Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

अकबर के खिलाफ आरोप गोल करने वाले हिन्दी अखबारों ने उनका जवाब प्रमुखता से छापा, पर आरोप नहीं बताए

By   /  October 15, 2018  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

संजय कुमार सिंह

केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर के खिलाफ आरोप नहीं छापने वाले हिन्दी अखबारों ने आज उनका जवाब पूरे विस्तार से और पूरी प्रमुखता से छापा है। नवभारत टाइम्स में आज पहला पेज पूरा विज्ञापन है पर मास्टहेड के बगल में ईयर पैनल में अकबर की फोटो के साथ लिखा है, दरबार में बने रहेंगे अकबर, जवाब में दागे सवाल देखें अंदर। और वो अंदर खबरों का पहला पेज ही है और यह खबर आज के अखबार की लीड है। दो कॉलम की इस खबर का शीर्षक दो लाइन का है और दूसरे प्रमुख शीर्षक है, “मीटू के इल्जामों को मंत्री ने बेबुनियाद बताया”, “जवाब में दागे सवाल” और एक छोटी खबर का तीसरा शीर्षक है, “सरकार में दो राय”। बड़े अक्षरों में अकबर का कोट फोटो के साथ एक कॉलम से ज्यादा में इनवर्टेड कॉमा के साथ है, “सभी आरोप 2019 के चुनाव से पहले ही क्यों लगाए जा रहे हैं क्या यह कोई अजेंडा है – चुनाव से पहले मेरी छवि खराब करने की कोशिश है।” इसके साथ – एमजे अकबर, विदेश राज्य मंत्री भी लिखा गया है। एनबीटी ब्यूरो की यह खबर और बातों के अलावा यह भी कहती है, “बताते हैं कि अकबर सोमवार को आपराधिक मानहानि का केस दायर कर सकते हैं।”

अकबर के पुराने अखबार ‘द टेलीग्राफ’ ने इसे, “मीटू मीट्स एडिटर एमजे हू वील्ड्स लीगल क्विल” (मीटू का मुकाबला संपादक एमजे से हुआ जो कानून की वंशी रखते हैं) शीर्षक से छापा है। अखबार ने अकबर की सिर से नख तक की फोटो प्रिया रमानी और दूसरी मीटू आरोपियों के पक्ष के साथ सात कॉलम में आधे से ज्यादा पेज पर छापा है। आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों में प्रिया रमानी का बयान शीर्षक है, “ट्रुथ इज बेस्ट डिफेंस” (सच्चाई सर्वश्रेष्ठ बचाव है)। रमानी ने कहा है कि अवमानना के किसी भी मामले में सच्चाई सर्वश्रेष्ठ बचाव है और वे चिन्तित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मीटू अभियान में अकबर के खिलाफ कोई साजिश नहीं है और उनसे अलग, हममें से किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। टेलीग्राफ समेत अंग्रेजी के अखबार अकबर के खिलाफ आरोप लगातार छाप रहे थे और आज उनका पक्ष छापा है तो आरोप लगाने वालों का पक्ष भी है। अखबार ने अकबर के खंडन के बारे में लिखा है, “खंडन पर पत्रकार जो अकबर थे, के हस्ताक्षर हैं में यह सूचना दी गई है कि वे तैर नहीं सकते और संपादक का उनका क्यूबिकल छोटा था, से पता चलता है कि कनिष्ठ विदेश मंत्री चाहते हैं कि आरोपों का ‘वायरल बुखार’ कानून की चलनी से छने।”

दैनिक हिन्दुस्तान ने अकबर के खंडन को फोटो के साथ पांच कॉलम में लीड लगाया है। लाल रंग में हैशटैग मीटू के साथ फ्लैग हेडिंग है, “भारत लौटते ही विदेश राज्यमंत्री ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को मनगंढ़त बताया”। मुख्य शीर्षक है, “कानूनी कार्रवाई करूंगा : अकबर”। इस खबर के साथ दो छोटी खबरें हैं। एक का शीर्षक है, “20 साल तक चुप क्यों थीं?” इसमें लिखा है, “अकबर ने 20 साल बाद आरोप लगाने पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब तक क्यों चुप थीं। जिस वक्त ये आरोप लगाए गए हैं उसके बाद भी मैंने कई महिलाओं के साथ काम किया है. तब किसी ने क्यों कुछ नहीं बोला। शिकायत क्यों नहीं की।” यहां यह बताना जरूरी है कि अगर आपने मीटू अभियान के तहत लगाए गए आरोप पढ़े होंगे तो इनका जवाब मालूम होगा। वैसे, अकबर साब का सवाल जायज है और उसे छापने पर तो कोई सवाल ही नहीं है। दैनिक हिन्दुस्तान ने अकबर के इस सवाल के साथ ही अकबर के खिलाफ शिकायत करने वालों में से एक, गजाला वहाब का ट्वीट छापा है। “तत्काल बर्खास्त करें : गजाला”, शीर्षक से प्रकाशित सिंगल कॉलम की इस छोटी सी खबर में कहा गया है, एमजे अकबर के दिल्ली पहुंचते ही वरिष्ठ पत्रकार गजाला वहाब ने ट्वीट में मोदी से कहा कि वे उन्हें तत्काल बर्खास्त करें। अगर वे उन्हें बच निकलने का मौका देते हैं तो बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान बंद कर देना चाहिए। वहाब ने भी अकबर पर आरोप लगाए हैं।

दैनिक जागरण ने भी इस खबर को खबरों के अपने पहले पन्ने पर लीड बनाया है। शीर्षक है, “आरोप झूठे, करेंगे कानूनी कार्रवाई : अकबर”।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि किसी केंद्रीय मंत्री के विदेश में रहने पर उनके खिलाफ कई दिनों तक आरोप लगें और जब वे लौटकर आरोपों का खंडन करें और कहें कि कानूनी कार्रवाई करेंगे – तो खबर महत्वपूर्ण है और लीड ही बननी चाहिए। पर सवाल यह है कि अंग्रेजी में लगाए गए जिन आरोपों को हिन्दी अखबारों ने छापा ही नहीं उन आरोपों के बारे में पाठको को कैसे पता चलेगा और पाठकों को आरोप बताने की जरूरत है कि नहीं? हिन्दी के जिन अखबारों ने आरोप छापे मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं। मैं उनकी बात कर रहा हूं जिन्होंने आरोप को तो जगह नहीं दी पर आरोपों से मानहानि की बात कर रहे हैं और अपने पाठकों को बता रहे हैं कि मंत्री जी कानूनी कार्रवाई करेंगे। मैं यह समझने की कोशिश कर रहा हूं कि अखबार पाठकों को आरोपों की कितनी जानकारी दे रहें हैं या दी है या देने का इरादा रखते हैं। दैनिक जागरण ने पांच कॉलम की अपनी लीड खबर में अकबर के खंडन के साथ एक कॉलम, 12 लाइन में छापा है, यह है मामला। अकबर का बयान पूरे विस्तार से है। पहले पेज पर संबंधित खबरें पेज 2 और 9 पर होने की सूचना है लेकिन इनमें आरोप या आरोप लगाने वालों का पक्ष नहीं है। नवोदय टाइम्स ने इस खबर का शीर्षक लगाया है, कानूनी कार्रवाई की धमकी और इस्तीफे की भी उड़ी अफवाह शीर्षक से एक खबर बॉक्स है और इस लिहाज से यह भले संतुलित लगे पर आरोपों का जिक्र या आरोप लगाने वालों से बातचीत यहां भी नहीं है।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 2 years ago on October 15, 2018
  • By:
  • Last Modified: October 15, 2018 @ 3:59 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

सुजस प्रकाशन की आड़ में हेराफेरी..

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: