Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

क्या मजीठिया केस पिंकसिटी प्रेस क्लब और पत्रकार संगठनों के लिए मुद्दा नहीं है..

By   /  November 12, 2017  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

जयपुर। पिंकसिटी प्रेस क्लब जयपुर और श्रमजीवी पत्रकारों के संगठनों ने पत्रकारों की आवास, पेंशन व दूसरी समस्याओं को लेकर सोमवार, १३ नवम्बर को पिंकसिटी प्रेस क्लब से सीएम हाउस तक पैदल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। पत्रकारों की आवास समस्या, वरिष्ठ पेंशन योजना, कैशलेश मेडिक्लेम बीमा योजना, पत्रकार सुरक्षा कानून और पत्रकार अधिस्वीकरण समस्या के निराकरण के लिए यह विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं। देर से सही, लेकिन जागे तो। जब जागे, तभी सवेरा। इसके लिए इन्हें साधुवाद।

लेकिन क्या पिंकसिटी प्रेस क्लब जयपुर, राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ, राजस्थान पत्रकार संघ, राजस्थान पत्रकार परिषद, कौंसिल ऑफ जर्नलिस्ट, आरएफडब्लूजे, पत्रकार ट्रस्ट ऑफ इंडिया व अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों को देश के पत्रकारों के लिए सर्वाधिक ज्वलंत मजीठिया वेजबोर्ड का मामला मुद्दा नहीं लगा। पत्रकारों के हक और सम्मानजनक वेतनमान को लेकर वेजबोर्ड की लड़ाई लड़ी जा रही है। इस लडाई में राजस्थान के करीब चार सौ पत्रकारों व गैर पत्रकारों को निकाला जा चुका है। इससे भी अधिक पर निलंबन और ट्रमिनेशन की तलवार अटकी हुई है। जयपुर के करीब सौ पत्रकार इससे प्रभावित है, जो क्लब के मेम्बरान भी है।

१३ नवम्बर को पैदल मार्च की घोषणा करने वाले पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों, पिंकसिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष व महासचिव को मजीठिया मामला पत्रकारों का मुद्दा नहीं लगा। यह मामला मांग पत्र में शामिल करने योग्य भी नहीं लगा। इसे क्यों शामिल नहीं किया। क्या वे डर कर गए कि मजीठिया लागू करने की मांग करेंगे तो सेठजी (अखबार मालिक) नाराज हो जाएंगे। श्रमजीवी पत्रकार संगठनों ने भी इसे शामिल करने की जहमत नहीं उठाई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर सभी यूनियनें कानून से लेकर सड़क की लड़ाई लड़ रही है। मजीठिया केस को मांग पत्र में शामिल नहीं करके दर्शा दिया कि उन्हें इस केस और इससे जुड़े पत्रकारों से कोई मतलब नहीं है।

अगर क्लब हमारी मांग को शामिल करने योग्य नहीं मानता है तो हम भी क्लब के इस विरोध प्रदर्शन का बहिष्कार करते हैं। हम कोई पत्रिका व भास्कर की लड़ाई नहीं है, बल्कि हर उन अखबारों के पत्रकारों के लिए कानूनी हक की लड़ाई है, जो केन्द्र व राज्य सरकारों से करोड़ों रुपयों का विज्ञापन ले रहे हैं। तमाम रियायतें व सहूलियतें उठा रहे हैं, लेकिन पत्रकारों को सम्मानजक वेतनमान नहीं दे पा रहे हैं। मजीठिया लागू करने की मांग को मांग पत्र में शामिल नहीं करके हमारे साथ धोखा किया है। हम भी १३ नवम्बर के विरोध प्रदर्शन का बहिष्कार करते हैं। अब तक यह लडाई खुद के दम पर लड़ रहे थे। आगे भी इसे जारी रखेंगे।

– अमित मिश्रा, संजय सैनी, देवेश पंत, राकेश कुमार शर्मा, शीलेन्द्र उपाध्याय, विनोद पाठक पदाधिकारी, मजीठिया इंप्लीमेंटेशन संघर्ष समिति राजस्थान एवं मजीठिया केस के पत्रकार व गैर पत्रकार साथी

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 2 weeks ago on November 12, 2017
  • By:
  • Last Modified: November 12, 2017 @ 3:48 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

राजस्थान के पत्रकार सरकार के समक्ष घुटने टेकने पर विवश हैं..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: