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अमित शाह अब सदन में भी बोलने लगे है सफ़ेद झूठ..

By   /  December 13, 2019  /  No Comments

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-प्रियांशु।।

भारतीय राजनीति के हालिया परिदृश्य में राजनेताओं के सरे-आम झूठ बोलने का रिवाज़ अब उतना ख़ास और प्रासंगिक नहीं रहा है, क्योंकि देश के प्रधानमंत्री से लेकर ना जाने कितने सड़क छाप छुटभैया नेताओ ने देश के एकमात्र नंबर एक व्हाट्सएप युनिवर्सटी से झूठ बोलने में पीएचडी कर रखी है।

तमाम झूठ की मंडलियों में शामिल होते हुए अब हमारे देश के गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने सदन में खड़े होकर ऑन रिकॉर्ड एक बड़ा ही दिलचस्प झूठा दावा किया है।
गृहमंत्री अमित शाह जी ने कहा – “1947 में पाकिस्तान में 23 फीसदी हिंदू थे लेकिन वहीं साल 2011 में ये आकंड़ा 3.4 फीसदी रह गया. पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को देखते हुए भारत मूकदर्शक नहीं बन सकता. वहीं भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी बढ़ी है. पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों पर भारत चुप नहीं रहेगा।”

जबकि हक़ीक़त तो ये है कि पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी के बढ़ने की रफ्तार भारत में हिंदुओं की आबादी बढ़ने की रफ़्तार से कहीं ज़्यादा है। अमित शाह ने वॉट्सएप युनिवर्सटी पर 1947 का रिकॉर्ड तो पढ़ लिया किन्तु इसकी सच्चाई सदन और पूरे देश नहीं समझ पाए। उन्होंने 1941 के जनगणना के आधार पर दिए गए रिकॉर्ड को 1947 का दिखा कर पेश कर दिया, जबकि बंटवारे के बाद भीषण रक्तपात में कई लोग मारे गए थे,वहीं कितनो ने इधर से उधर पलायन किया था।

बंटवारे के बाद जब स्थांतरण स्थिर हो गया तब पाकिस्तान कि पहली जनगणना 1951 में हुई थी जिसके मुताबिक पाकिस्तान में 12.9 फ़ीसदी हिंदू थे ( पश्चिमी पाकिस्तान में 3.44 % और पूर्वी पाकिस्तान में 22.05 %) ।
इसके बाद बेशक 1961 के जनगणना में यह आंकड़ा घट के 3.44% से 2.80% पर आ गई लेकिन जब 1971 में जनगणना हुई तो यह बढ़ के फिर 3.25 प्रतिशत पहुंच गई। फिर 1981 में जनगणना हुई और पाकिस्तान में हिन्दुओं की आबादी कुल पाकिस्तान की आबादी की 3.33 फीसदी हो चुकी थी।

इसके बाद पाकिस्तान की आंतरिक परिस्थितियों के कारण अगली जनगणना पंद्रह वर्ष के अंतराल पर 1998 में हुई थी जिसमें हिंदुओ की आबादी 3.75 फीसदी पहुंच चुकी थी जो स्वतंत्र पाकिस्तान में अबतक सबसे ज्यादा थी। आखिरी जनगणना 2017 में हुई थी जिसके विस्तृत धार्मिक आकंड़ों कि जानकारी आना अभी बाकी है ।

हालांकि”हिन्दू काउंसिल ऑफ पाकिस्तान” के मुताबिक हिंदुओं की आबादी पाकिस्तान में 4 फ़ीसदी है। 1981 की जनगणना की तुलना में पाकिस्तान में हिंदू आबादी 93 फ़ीसदी बढ़ी है। हिंदू काउंसिल के मुताबिक पाकिस्तान में 80 लाख हिंदू रहते हैं। वहीं सिंध में अभी भी में सबसे ज़्यादा हिंदू आबादी है।

यदि हम बात तब के पश्चिमी पाकिस्तान और अभी के बांग्लादेश की करे तो आंकड़े यहां भी अमित शाह जी को झूठला ही रहे है। क्योंकि भारत और नेपल के बाद बांग्लादेश हिंदुओ की आबादी के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा देश है। जहां तक 1951 में बांग्लादेश में हिंदुओं की कुल आबादी 9.2 मिलियन थी जो बढ़ के 1961 में 9.3 मिलियन, 1974 में 9.6 मिलियन, 1981 में 10.5 मिलियन, 1991 में 11.17 मिलियन, 2001 में 11.37 मिलियन और आखिरी जनगणना 2011 के अनुसार 12.49 मिलियन हो गई। इसके अलावा कई सारे बांग्लादेशी हिन्दू भारत में आए है जिसके लिए केंद्र सरकार ने नागरिक संशोधन बिल पास करवाया है।

लेकिन इसके बावजूद व्हाट्सऐप युनिवर्सिटी के जरिये भारत में मुस्लिम आबादी के बारे में अनाप-शनाप फैलाया जा रहा है। जैसा कि गृह मंत्री जी ने कहा ठीक वैसा ही बताया जा रहा है कि पहले पाकिस्तान में 24 फीसदी हिंदू थे जो अब मात्र दो फीसदी रह गये जबकि भारत में मुस्लिमों कि आबादी अब 24 फीसदी हो गई है। जबकि हक़ीक़त ये है कि 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में मुस्लिमों की कुल आबादी 14.2 प्रतिशत है।

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  • Published: 6 months ago on December 13, 2019
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  • Last Modified: December 13, 2019 @ 8:55 pm
  • Filed Under: राजनीति
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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