/मनीष छोटे भाई, अन्ना बड़े भाई…। सब भाई-भाई, अब नहीं होगी कोई लड़ाई..।।

मनीष छोटे भाई, अन्ना बड़े भाई…। सब भाई-भाई, अब नहीं होगी कोई लड़ाई..।।

खबर है कि मनीष तिवारी के वकील ने अन्ना के वकील को जो लिखित माफी-नामा भेजा था उसे मंजूर कर लिया गया है। अन्ना बाबूराव हजारे ने मनीष तिवारी को उनके कहे अपशब्दों के लिए माफ कर दिया है। अब रालेगण सिद्धि से वकील का जवाब आने वाला है। दरअसल मनीष तिवारी ने यह माफीनामा अन्ना हज़ारे के वकील के उस नोटिस के जवाब में भेजा था जिसमें कथित मानहानि के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई थी।

गौरतलब है कि मनीष तिवारी ने अन्ना हजारे के अनशन के दौरान उन्हें भ्रष्टाचारी कहा था, उन पर सेना के कोर्ट मार्शल होने का आरोप लगाया था। मर्यादा की सारी सीमा का उल्लघन करने वाले मनीष तिवारी ने बकयादा प्रेस वार्ता करके अन्ना हजारे जैसे वरिष्ठ व्यक्ति को तुम कहकर संबोधित किया था।

हालांकि आलोचनाओं के घेरे और जगहंसाई होने के बाद मनीष तिवारी ने सामूहिक रूप से माफी मांगी थी। लेकिन 8 सिंतबर को अन्ना हजारे के वकील मिलिंद पवार ने मनीष तिवारी को मानहानी का नोटिस भेजकर इस प्रकरण को फिर से ताजा कर दिया था। जिसके जवाब में मनीष तिवारी ने लिखित रूप से अन्ना हजारे को अपना माफीनामा भेजा जिस पर अन्ना ने कहा कि पश्चाताप से बड़ा कोई प्रायश्चित नहीं होता है इसलिए मनीष तिवारी को मैं माफ करता हूं।

आपको बता दें कि अन्‍ना हजारे को भेजे गये लिखित माफीनामें में मनीष तिवारी ने लिखा है कि वह इस मामले में पहले भी 25 अगस्‍त को माफी मांग चुके हैं। मनीष तिवारी के इस संदेश की एक प्रति अन्ना के वकील पवार ने बुधवार को जारी किया है।

माफी-नामे में मनीष ने लिखा है कि उनकी बातों से अन्ना हजारे को दुख पहुंचा जिसका उन्हें बहुत अफसोस है। अन्ना उनसे उम्र में काफी बड़े हैं, इसलिए मुझे छोटा भाई समझ कर मेरी गलतियों और मेरी अभद्रता को क्षमा कर दें। और वो उम्मीद करते हैं कि मेरे लिखित माफी-नामे पढ़कर वो मामले को और आगे नहीं बढ़ाएगें।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.