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बिल के विरोध में IPS अधिकारी ने दिया अपने पद से इस्तीफ़ा..

By   /  December 12, 2019  /  No Comments

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-प्रियांशु।।

महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस अधिकारी अब्दुर रहमान ने घोषणा की है कि वह राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 (CAB) के पारित होने के कारण भारतीय पुलिस सेवा को छोड़ रहे हैं।

रहमान वर्तमान में मुंबई पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात हैं। वो एक लेखक भी रह चुके है,और उन्होंने ‘डेनियल एंड डिप्रिवेशन’ तथा “इंडियन मुस्लिम आफ्टर सच्चर कमेटी एंड रंगनाथ मिश्रा कमिशन रिपोर्ट”, जैसी किताबें लिखी है।

उन्होंने बुधवार के दिन बिल के पास हो जाने के बाद ट्वीट कर के ये जानकारी दी कि, “नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 संविधान की मूल विशेषता के खिलाफ है।मैं इस विधेयक की निंदा करता हूं।सविनय अवज्ञा में मैंने कल से कार्यालय में उपस्थित नहीं होने का निर्णय लिया है। मैं आखिरकार सेवा छोड़ रहा हूं”।

“यह विधेयक भारत के धार्मिक बहुलवाद के खिलाफ है। मैं सभी न्यायप्रिय लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे लोकतांत्रिक तरीके से विधेयक का विरोध करें। यह संविधान की मूल विशेषता के खिलाफ है”।

देश भर में भारी विरोध के बावजूद राज्यसभा ने कल 11 दिसंबर को नागरिकता संशोधन विधेयक पारित कर दिया। बिल के पक्ष में 125 सांसदों का मत गया जबकि विपक्ष द्वारा किया जा रहा सड़क पर आक्रोश मतगणना के वक़्त 105 पर ही लुढ़क गया। आपको बता दें कि लोकसभा ने सोमवार को इस विधेयक को 311-80 के अंतर से पास किया था।

बिल में 12 साल के बजाए भारत में सात साल के निवास के बाद बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदुओं, जैनियों, ईसाइयों, सिखों, बौद्धों और पारसियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है, जो वर्तमान मानदंड है, भले ही उनके पास कोई दस्तावेज हो या न हो।

विधेयक मुसलमानों को छोड़कर, नागरिकता प्रदान करने के लिए एक कसौटी के रूप में धर्म के बीच भेदभाव पैदा करता है इसीलिए इसको संविधान तथा मुस्लिम विरोधी होने के रूप में आलोचना की गई है और जगह जगह इसके लोग सड़क पर उतर रहे है। बिल पास होने के बाद पूर्वोत्तर राज्य समेत पूरे भारत में सविनय नागरिक आंदोलन ने रफ्तार पकड़ ली है।

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  • Published: 2 months ago on December 12, 2019
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  • Last Modified: December 12, 2019 @ 9:17 am
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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