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नरेंद्र मोदी दिवालिया होने के कगार पर खड़े अनिल अम्बानी का कौन सा क़र्ज़ा उतार रहे हैं..

By   /  October 5, 2018  /  No Comments

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जितेंद्र नरूका

जल्दी ही फाइनेंस मिनिस्टर, RBI गवर्नर आदि आदि अर्थशास्त्रियों के बयान आ सकते हैं!
“LIC भारतीय जीवन बीमा निगम और GIC जनरल बीमा निगम सक्षम नहीं तो हल्ला मत मचाईए”

जैसे HAL से 59,000 करोड़ की डील छीन कर अनिल अंबानी की 2 हफ्ते पूर्व बनी कम्पनी को देने पर पूर्व सेना अध्यक्ष और मंत्री का बयान आया
“HAL सक्षम नहीं तो हल्ला मत मचाईए”  और IT Cell लग गयी 70 साल पुरानी सार्वजनिक क्षेत्र(PSU) HAL को नकारा साबित करने।

खुल्लमखुल्ला राफेल की धोखाधड़ी को समझना है तो जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का सरकारी आदेश देखिए।

पॉलिसी का करार मैसर्स रिलायंस जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ 8,777 रुपये और 22,229 रुपये (क्रमशः कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए) के वार्षिक प्रीमियम पर किया गया है।


आदेश में कहा गया है कि पॉलिसी राज्य के सभी 4 लाख सरकारी कर्मचारियों (राजपत्रित और गैर राजपत्रित), राज्य के विश्वविद्यालयों, आयोगों, स्वायत्त निकाय और पीएसयू के लिए अनिवार्य होगी।

इतनी खुल्लमखुल्ला बेशर्मी से पूंजीपतियों की सेवा बजाते, अम्बानी के आगे नतमस्तक होते आपने कोई सरकार नहीं देखी होगी।

सरकारी उपक्रम भारतीय जीवन बीमा निगम LIC या GIC को छोड़ कर किसी निजी कम्पनी की हैल्थ पॉलिसी लेने के लिए सरकारी कर्मचारियों को बाध्य करना, अम्बानी का कर्जा चुकाना नहीं है तो क्या है!!

एक तरफ LIC को बीमार निजी बैंकों के शेयर खरीद के लिए बाध्य किया जा रहा है दूसरी तरफ निजी बीमा कंपनियों को बढ़ावा।

फिर 2019 मे मोदी सरकार लाइये तो LIC और GIC को बीमार घोषित कर रिलायंस इंश्योरेंस कम्पनी को सौंप दिया जाएगा।

सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों रक्षा,रेल,तेल,बैंकिंग, बीमा सबको निजी हाथों मे सौंप पूंजीपतियों की सेवा बजाने का खेल अब खुल्लमखुल्ला बेशर्मी अख्तियार कर चुका है।

चलिए अब आयुष्मान भारत योजना का खेल समझते हैं, इस रिलायंस जनरल हेल्थ इंश्योरेंस प्रकरण के बाद आसानी होगी समझना।

प्रधानमंत्री ने 50 करोड़ भारतीयों को 5 लाख तक के हेल्थ कवरेज वाली बड़ी आकर्षक लगने वाली योजना शुरू की है।

ऊपरी तौर पर ये बड़ी आकर्षक लग सकती है लेकिन करीब से समझेंगे तो आसानी से समझ आ जायेगा कि ये बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने और स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों मे सौंपने का खेल है।

इससे पहले हमे विश्व स्वास्थ्य नीतियों पर नजर डालनी होगी।
समाजवादी क्यूबा को छोड़ दीजिए जहां 90% नागरिक स्वास्थ्य जिम्मेदारी सरकारी कंधों पर है।

पूंजीवादी इंग्लैंड की बात करते हैं जहाँ 85% स्वास्थ्य जिम्मेदारी सरकार वहन करती है और विश्व मे बेमिसाल है, जिससे सरकार भाग निजी हाथों मे सौंपना भी चाहे तो जनता नहीं भागने देगी, इंग्लैंड की जनता द्वारा राजनैतिक चेतना और पूर्व राजनैतिक आंदोलनों से प्राप्त किया हक़ है।

अब इससे ठीक उलट अमेरिका मे स्वास्थ्य 100% निजी बीमा कंपनियों के हाथ मे है और भारी मुनाफा कमाती हैं बीमा कम्पनियां।

ऐसा नही है कि अमेरिका का स्वास्थ्य बजट कम है,अमेरिका अपने GDP का 8.5% ब्रिटेन के 7.9% से भी ज्यादा खर्च करता है लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं ब्रिटेन के आसपास भी नहीं। क्योंकि अमेरिका मे बीमा कंपनियां मुनाफ़ा कमाती हैं और ब्रिटेन मे स्वास्थ्य सरकार की सीधी जिम्मेदारी है।

तो अमेरिका की दुमच्छली सरकार की आयुष्मान भारत योजना पर फिर आते हैं।
ध्यान रहे भारत मे स्वास्थ्य बजट GDP का 1% से भी कम है और हमारी स्वास्थ्य सेवाएं विश्व मे निम्नतम हैं 145 वे स्थान पर यानी म्यंमार बंगलादेश से भी पीछे!
भारत मे पहली स्वास्थ्य नीति 1983 मे बनी।
फिर अटल जी के समय 2002 मे निजी क्षेत्रों की भागीदारी वाली।
और अब 2018 मे मोदी जी की आयुष्मान भारत यानी कि पूर्ण रूप से स्वास्थ्य को अमेरिका की तर्ज पर निजी हाथों मे सौंप जनता को लूट की जुगत।

एक बात महत्वपूर्ण है आयुष्मान भारत के लिए किसी अतिरिक्त बजट की घोषणा नहीं हुई है और ये द्वितीय और तृतीय चरण का स्वास्थ्य बीमा है। यानी प्राथमिक स्वास्थ्य पर खर्च होने वाला बजट अब बीमा कंपनियों की तिजोरी भरेगा।

सरकारी ग्रामीण अस्पताल, उनमे सुविधा, डॉक्टर कर्मचारी पहले से ही अपर्याप्त हैं अब तो धीरे धीरे बन्द। जच्चा बच्चा, कुपोषण, टीकाकरण, प्राथमिक उपचार, जागरूकता अभियान का सारा अपर्याप्त बजट भी अब कटौती कर बीमा कंपनियों को सौंप दिया जाएगा।
प्राथमिक उपचार अत्यंत जरूरी है लेकिन आयुष्मान भारत द्वितीय और तृतीय चरण यानी हॉस्पिटलाइजेशन और कुछ ऑपरेशन आदि तृतीय स्तर उपचारों के लिए ही है।
बीमा कंपनियों और निजी कॉरपोरेट अस्पतालों की पौबारह पच्चीस रहेगी और सरकारी स्वास्थ्य जिम्मेदारी समाप्त।

विस्तार मे जाने की बजाय निजी बीमा कंपनियों के मुनाफे के खेल और आयुष्मान भारत को समझने के लिए ये उदाहरण मदद करेगा।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना PMFBY जिसमे एक खरीफ की फसल में ही 13 बीमा कंम्पनियों ने केंद्र , राज्य सरकार और किसानों ने 19698 करोड़ का प्रीमियम दिया और भुगतान के समय बीमा कंपनियों ने सिर्फ 10799 करोड़ का भुगतान ही किया।
यानी 45%, एक सीजन मे ही 8898 करोड़ का भारीभरकम मुनाफा। तो अब आयुष्मान भारत जैसी योजना से निजी बीमा कंपनियों के मुनाफे के खेल और जनता से लूट का अंदाजा लगाइये!!

हम समझ सकते हैं कि अब भारी कर्ज मे डूबे अनिल अंबानी जैसे प्रधानमंत्री जी के करीबी किस तरह फिर ईमानदार सेवक चौकीदार फ़कीर मोदी जी को 2019 मे लाने जनता से लूटा पैसा पानी की तरह बहाएंगे।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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