Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

इज़्ज़त के खातिर क़त्ल ऑनर किलिंग नहीं.?

By   /  August 25, 2019  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-भँवर मेघवंशी।।

5 अगस्त 2019 को राजस्थान की असेम्बली ने ऑनर किलिंग जैसे जघन्य अपराधों की रोकथाम के लिये कानून पास किया और उसके अगले ही दिन 6 अगस्त 2019 की रात में इस प्रेमी युगल को मौत के घाट उतार कर शव इस तरह लटका दिए गए।
शवों को देखने हजारों लोग इकट्ठा हुये, हरेक की जबान पर था कि यह आत्महत्या नहीं मर्डर है,लेकिन पुलिस ने धारा 174 के तहत अप्राकृतिक मृत्यु के तहत प्रकरण दर्ज किया। घटना के 20 दिन हो जाने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई। परिजनों ने भी गोलमाल रपट दी और चुप्पी साध ली है।
घटना राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के करेड़ा थाना क्षेत्र के सूलिया गांव की है,वहां के निवासी श्याम लाल गर्ग के 21 वर्षीय पुत्र सोनू गर्ग का निकटवर्ती गांव रघुनाथपुरा की एक युवती से प्रेम था,6 अगस्त की रात दोनों अपने अपने घरों से निकले और फिर कभी वापस नहीं लौटे।दूसरे दिन अलसुबह सूलिया के ही निवासी श्रवण नाथ ने लड़के के पिता को जगा कर सूचित किया कि तुम्हारा लड़का हमारे नाथ समाज की लड़की को लेकर कहीं चला गया है,उन्हें ढूंढकर लाओ।
गायब लड़के सोनू गर्ग का पिता श्याम लाल व उसका परिवार उसे व लड़की को कहीं ढूढने जाते इससे पहले ही खबर आ गई कि श्याम लाल गर्ग के ही खेत में सोनू और लड़की दोनों ही पेड़ पर रस्सी की फांसी के फंदे पर झूले हुये है,दोनों के शव लटक रहे हैं।
घटना के बाद शवों को देखने वाले लोगों ने बताया कि जिस तरह से रस्सी बंधी थी,वह कोई सुसाइड करने वाला नहीं बांध सकता है,पेड़ की जिस डाली से रस्सी बंधी थी,वह भी इतनी मजबूत न थी कि उस पर लटक कर दो जवान बच्चे तड़फते हुये जान दे सके। लड़के ने जूते पहन रखे थे ,वह जूते पहने हुए पेड़ पर कैसे चढ़ा होगा,लड़की के भी चप्पल वहीं नीचे पड़े मिले, घटना स्थल से कुछ ही दूरी पर चट्टान के पास खून पड़े थे,संघर्ष के निशान थे,लड़के के कपड़ों पर पीठ की तरफ रगड़ के निशान थे,वहां पर मंगलसूत्र, सिंदूर,पायजेब और बियर के दो बोतल भी मिले हैं।लड़की की जुबान बाहर निकली हुई थी और बाल बिखरे हुये थे,जबकि लड़के की जुबान नहीं निकली हुई थी।
लड़की के पिता के मीडिया में छपे बयानों के मुताबिक उनकी अपनी बेटी से रात 11 बजे बात हुई थी और रात 12 बजे लड़के सोनू से उनकी फोन पर बातचीत हुई थी,जिसमें उसने खुद को सूलिया निवासी सोनू गर्ग बताया था और स्वयं को लड़की का पति व खुद को दामाद कहा था,फिर अगले कईं घंटे चुप्पी छा गई और सुबह सीधे लाशें ही बरामद हुई।
आखिर रात में क्या हुआ,कैसे हुआ,किसने किया ? सवाल यह भी है कि इतने पुख्ता सबूतों,परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के बावजूद पुलिस,पब्लिक और वहां के नेता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों  ने इस ऑनर किलिंग को हत्या नहीं मानते हुए महज दुर्घटना मानने की शर्मनाक एकता क्यों दिखाई ? पुलिस ने इस हत्या को अप्राकृतिक मृत्यु क्यों मान लिया ?
पुलिस ने अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल व दोनों मृतकों के परिजनों व मित्र सहयोगियों से पूछताछ क्यों नहीं की? केस को आगे क्यों नहीं बढ़ाया ?
क्या इस ऑनर किलिंग में कोई बड़ी साजिश है,क्या कुछ प्रभावशाली लोग इसमें शामिल है ? सवाल तो है ही कि आखिर कौन है इन मासूम प्रेमियों के हत्यारे ? किसने मारा है उनको,कितने लोग है इस षड्यंत्र व अपराध में शामिल ? क्या इस सच्चाई से पर्दा नहीं उठना चाहिए ? 
इससे ज्यादा विडम्बना क्या होगी कि जिस दिन ऑनर किलिंग के ख़िलाफ़ कानून पारित होता है,उसके तुरन्त बाद ही इज्जत के खातिर यह प्रेमी युगल मार डाला जाता है।
सबसे भयानक बात तो यह है कि इस ऑनर किलिंग के पक्ष में इस क्षेत्र में आपराधिक खामोशी व्याप्त है। ज्यादातर लोग अब कह रहे हैं कि मरने वालों के कर्म ही ऐसे थे,अलग अलग जाति के होकर उन्होंने प्यार क्यों किया ? 
जो लोग इस हत्याकांड का पर्दाफाश करवाना चाहते हैं, सच्चाई को सामने लाने के इच्छुक हैं,दोषियों के खिलाफ कार्यवाही चाहते हैं,उनकी संख्या बहुत ही कम है,वे कथित मेजोरिटी जातियों से डरे हुये है ,दबे सहमे हुये हैं,कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि इस इलाके में कईं लोग थैला लटका कर सामाजिक कार्यकर्ता बने हुए घूमते है,मानव अधिकारों की दुहाई देते हैं,उन्हें यह अन्याय नजर नहीं आता,न दलित संगठन,न बहुजन मिशन,न मूलनिवासी मूवमेंट ,न महिला संगठन किसी को भी यह ऑनर किलिंग नजर नहीं आई, उन्होंने अपने मुंह में दही जमा लिया है। 
मीडिया,हत्यारे,पीड़ित सब गड्डमगड्ड है,साज़िश बहुत गहरी है,स्थानीय स्तर पर सब घालमेल है,किसी उच्च स्तरीय जांच के बिना इस जघन्य कांड की सच्चाई का राजफ़ाश संभव नहीं हैं।
सरकार को अपने नये कानून के आलोक में सूलिया के इस केस को एक नजीर बना कर प्रस्तुत करना चाहिए,ताकि किसी और प्रेमी जोड़े को किसी के हाथों इज्जत के खातिर अपनी जान न गंवानी पड़े।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 4 months ago on August 25, 2019
  • By:
  • Last Modified: August 25, 2019 @ 4:07 pm
  • Filed Under: मीडिया

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

पिंकसिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष और महासचिव बर्खास्त..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: