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राजनीतिक बयानबाजी और देशहित..

By   /  December 24, 2019  /  No Comments

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-केशी गुप्ता।।

दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली की जनता को संबोधित करते हुए अपने तथा अपनी पार्टी के द्वारा शुरू की गई योजना और उपलब्धियों के बारे में दिल्ली की जनता को अवगत करवाया साथ ही विपक्षी पार्टियों को बेईमान तथा झूठे वादे करने वाले बताते हुए कहा कि विपक्षी पार्टियों उनके कार्यों में रुकावट पैदा करने की कोशिश करती हैं तथा गलत अफवाह फैलाती है। दिल्ली सरकार के विरोध में उन्होंने पानी वातावरण प्रदूषण यातायात इत्यादि को लेकर बहुत से मुद्दे उठाएं। मगर उन्होंने एमसीडी से संबंधित कोई बात नहीं की । दिल्ली की सड़कों की जो हालत है वह किसी से छिपी नहीं है जगह-जगह गड्ढे तथा गंदगी देखने को मिलती है। जिसके चलते दिल्ली की जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आज भी दिल्ली की जनता स्वच्छ भारत का सपना संजोए हुए हैं।
भारतीय नागरिकता अधिनियम के पक्ष में उन्होंने अपनी बात को रखते हुए विपक्षियों को धर्म के नाम पर जनता को भड़काने का उत्तरदाई ठहराया। अनेकता में एकता देश की विशेषता का नारा लगाकर उन्होंने अपने और अपनी पार्टी को धर्मनिरपेक्षता का आदर करने वालों मैं रखा। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक सभी राजनीतिक पार्टी धर्म की राजनीति करती आई है उन्होंने एक जगह जनता को संबोधित करते हुए यह भी कहा यदि ईश्वर ने दिमाग दिया है तो उसका इस्तेमाल करें और सोचे की उनकी पार्टी का देश हित में बड़ा योगदान है। केवल भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जो गरीबों के हित में काम करती है तथा चुनावों के दौरान किए गए अपने वादों को पूरा करती है। इस हिसाब से तो आजादी के बाद से अब तक के सफर में केवल उन्हीं सालों में देश में कुछ काम हुआ जब भाजपा सरकार देश में कार्यरत हुई ना कांग्रेस पार्टी ने कोई काम किया ना ही आम आदमी पार्टी तथा अन्य किसी पार्टी ने।
माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के अनुसार आसाम में एनआरसी से निकाले गए लोगों के लिए एक भी डिटेंशन सेंटर नहीं है यह सिर्फ विपक्ष द्वारा उड़ाई गई एक अफवाह है जबकि तथाकथित तथ्यों के अनुसार आसाम मे 6 डिटेंशन सेंटर बनाने का प्रस्ताव है। 2012 में कांग्रेस द्वारा पहला डिटेंशन सेंटर बनाया गया था। 2014 में केंद्र द्वारा हर स्टेट को एक डिटेंशन सेंटर बनाने को कहा गया। आसाम के गोपाल पाड़ा मैं एनआरसी से संबंधित लोगों के लिए सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर बनाया जा रहा है जिस पर तकरीबन 45 करोड़ का खर्चा किया जा रहा है इसका काम सितंबर 2018 में शुरू हुआ था और दिसंबर 2019 तक होना तय हुआ। सोंडेकोप्पा गांव में बेंगलुरु से 30 किलोमीटर दूर डिटेंशन सेंटर बनाया जा रहा है जो जनवरी में शुरू होने की संभावना है। डिटेंशन सेंटर गैर कानूनी तौर से आने वाले लोगों को रखने की जगह है जो जेल से अलग है। यहां इन लोगों को तब तक ठहराया जाता है जब तक की नागरिकता साबित ना हो या इन्हें वापिस ना भेज दिया जाए। तथाकथित सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2011 से अब तक तकरीबन 28 मौतें डिटेंशन सेंटर में हो चुकी है।
सवाल ये उठता है कि आखिर इस तरह के बयान बाजी का क्या उद्देश्य है? अभी हाल ही में यूपी के मुख्यमंत्री ने अपने एक बयान में एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन करने वालों को सबक सिखाने और बदला लेने की बात। क्या इस तरह की बयानबाजी देश हित में उचित है? सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान वालों पहुंचाने वालों को सजा देना या रोकना एक बात है मगर बदला लेने की भावना अलग बात है। क्या यह अनेकता में एकता की बात को सार्थक करता है?किसी भी देश की जनता या आवाम अपने द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों से एक सुचारू व्यवस्था की अपेक्षा रखती है जो उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सके। क्या बेहतर हो की किसी भी तरह की गलत बयानबाजी और राजनीति खेल की बजाए देश के प्रतिनिधि तथा अन्य सभी नेता देश की प्रगति और जनता की खुशहाली समृद्धि की और ध्यान दें।

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  • Published: 1 month ago on December 24, 2019
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  • Last Modified: December 24, 2019 @ 12:23 pm
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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