Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

मीडिया ने लोगों को ना अपना काम बताया है ना अदालतों का..

By   /  December 24, 2017  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-संजय कुमार सिंह॥

टूजी स्कैम में सभी अभियुक्तों का छूट जाना या यह स्थिति आ जाना कि कोई अपराध हुआ ही नहीं था – निश्चित रूप से मीडिया की नालायकी है। ऐसे में यह मांग उठ रही है कि मीडिया अपनी नालायकी के लिए माफी मांगे। हालांकि, यह मांग आम मीडिया से नहीं, उन्हीं लोगों से की जा रही है जिन्हें गंभीर माना जाता है या जो गंभीर होने का दावा करते हैं। इस मामले में अगर मंत्री रह चुके लोग सात साल परेशान हुए तो देश में आम लोगों की क्या हालत होगी इसकी कल्पना की जा सकती है। पर आम आदमी की बात तो तब होगी जब यह निश्चित हो जाएगा कि यह मामला गलत था या राजनीतिक था। लेकिन इसपर चर्चा कौन करेगा? किसलिए करे?

उल्लेखनीय है कि जब यह घोटाला सामने आया था तभी कपिल सिब्बल ने जीरो लास की बात की थी औऱ किसी ने उनसे समझने की कोशिश की होती (खबर करते या नहीं, समझने की कोशिश तो होनी ही थी) तो बात स्पष्ट होती और जनता भ्रम में नहीं रहती। अभी भी इसपर बात करके मामले को हमेशा के लिए स्पष्ट किया जा सकता है पर ना तब किसी ने इस ओर ध्यान दिया ना अब देगा क्योंकि जो बिकता है वही खबर है या मुफ्त में टीआरपी मिले तो खर्च करने की क्या जरूरत?

इस पूरे मामले पर एक नजरिया विनोद राय का था और दूसरा कपिल सिब्बल का। मीडिया में चर्चा इसपर होनी चाहिए थी कि कौन ठीक है कौन गलत। मीडिया ने सीधे ट्रायल शुरू कर दिया और दोषी करार दिए गए क्योंकि गिरफ्तारियां हुई थीं। मीडिया का काम अदालतों पर भी नजर रखने का है पर वह अदालत के साथ हो गया। पर अदालत के लिए यह काम इतना आसान नहीं था और ना ही अदालत मीडिया की तरह गैर जिम्मेदार हो सकती है। इसलिए यह पोल अब खुली वरना मीडिया की चर्चा में ही सारी बातें सामने आ गई होतीं। ऐसे में मीडिया से यह अपेक्षा करना कि वह अपनी गलती के लिए माफी मांगे भले ही सही है – पर भारत में मीडिया के काम करने का तरीका ही ऐसा है कि वह ऐसी गलतियां करता रहेगा।

मीडिया को कपिल सिब्बल की बात पर भी ध्यान देना चाहिए था। पर मुझे लगता है भारतीय मीडिया या भारतीय स्थितियों में वह संभव ही नहीं है। सारी दुनिया में लोग गलतियों से सीखते हैं – भारत में वो भी नहीं होने वाला है। सीएजी की खबर (या सूचना कहिए) को गलत कहने और लिखने के लिए ईमानदार ही नहीं, वरिष्ठ लोगों की आवश्यकता है। अभी की व्यवस्था में नीचे के पद पर बैठा कोई व्यक्ति अगर बताये भी तो सुना नहीं जाएगा। और वरिष्ठ पदों पर बैठे लोग (जरूरत से कम हैं) नीतियां तय करने के लिए नहीं – लाला को पुरस्कार और सम्मान दिलाने के लिए होते हैं। मेरा मानना है कि जो 2जी में हुआ वही कोल स्कैम में होगा। तब किसी ने सिब्बल की बात नहीं मानी थी वैसे ही मैंने एक इंटरव्यू में नवीन जिन्दल को कहते सुना है कि घाटा काल्पनिक है।

इस मामले में भी जिन्दल की बातों पर ध्यान नहीं दिया गया और कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर कोयला घोटाला भी उसी रास्ते चला जाए। मीडिया की खराब या गलत भूमिका के कारण अदालतों की छवि खराब हो रही है सो अलग। मैं यह नहीं कहता कि अदालतों में भ्रष्टाचार नहीं है पर कई मामलों में मीडिया किसी को अपराधी साबित कर चुका होता है और अदालत में जब वैसे सूबत नहीं हों तो अदालत भी क्या करे। उदाहरण के लिए, दहेज देना लेना गलत है। पर उपहार देना लेना नहीं। शादी में मिले उपहारों को मीडिया दहेज कहकर कार्रवाई करने की मांग करे, सामान के फोटो छाप दे औऱ दहेज में दिए गए फ्लैट का नंबर भी। पर बचाव पक्ष अगर यह साबित कर दे कि वह फ्लैट दहेज नहीं उपहार है – अदालत क्या करेगी। यहां अभियोजन को यह साबित करना होगा कि उपहार दरअसल दहेज है जो साबित करना मुश्किल है – अगर अपराधी (दहेज को उपहार के रूप में देने वाला) चतुर है।

यह सही है कि हर क्षेत्र में प्रशिक्षुओं से काम कराने का रिवाज है पर अनुभवी लोगों का अपना महत्व है। मीडिया में 40-45 से ऊपर लोगों को दूध की मक्खी की तरह अलग कर दिया जाता है। ऐसे में जो सावधानियां अनुभव से बरती जानी हैं वो नहीं बरती जाएंगी और ऐसी गलतियां होती रहेंगी। समाज को उसका नुकसान होगा वह अपनी जगह है लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका का निर्वाह सही ढंग से नहीं किया जाएगा तो लोकतंत्र भी ठीक से नहीं चलेगा। इसीलिए अपराधी सत्ता में आ जाते हैं और आम आदमी पिसता रहता है। आज ही के अखबारों में खबर है कि सीबीआई आरुषि हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट जाएगी पर बहुत सारे मामलों में नहीं जाएगी। ये किसी अखबार में नहीं है, नहीं रहता है। और जिन मामलों में सीबीआई सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी उसके अपराधी चुनाव लड़ेंगे, किसी भी तरह सत्ता हथियाने की साजिश करेंगे। मीडिया विज्ञापनों के लालच में उनके साथ हो लेगा। सब ऐसे ही चलता रहेगा। जरूरत है जनता के जागने की।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 12 months ago on December 24, 2017
  • By:
  • Last Modified: December 24, 2017 @ 8:18 am
  • Filed Under: मीडिया

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

अकबर के खिलाफ आरोप गोल करने वाले हिन्दी अखबारों ने उनका जवाब प्रमुखता से छापा, पर आरोप नहीं बताए

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: