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असली ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ कौन हैं.?

By   /  December 29, 2019  /  No Comments

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-भंवर मेघवंशी।।

कुछ दिन पहले देश के गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली और अन्य स्थानों की यूनिवर्सिटीज में एनआरसी व सीए ए के खिलाफ आंदोलनरत लोगों को ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ कह कर उनपर शांति व्यवस्था भंग करने की तोहमत लगाई,ऐसा ही कमोबेश रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कहते रहे हैं,आई टी सेल तो इस तरह के जुमले गढ़ने के लिए कुख्यात है ही,आज ही एक और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि -‘भारत में जो काम मुगलों व अंग्रेजों ने नहीं किया,वह काम राहुल और टुकड़े टुकड़े गैंग के लोग कर रहे हैं।’

राजनीति में भाषा का यह पतन अब कोई नई बात नहीं रही है,काफी कुछ ऐसा कहा व लिखा जा रहा है,जिसे अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है,आखिर अपने से असहमत विचार के लोगों या समूहों,संस्थाओं अथवा दलों को गैंग कौन कह सकता है ? किसी आपराधिक पृष्ठभूमि से आये लोग अथवा क्रिमिनल माइंडसेट वाले तत्व ही इस तरह की शब्दावली रच सकते हैं,अन्यथा अपने विरोधी समूहों को गैंग कौन कहता है ?

आज देश में अल्फ़ाज़ों का ऐसा खेल चल रहा है कि बड़े बड़े भाषा विज्ञानी भी सत्तासीन उच्च पदस्थ लोगों की मानसिक रुग्णता व आपराधिक साजिश को समझ पाने में विफल होते प्रतीत रहे हैं।

रह रह कर दक्षिणपंथी विचार समूहों के लोग व संगठन अलग विचार के व्यक्तियों व संस्थाओं के लिए कहते रहते है कि ये ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ के लोग है ,जो देश को अस्थिर करने में लगे हुए है।

वो जब ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ कहते हैं तो कुछ विचारवान लोगों में इसकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है,मुझे लगता है कि अब इसकी जरूरत नहीं हैं,हमें राजनीतिक भाषा के क्षरण के इस समय में उनके द्वारा दी जा रही पहचानों को उन्हीं को लौटाना शुरू करना चाहिए ,जैसे कि जब वे टुकड़े टुकड़े गैंग कहते हैं तो हमको कहना चाहिए कि यह वे खुद के लिए ही कह रहे हैं,जैसा कि आज भाजपा के ही एक पूर्व नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा है कि -‘भारत में सबसे खतरनाक टुकड़े टुकड़े गैंग में सिर्फ दो लोग शामिल है,दुर्योधन व दुःशासन। दोनों भाजपा में है।इनसे सावधान रहें ।’

दरअसल टुकड़े टुकड़े गैंग एक विघटनकारी अवधारणा को चिन्हित करने वाला टर्म है और पूरा देश जानता है कि विश्व में सबसे ज्यादा विभाजनकारी तत्व किस संस्कृति में मौजूद रहे हैं। कौन सा आध्यात्मिक समूह है जो वर्णों,जातियों,गौत्रों,उपगौत्रों ,नखों, खांपों में विभाजित है,एक ही देश में रहने वाले लोगों को किसने इतने टुकड़ों में बांटा ,एक धर्म के लोगों को 4 वर्णों,साढ़े 6 हजार जातियों और लाखों गौत्रों उपगौत्रों में जिन्होंने विभाजित किया,वो सबसे बड़े और असली वाले टुकड़े टुकड़े गैंग हैं।

जिन्होनें रक्त शुद्धि,ऊंच नीच के फ़र्ज़ी दम्भ को प्रतिस्थापित किया और लोगों को पवित्र अपवित्रता के सिद्धांत के खांचों में बाँटा वे विभाजनकारी ताकतें असली टुकड़े टुकड़े गैंग हैं।

जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई से किनारा करके सनातनी प्रभु वर्ग के पुरुषों को संगठित करके उनमें कट्टरता भरने वाला विघटनकारी संगठन बनाया और उससे मुसलमानो एवम अपनी ही धर्म की औरतों को उससे अलग रख दिया,ऐसे अलगाववादी तत्व और उनके संघ असली टुकड़े टुकड़े गैंग है।

जो सदियों से व्याप्त सामाजिक आर्थिक बहिष्करण और जाति जन्य निर्योग्यताओं को समाप्त करने वाली संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था का खुलेआम विरोध करते हैं ,दरअसल वे टुकड़े टुकड़े गैंग के असली वारिस है।

जो तत्व वो हाशिये पर धकेल दिए गये लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने वाले किसी भी विचार या पद्धति के ख़िलाफ़ वाले तत्व हैं,वे ही तो टुकड़े टुकड़े गैंग के लोग हैं।

जिन समूहों,लोगों और विचारधाराओं ने धर्म,अर्थ और राजसत्ता एवं सारे संसाधनों पर एकतरफा कब्ज़ा कर लिया और बाकी लोगों को रोटी के एक एक टुकड़े के लिए भी मजबूर कर दिया,वो लोग अगर हक मांगते वंचितों को टुकड़े टुकड़े गैंग कह रहे है तो यह इतिहास का सबसे बड़ा आपराधिक झूठ है,इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए,क्योंकि जिन्होंने इस देश की करोड़ों करोड़ आबादी को निवास के लिए अथवा खेती या व्यवसाय के लिए जमीन के एक टुकड़े के लिए भी मोहताज कर दिया,वो लोग अगर बेघर बेदर लोगों पर अधिकार मांगने पर टुकड़े टुकड़े गैंग होने का आरोप लगाए तो इस साजिश का पुरजोर पर्दाफ़ाश कीजिये,क्योंकि रोटी का टुकड़ा या जमीन का टुकड़ा अथवा सम्मान के लिए बिछी बिसात पर अपने हिस्से का एक टुकड़ा मांग रहे लोगों का संगठन टुकड़े टुकड़े गैंग नहीं हो सकता हैं,उन वंचितों व उत्पीड़ितों का तो संगठन होगा। गैंग तो माफिया और तड़ीपार लोग बनाते हैं,अपराधी और विघटनकारी तत्व गैंग के विशेषज्ञ होते हैं,आम जन,गरीब,मजदूर,दलित,किसान ,अल्पसंख्यक समूह जो पहले ही टुकड़े टुकड़े कर दिए हैं और टुकड़े टुकड़े के लिए मोहताज़ कर दिए गए हैं,वे क्या ही टुकड़े टुकड़े गैंग होंगे ?

तो असली टुकड़े टुकड़े गैंग आज वही है जो देश के वंचित लोगों को टुकड़े टुकड़े गैंग कह रहे हैं,इसमें सत्ता प्रतिष्ठान और तमाम सारे संसाधनों पर कब्ज़ा जमाये बैठे वर्चस्ववादी और विभाजनकारी तबके शामिल हैं,वंचित समूह कभी भी टुकड़े टुकड़े गैंग नहीं होते,क्योंकि वे तो पहले ही टुकड़े टुकड़े गैंग के शिकार हो चुके होते हैं,पर अज़ीब चालाकी यह है कि असली टुकड़े टुकड़े गैंग ने दूसरों की तरफ अंगुली उठा दी है और अपने जरखरीद मीडिया,साईबर सेनाओं और मूढ़मति भक्तों के ज़रिए यह साबित कर दिया है कि जो पीड़ित है,वही अपराधी है,इस तरह तड़ीपार अपराधी भी मसीहा बन जाते हैं और लोग उन्हें अपना आदर्श नायक मानने लगे है ,आज हालात यह है कि असली टुकड़े टुकड़े तत्व महानता की सर्वोच्च शिखर पर बैठ चुके हैं,लोग उन्हें अपना आदर्श नायक मानने लगे है ,आज हालात यह है कि असली टुकड़े टुकड़े तत्व महानता की सर्वोच्च शिखर पर बैठ चुके हैं,लोग उनकी असलियत को पहचान ही नहीं पाने में निरन्तर अक्षम होते जा रहे हैं,जो कि दुःखद हैं।

तो अगली बार कोई “टुकड़े टुकड़े गैंग” के टर्म का उपयोग करे तो समझ जाईये कि वो खुद का परिचय दे रहें हैं,उनको तुरंत पहचान जाईये।

( लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार व सामाजिक कार्यकर्ता है )

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  • Published: 4 weeks ago on December 29, 2019
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  • Last Modified: December 29, 2019 @ 11:13 am
  • Filed Under: नज़रिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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