Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

महामहिम, आप इंदिरा जी की रसोई संभालती थीं, लेकिन इसे अपनी तारीफ समझ मुझे माफ कर दें

By   /  September 21, 2011  /  5 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

कहते हैं मूर्ख शुभचिंतक एक दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक होता है। राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटील को पिछले दिनों ऐसे ही एक मूर्ख शुभचिंतक से वास्ता पड़ गया। राजस्थान की गहलौत सरकार में वक्फ और राजस्व मंत्री का पद संभाल रहे अमीन खां ने राष्ट्रपति की तारीफ में ऐसे-ऐसे कसीदे पढ़े कि खुद उन्हें भी नहीं समझ आया कि उनकी तारीफ हो रही है या खिंचाई।

चलो माफ किया: राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल

अमीन खां ने इस साल फरवरी में एक सभा में कह डाला था कि प्रतिभा पाटील तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की रसोई में काम करती थीं और उनकी इन्हीं सेवाओं की बदौलत वे आज देश के सर्वोच्च पद पर हैं। इस बयान के बाद जयपुर से लेकर दिल्ली तक बावेला मच गया था और आखिरकार अमीन को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। अशोक गहलोत ने खान से इस्तीफा मांग लिया था।

लेकिन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील की ‘तारीफ’ को लेकर मंत्री पद खो चुके अमीन खां ने सोमवार को राजभवन जाकर राष्ट्रपति से माफी मांग ली। अमीन ने कहा कि वे बहुत पढ़े-लिखे नहीं हैं और उन्होंने पाटील को अपमानित करने की नीयत से कुछ नहीं कहा था।

उन्होंने तो तारीफ में यह कहने की कोशिश की थी कि इन्सान अच्छे कामों की बदौलत कहां से कहां पहुंच सकता है, लेकिन मीडिया ने उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया था। खां के अनुसार राष्ट्रपति ने उनकी पूरी बात सुनी और खुशी से जवाब देते हुए कहा- मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है।

अमीन खां राष्ट्रपति से सोमवार शाम को करीब सात बजे पांच मिनट के लिए राजभवन में मिले, जहां वे राजस्थान प्रवास के दौरान ठहरी हुई हैं। खां के साथ पूर्व विधायक सीडी देवल और पाली जिला प्रमुख खुशबीरसिंह जोजावर भी थे।

दरअसल देवल और जोजावर ने ही इस मुलाकात की भूमिका बांधी थी। ये दोनों नेता अमीन खां के लिए राष्ट्रपति से पिछली बार उदयपुर में मिले थे। इस बार ये दोनों नेता अमीन खां को मिलवाने ले गए। इन दोनों नेताओं ने भी राष्ट्रपति से आग्रह किया कि अमीन खां ने किसी दुर्भावना से कुछ नहीं कहा।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

5 Comments

  1. vijay says:

    सत्य है इसीलिए तो क्षमा कर दिया महामहिम ने उन्हें, रसोई ही क्या उनके बर्तन भी मांजे जाते होगे

  2. क्या करेंगे राजनीती में तो होता रहता है
    परन्तु सोचने की बात यह है की अमिन खान ने एषा क्यों कहा क्यों की कही न कही सुच छुपी है

  3. Harkaramjit Singh Dhillon says:

    राजनिति में सब तरह का व्योहार चलता है . +g

  4. Pravindra kumar says:

    में नही जनता ये रिया कोन है अगर कोई भारतीय नारी है तो उसको नारी का सम्मान करना नही आता है . रसोई तो इसकी माँ भी बनती होगी किसी भिखारी के लिए तो क्या हुआ अगर मालिक का रसोई बनाया बो भी तो इन्द्ररा जी की बेटी के बराबर की थी ओर आज बो देश की रस्त्रियापिता है
    उनका सम्मान करना है

  5. Shivnath Jha says:

    राजस्थान के लोग “सच” बोलने में माहिर हैं. यह बात सत्य भी है कि माननीय राष्ट्रपतिजी श्रीमती इंदिराजी के खाने-पीने पर बहुत ध्यान रखती थी. राजस्थान के मंत्रीजी ने सत्य तो “चाटुकारिता” से नहीं फ़रमाया, सीधा-सीधा फरमा दिया. कोई बात नहीं. महामहिम उन्हें “सत्य वचन के लिए क्षमा कर दीं.”

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

जौहर : कब और कैसे..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: