के कई प्रोजेक्ट्स के कई अन्य विभागों में कार्यरत मीडियाकर्मियो को एचआर ने फरमान सुना दिया है। इसमें एडिटोरियल, फीचर, एसईओ समेत कई विभाग के एम्पलाइज शामिल है।

मिल रही है जानकारी के मुताबिक, कई ऐसे एम्पलॉइज को पिंक स्लिप थमाई गई है, जिन्होंने कुछ महीने पहले ही ग्रुप जॉइन किया है। उच्च स्तरीय स्रोतों ने बताया कि कंपनी ने उन लोगों को नोटिस दिया गया है, जिनकी नियुक्तियां बीते तीन से चार महीने के दौरान की गई थी|कंपनी ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि जिस प्लान के तहत यह नियुक्तियां की गई थीं, उस प्लान पर फिलहाल कॉस्ट कटिंग की कैंची चली है, इसीलिए तीन से चार महीने में हुई नई नियुक्तियों पर इसकी गाज गिरी है।

गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने दिल्ली-एनसीआर में अपने को मजबूत करने के लिए कई नए प्रोजेक्ट शुरू करने की प्लानिंग की थी। ऐसे में इन प्रोजेक्ट्स में काम करने के लिए कई मीडिया कंपनियों में कार्यरत लोगों को बढ़िया पैकेज पर भास्कर ग्रुप जॉइन किया था।

पर अचानक जिस तरह इन लोगों को एक महीने का नोटिस थमाया गया है, उसके बाद मीडिया गलियारों में इसी बात की चर्चा हो रही है। नोटिस मिलने के बाद अब पीड़ित कई और मीडिया संस्थानों के चक्कर लगा रहे हैं, ताकि उनकी रोजी-रोटी चलती रहे।

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  • Published: 2 weeks ago on November 10, 2017
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  • Last Modified: November 10, 2017 @ 8:02 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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