Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

अब राफ़ेल बनाम बोफ़ोर्स..

By   /  July 24, 2018  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-ज्ञानेंद्र पांडेय॥

कहना गलत नहीं होगा कि अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के बहाने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को सरकार के खिलाफ २०१९ का लोकसभा चुनाव लड़ने का एक मुद्दा मिल गया है। यह मुद्दा होगा राफेल बनाम बोफोर्स। गौरतलब है कि १९८९ के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के प्रधान मंत्री स्वर्गीय राजीव गाँधी को बोफोर्स तोप की खरीद में हुए कथित घोटाले के चलते हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस इस बार बाजी पलटना चाहती है और नरेन्द्र मोदी की सरकार को बोफोर्स सौदे की कथित दलाली का जवाब राफेल विमान की खरीद में हुए घपले से देना चाहती है।

शुक्रवार २० जुलाई को लोकसभा में हुई अविश्वास मत प्रस्ताव की चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस मामले को बहुत ही आक्रामक तरीके से सदन में उठाया था और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर इस सौदे में लिप्त होने का आरोप भी लगाया था। राहुल गाँधी के इस आरोप के जवाब में भाजपा के कुछ सांसदों ने राहुल गाँधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन के नोटिस भी लोक सभा अध्यक्ष को सौपें हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने हालांकि अभी तक विशेषाधिकार हनन के नोटिस पर कोई फैसला नहीं लिया है पर इस बहाने बोफोर्स बनाम राफेल मामले पर बहस की एक नई जमीन जरूर तैयार हो गई है। विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की चर्चा तो शुक्रवार से ही थी और ये कयास लगाए जा रहे थे कि इस आशय का प्रस्ताव आने पर कांग्रेस कमजोर पड़ जाएगी लेकिन आज जिस तरह कांग्रेस सरकार के रक्षा मंत्री ए के एंटोनी ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया उससे ऐसा लगता है कि कांग्रेस बोफोर्स की काट के रूप में मोदी सरकार के खिलाफ राफेल विमान सौदे में हुई कथित गड़बड़ी को चुनावी मुद्दा बना सकती है।

गौरतलब है कि पिछले एक से दो दशक के बीच भारत को सुरक्षा के मोर्चे पर तमाम पड़ोसी देशों से मिल रही चुनौतियों का सामना करने के लिए वायुसेना की ताकत को बढ़ाने के मद्दे नज़र लड़ाकू विमान खरीदने का  का निर्णय लिया गया था।  इसकी पहल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी  के कार्यकाल में हुई थी लेकिन 126 लड़ाकू विमानों की खरीद का यह प्रस्ताव उनकी उत्तराधिकारी कांग्रेस सरकार में परवान चढ़ा था। यूपीए सरकार में तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी की अगुवाई वाली रक्षा खरीद परिषद ने अगस्त 2007 में 126 एयरक्राफ्ट की खरीद को मंजूरी दे दी। फिर बिडिंग यानी बोली लगने की प्रक्रिया शुरू हुई और अंत में लड़ाकू विमानों की खरीद का आरएफपी जारी कर दिया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक लड़ाकू विमानों की रेस में अमेरिका के बोइंग एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉरनेट, फ्रांस का डसॉल्टा राफेल, ब्रिटेन का यूरोफाइटर, अमेरिका का लॉकहीड मार्टिन एफ-16 फाल्कॉन, रूस का मिखोयान मिग-35 और स्वीडन के साब जैस 39 ग्रिपेन जैसे एयरक्राफ्ट शामिल थे, लेकिन राफेल ने बाजी मारी।

कहा गया कि राफेल की कीमत दौड़ में शामिल बाकी जेट्स की तुलना में काफी कम थी और इसका रख-रखाव भी काफी सस्ता था। दूसरी तरफ, ये 3 हजार 800 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। यही वजह थी कि डील राफेल के पाले में गई। उसके बाद भारतीय वायुसेना ने कई विमानों का तकनीकी परीक्षण और जांच किया। यह प्रक्रिया 2011 तक चलती रही। वायुसेना ने जांच-परख के बाद 2011 में कहा कि राफेल उसके पैरामीटर पर खरे हैं। अगले साल यानी 2012 में राफेल को बिडर घोषित किया गया और इसके उत्पादन के लिए डसाल्ट एविएशन के साथ बातचीत शुरू हुई। हालांकि तमाम तकनीकी व अन्य कारणों से यह बातचीत 2014 तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।  2012 से लेकर 2014 के बीच बातचीत किसी नतीजे पर न पहुंचने की सबसे बड़ी वजह थी विमानों की गुणवत्ता का मामला। कहा गया कि डसाल्ट एविएशन भारत में बनने वाले विमानों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थी। साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर भी एकमत वाली स्थिति नहीं थी। मामला अटका रहा। साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आए तो दोबारा राफेल को लेकर सुगबुगाहट शुरू हुई। वर्ष 2015 में पीएम मोदी फ्रांस गए और उसी दौरान राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर समझौता किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक समझौते के तहत भारत ने जल्द से जल्द उड़ान के लिए तैयार 36 राफेल लेने की बात की थी। पीएम मोदी के सामने हुए समझौते में यह बात भी थी कि भारतीय वायु सेना को उसकी जरूरतों के मुताबिक तय समय सीमा के भीतर विमान मिलेंगे। वहीं लंबे समय तक विमानों के रखरखाव की जिम्मेदारी फ्रांस की होगी। आखिरकार सुरक्षा मामलों की कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद दोनों देशों के बीच 2016 में आईजीए हुआ। भारत-फ्रांस के बीच समझौता होने के करीब 18 महीने के भीतर विमानों की आपूर्ति शुरू होने की बात थी। लेकिन इसी बीच ‘राफेल डील’ को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षियों के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई. खरीद में अपारदरर्शिता के आरोप लग रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यूपीए 126 विमानों के लिए 54,000 करोड़ चुका रही थी। वहीं अब मोदी सरकार सिर्फ 36 विमानों के लिए 58,000 करोड़ रुपये दे रही है। कांग्रेस का आरोप है कि अब एक विमान का दाम 1555 करोड़ रुपये हैं। जबकि कांग्रेस ने 428 करोड़ रुपये में डील तय की थी। कांग्रेस लगातार डील की रकम को सार्वजनिक करने की मांग पर अड़ी है। जबकि भाजपा दोनों देशों के बीच हुए सुरक्षा समझौते की गोपनीयता का हवाला दे रही है।
[email protected]

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

बिलावजह राजनीति, किसी भी कीमत पर राजनीति..

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: